इस्तांबुल का पुराना नाम क्या था, किसने रखा ये नाम

​इस्तांबुल, तुर्किये का सबसे बड़ा शहर है। यह तुर्किये का आर्थिक, सांस्कृतिक और एतिहासिक हब है। एक आंकड़े के अनुसार तुर्किये की 18 फीसद आबादी इंस्तांबुल में ही रहती है। यह यूरोप के भी सबसे बड़े शहरों में से एक है। दुनिया में सबसे अधिक आबादी वाले शहरों में भी इस्तांबुल का नाम आता है। यह अनोखा शहर है, जो दो महाद्वीपों में फैला है। इस्तांबुल की दो तिहाई जनसंख्या यूरोपीय हिस्से में जबकि बाकी जनसंख्या एशिया में रहती है। भारत से बड़ी संख्या में लोग इस्तांबुल घूमने जाते हैं। लेकिन क्या आप इस्तांबुल के पुराने नामों के बारे में जानते हैं? चलिए जानते हैं और यह भी जानते हैं कि नया नाम इस्तांबुल कैसे पड़ा।​

Authored by: दिगपाल सिंहUpdated Jan 2 2026, 13:18 IST
​बीजान्टियम था पुराना नाम​01 / 10

​बीजान्टियम था पुराना नाम​

​इस्तांबुल के सबसे पहला ज्ञात नाम की बात करें तो यह बीजान्टियम (Byzantium) था। 7वीं शताब्दी ईसा पूर्व में यहां बसने वाले यूनानी उपनिवेशकों ने यह नाम रखा था। यह शहर बोस्फोरस स्ट्रेट के किनारे मौजूद था, जिससे यह व्यापार और नौसैनिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बन गया। बीजान्टियम के संस्थापक बाइजस (Byzas) के नाम पर ही इस शह का नाम पड़ा। उस दौर में धीरे-धीरे यह शहर यूनानी सभ्यता का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया था।​

​बीजान्टियम के बाद क्या नाम पड़ा​02 / 10

​बीजान्टियम के बाद क्या नाम पड़ा​

बात 330 ईस्वी की है। जब रोमन सम्राट कॉन्स्टेंटाइन द ग्रेट ने बीजान्टियम को अपने साम्राज्य की नई राजधानी बनाया। इसके बाद इस शहर का नाम बदलकर कॉन्स्टेंटिनोपल (Constantinople) कर दिया गया। इसका अर्थ है कॉन्स्टेंटाइन का शहर। यह बदलाव सिर्फ नाम का नहीं था, बल्कि शहर को भव्य इमारतों, चर्चों और प्रशासनिक केंद्रों से सजाया गया। यह पूर्वी रोमन साम्राज्य (बाइजेंटाइन साम्राज्य) की राजधानी बना।

​कॉन्स्टेंटिनोपल का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व​03 / 10

​कॉन्स्टेंटिनोपल का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व​

​मध्यकाल में कॉन्स्टेंटिनोपल ईसाई धर्म का एक प्रमुख केंद्र बन गया था। यहां हागिया सोफिया जैसे भव्य चर्च बनाए गए। यह शहर कला, शिक्षा, कानून और वास्तुकला के लिए दुनियाभर में जाना गया। यूरोप और एशिया को जोड़ने के कारण यह व्यापार का भी बड़ा केंद्र था। करीब 1100 सालों तक कॉन्स्टेंटिनोपल शहर बाइजेंटाइन साम्राज्य की राजधानी रहा और मध्यकालीन विश्व के सबसे समृद्ध शहरों में इसकी गिनती होती थी।​

​इस्तांबुल नाम कहां से आया​04 / 10

​इस्तांबुल नाम कहां से आया​

​माना जाता है कि इस्तांबुल नाम ग्रीक भाषा के वाक्यांश ईस तिन पोलिन से निकला है, जिसका अर्थ शहर की ओर होता है। ओटोमन काल में लोग अनौपचारिक रूप से इस नाम का इस्तेमाल करने लगे थे। आधिकारिक तौर पर लंबे समय तक शहर को कॉन्स्टेंटिनोपल ही कहा जाता रहा। लेकिन धीरे-धीरे इस्तांबुल नाम आम बोलचाल और दस्तावेजों में प्रचलित होने लगा।​

