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जेडी वेंस की इस्लामाबाद यात्रा फिलहाल टली, पश्चिम एशिया में बढ़ा युद्ध का खतरा; ट्रंप ने भी साफ कर दिया रुख

सात सप्ताह से चल रहे युद्ध को समाप्त करने के लिए ईरान के साथ शांति वार्ता के लिए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस की इस्लामाबाद यात्रा को स्थगित कर दिया गया है, क्योंकि तेहरान अमेरिकी वार्ता संबंधी शर्तों पर कोई प्रतिक्रिया देने में विफल रहा है।

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जेडी वेंस नहीं जा रहे इस्लामाबाद। (PTI Photo)

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव और सात हफ्तों से चल रहे संघर्ष के बीच कूटनीतिक कोशिशों को बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस की पाकिस्तान यात्रा फिलहाल टाल दी गई है, जो इस्लामाबाद में प्रस्तावित शांति वार्ता के अगले दौर के लिए अहम मानी जा रही थी।

क्यों टली वैंस की यात्रा?

वेंस को मंगलवार सुबह इस्लामाबाद के लिए रवाना होना था, जहां बुधवार को बातचीत फिर से शुरू होनी थी, उसी दिन अमेरिका और ईरान के बीच नाजुक युद्धविराम की अवधि समाप्त होने वाली है। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि ईरान ने अभी तक वार्ता को लेकर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। कूटनीतिक सूत्रों का कहना है कि बिना ठोस जवाब के बातचीत आगे बढ़ाना मुश्किल हो गया है, जिससे पूरी प्रक्रिया ठहराव की स्थिति में पहुंच गई है।

हालांकि, यह यात्रा पूरी तरह रद्द नहीं हुई है। यदि तेहरान की ओर से सकारात्मक संकेत मिलता है, तो वैंस कभी भी इस्लामाबाद के लिए रवाना हो सकते हैं। अमेरिकी अधिकारी इस बात का स्पष्ट संकेत भी चाहते हैं कि ईरान के प्रतिनिधिमंडल को समझौते तक पहुंचने के लिए पूरी तरह से अधिकार दिए गए हैं।

ट्रंप ने भी दिखाएं हैं सख्त तेवर

वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कभी भी जंग शुरू होने के संकेत दिए हैं। उन्होंने ईरान पर युद्धविराम उल्लंघन के आरोप लगाए हैं।सीएनबीसी के 'स्क्वॉक बॉक्स' कार्यक्रम में यह पूछे जाने पर कि क्या वह ईरान के साथ युद्धविराम की अवधि बढ़ाएंगे ताकि शांति वार्ता के माध्यम से युद्ध समाप्त करने के लिए कोई समझौता हो सके, ट्रंप ने कहा कि मैं ऐसा नहीं करना चाहता। उन्हें बातचीत करनी है। और, आप जानते हैं कि एक चीज कहना चाहूंगा...ईरान अपनी स्थिति को काफी मजबूत कर सकता है। अगर वे समझौता कर लेते हैं, तो वे फिर से एक मजबूत राष्ट्र, एक शानदार राष्ट्र बन सकते हैं।’’

आगे ट्रंप से पूछा गया कि अगर इस्लामाबाद में होने वाली आगामी वार्ता में कोई प्रगति नहीं हुई तो क्या वह हमले फिर से शुरू करेंगे। इस पर ट्रंप ने कहा, ’हां, मुझे लगता है कि बमबारी करनी पड़ेगी क्योंकि यही बेहतर रुख है। लेकिन, आप जानते हैं, हम तैयार हैं। मतलब, सेना पूरी तरह से तैयार है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान की नौसेना और वायुसेना को भारी नुकसान पहुंचाया है। साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि मौजूदा ईरानी नेतृत्व पहले से अधिक “तर्कसंगत” है, जिससे समझौते की संभावना बन सकती है।

ईरानी बंदरगाहों की ओर जा रहे 28 जहाजों को अमेरिकी सेना ने रास्ते से ही लौटाया

वहीं, पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर तेज हो गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी के चलते अब तक 28 जहाजों को रास्ते से ही वापस लौटा दिया गया है। इसके साथ ही, अमेरिकी सेना ने एक तेल टैंकर पर धावा बोलकर उसे अपने कब्जे में ले लिया है। यह टैंकर कथित तौर पर ईरानी कच्चे तेल की तस्करी में शामिल था। अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड ने ये जानकारी दी है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

पाकिस्तान की मध्यस्थ की भूमिका

पाकिस्तान इस पूरे घटनाक्रम में एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। 11-12 अप्रैल को हुई पहली दौर की वार्ता बेनतीजा रही थी, लेकिन पाकिस्तान ने तनाव कम करने और दोनों पक्षों को फिर से बातचीत की मेज पर लाने के लिए सक्रिय प्रयास किए हैं। अब सबकी नजर ईरान की प्रतिक्रिया पर टिकी है। अगर तेहरान अमेरिकी प्रस्तावों पर सहमति जताता है, तो वार्ता दोबारा शुरू हो सकती है। लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ, तो युद्धविराम खत्म होने के साथ ही क्षेत्र में सैन्य तनाव फिर से बढ़ सकता है।
Shiv Shukla
शिव शुक्ला author

शिव शुक्ला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में कार्यरत एक अनुभवी न्यूज राइटर हैं। छह वर्षों के पेशेवर अनुभव के साथ वे डिजिटल पत्रकारिता में तेज, सटीक और प्रभ... और देखें

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