दुनिया

हिजबुल्लाह के रॉकेट हमले के बाद इजरायल ने उठाया बड़ा कदम, समुद्र तटों को कर दिया बंद

World News: एक तरह हिजबुल्ला ये कह रहा है कि वो इजरायली सेना का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है। तो वहीं दूसरी ओर इजरायल में हुए रॉकेट हमले के बाद इस देश की सेना ने बड़ा फैसला लिया है। इजरायल में सार्वजनिक समारोहों को सीमित कर दिया और समुद्र तटों को बंद कर दिया गया है।

Image

इजराइल हिजबुल्लाह संघर्ष।

Photo : Twitter

Israel vs Hezbollah: हिजबुल्लाह और इजरायली सेना के बीच संघर्ष का दौर जारी है। हिजबुल्लाह के प्रवक्ता ने ऐसा दावा किया है कि उसके लड़ाके इजरायल के सैनिकों के साथ ‘आमने-सामने की लड़ाई’ के लिए तैयार हैं। वहीं बड़ी खबर ये सामने आ रही है कि इजरायल ने अपने समुद्री तटों को बंद करने का फैसला लिया है। आपको सबकुछ तफसील से समझाते हैं।

इजरायल ने समुद्र तटों को कर दिया बंद

एपी की रिपोर्ट के अनुसार, इजरायली सेना ने हिजबुल्लाह के रॉकेट हमले के बाद सार्वजनिक समारोहों को सीमित कर दिया और समुद्र तटों को बंद कर दिया है। वहीं रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि इजरायली सेना का दावा है कि उसने पिछले एक साल में लेबनान में दर्जनों छोटे जमीनी अभियान चलाए हैं।

इजरायली सेना ने लेबनान में शुरू किए हमले

इजरायली सेना ने मंगलवार को कहा कि उसने दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्ला के ठिकानों के खिलाफ ‘‘सीमित, स्थानीय’’ अभियान शुरू कर दिया है। सेना उन गांवों में ‘‘लक्षित जमीनी हमले’’ कर रही है जो इजरायली सीमा के करीब हैं। उसने कहा कि ये ठिकाने ‘‘उत्तरी इजरायल में इजरायली समुदायों के लिए खतरा’’ पैदा करते हैं। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हिजबुल्ला और हमास का समर्थन करने वाले ईरान को सोमवार को चेतावनी दी थी।

उन्होंने लेबनान के हिजबुल्ला समूह के नेता के एक हवाई हमले में मारे जाने के कुछ दिन बाद कहा, ‘‘पश्चिम एशिया में ऐसी कोई जगह नहीं है जहां इजरायल नहीं पहुंच सकता।’’ हिजबुल्ला ने अपने नेता हसन नसरल्ला और अन्य शीर्ष नेताओं के मारे जाने के बाद भी लड़ाई जारी रखने का सोमवार को संकल्प लिया।

नसरल्ला की मौत के बाद आया था ये बयान

आतंकी समूह के कार्यवाहक नेता नईम कासेम ने नसरल्ला की मौत के बाद सोमवार को टेलीविजन पर अपने पहले बयान में कहा कि अगर इजरायल जमीनी हमला करने का फैसला करता है तो हिजबुल्ला के लड़ाके पूरी तरह से तैयार हैं। वहीं, इजरायली सेना ने कहा कि वह लेबनान में हिजबुल्ला के ठिकानों पर ‘‘स्थानीय जमीनी हमले’’ कर रही है।

सेना के प्रवक्ता रियर एडमिरल डेनियल हेगारी ने मंगलवार को मीडिया में जारी एक वीडियो बयान में कहा कि सैनिक यह सुनिश्चित करने के लिए हिजबुल्ला के खिलाफ अभियान चला रहे हैं कि इजरायली नागरिक उत्तरी हिस्से में अपने घरों में लौट सकें। हिजबुल्ला ने गाजा में युद्ध शुरू होने के बाद से ही उत्तरी इजरायल में रॉकेट हमले शुरू कर दिए थे जिससे वहां रहे लोगों को विस्थापित होना पड़ा था।

विध्वंसक युद्ध से डरे लोग हो रहे विस्थापित

इस बीच, संयुक्त राष्ट्र और लेबनान सरकार ने इजरायल के साथ जारी संघर्ष में फंसे नागरिकों के लिए तत्काल 42.6 करोड़ डॉलर की मानवीय सहायता देने की अपील की है। लेबनान के कार्यवाहक प्रधानमंत्री नजीब मिकाती ने कहा कि लेबनान ‘‘अपने इतिहास के सबसे खतरनाक क्षणों में से एक’’ का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि ‘‘लेबनान पर इजरायल के विध्वंसक युद्ध’’ के परिणामस्वरूप 10 लाख लोग विस्थापित हो गए हैं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

और पढ़ें
End of Article