​21 साल के युवक से हार गया कॉन्स्टेंटिनोपल​05 / 10

​21 साल के युवक से हार गया कॉन्स्टेंटिनोपल​

साल 1453 में ओटोमन तुर्कों के सुल्तान 21 वर्षीय महमूद द्वितीय (मेहमेद फातेह) ने कॉन्स्टेंटिनोपल को हराकर इस पर जीत दर्ज कर ली। यह घटना मध्यकालीन युग में विश्व इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक मानी जाती है। इसके साथ ही बाइजेंटाइन साम्राज्य का अंत हो गया। मेहमेद के राज में शहर ओटोमन साम्राज्य की राजधानी बना और इस्लामी संस्कृति, मस्जिदों व मदरसों का विकास हुआ।

​आधिकारिक रूप से इस्तांबुल कब हुआ नाम​06 / 10

​आधिकारिक रूप से इस्तांबुल कब हुआ नाम​

​ओटोमन काल में इस शहर को कई नामों से पुकारा गया, लेकिन 1930 में जब तुर्की गणराज्य की स्थापना हुई, उसके बाद आधिकारिक रूप से शहर का नाम इस्तांबुल किया गया। राष्ट्रपति मुस्तफा कमाल अतातुर्क के शासनकाल में यह फैसला किया गया। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कॉन्स्टेंटिनोपल की जगह इस्तांबुल नाम को मान्यता मिल गई।​

​इस्तांबुल के पहले सम्राट कौन थे​07 / 10

​इस्तांबुल के पहले सम्राट कौन थे​

​इस्तांबुल (तत्कालीन बीजान्टियम) का पहला शासक सम्राट कॉन्स्टेंटाइन महान को माना जाता है। उन्होंने ही इसे रोमन साम्राज्य की राजधानी बनाया था। उन्होंने शहर को नया रूप देने के सा ही इसे राजनीतिक व धार्मिक शक्ति का केंद्र भी बनाया। कॉन्स्टेंटाइन ने ईसाई धर्म को संरक्षण दिया, जिससे शहर ईसाई दुनिया का प्रमुख केंद्र बन गया। उनके शासन से ही कॉन्स्टेंटिनोपल का स्वर्ण युग शुरू हुआ था।​

​बाइजेंटाइन साम्राज्य का आखिरी सम्राट कौन था​08 / 10

​बाइजेंटाइन साम्राज्य का आखिरी सम्राट कौन था​

​कॉन्स्टेंटिनोपल का अंतिम सम्राट कॉन्स्टेंटाइन XI पैलियोलोगस था। साल 1453 में उन्होंने सुल्तान मेहमेद की ओटोमन सेना के खिलाफ वीरता से अंतिम लड़ाई लड़ी। कहते हैं उन्होंने सम्राट के राजसी वस्त्र उतारकर एक साधारण सैनिक की तरह युद्ध लड़ा और वहीं शहीद हो गए। उनकी मृत्यु के साथ ही बाइजेंटाइन साम्राज्य का अंत हो गया और एक युग समाप्त हुआ।​

​ओटोमन काल में इस्तांबुल की नई पहचान​09 / 10

​ओटोमन काल में इस्तांबुल की नई पहचान​

​ओटोमन शासन में इस्तांबुल को नई पहचान मिली। हागिया सोफिया को मस्जिद में बदल दिया गया और कई शानदार मस्जिदें जैसे सुलेमानिये मस्जिद बनाई गईं। इस्तांबुल इस्लामी दुनिया की सबसे प्रभावशाली राजधानियों में से एक बन गया। शिक्षा, व्यापार, कला और स्थापत्य में शहर ने नई ऊंचाइयां हासिल कीं और फिर सदियों तक ओटोमन साम्राज्य की राजधानी बना रहा।​

​आधुनिक इस्तांबुल की ऐतिहासिक पहचान​10 / 10

​आधुनिक इस्तांबुल की ऐतिहासिक पहचान​

आज का इस्तांबुल एक ऐसा शहर है जहां यूनानी, रोमन, बाइजेंटाइन और ओटोमन सभ्यताओं की झलक एक साथ नजर आती है। यह एशिया और यूरोप को जोड़ने वाला एक अनोखा शहर है। इसके पुराने नाम और शासक इसके गौरवशाली अतीत की कहानी कहते हैं। इस्तांबुल सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि हजारों वर्षों की सभ्यता और इतिहास का एक जीता-जागता संग्रहालय है।

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