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इजराइल के रक्षा मंत्री ने आधिकारिक रूप से छोड़ा पद, नेतन्याहू ने काट्ज को सौंपी जिम्मेदारी

Israeli Defence Minister Steps Down: इजराइल के रक्षा मंत्री योआव गैलेंट को हटाए जाने के बाद पूरे देश में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। एक समरोह में उन्होंने आधिकारिक रूप से पद छोड़ दिया।

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इजराइल के रक्षामंत्री ने छोड़ा पद।

Photo : Twitter

Israeli Defence Minister Steps Down: इजराइल के रक्षा मंत्री योआव गैलेंट ने शुक्रवार को एक समारोह में आधिकारिक तौर पद छोड़ दिया। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गैलेंट को बर्खास्त करने के बाद उनकी जगह पूर्व विदेश मंत्री इजराइल काट्ज को रक्षा मंत्री नियुक्त किया है। गैलेंट को हटाए जाने के बाद पूरे देश में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।

इजराइल में कई लोग गैलेंट को धुर-दक्षिणपंथी सरकार में एकमात्र उदारवादी व्यक्ति के रूप में देखते थे। उनकी बर्खास्तगी को एक संकेत के रूप में देखा जा रहा है कि बेंजामिन नेतन्याहू की धुर-दक्षिणपंथी सरकार की हमास द्वारा बंधक बनाए गए बंधकों को छुड़ाने में रुचि नहीं रह गई है। गैलेंट ने सेना को धन्यवाद दिया और चेतावनी दी कि युद्ध का मिशन अभी पूरा नहीं हुआ है। हमें अपने नैतिक और पारंपरिक दायित्व को पूरा करना होगा,और युद्ध का उद्देश्य शेष 101 बंधकों को रिहा कराकर स्वदेश लाना है।

नेतन्याहू के वफादारों में शामिल हैं काट्ज

बता दें, योआव गैलेंट की जगह लेने वाले नवनियुक्त रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज लंबे समय से नेतन्याहू के वफादार और अनुभवी कैबिनेट मंत्री हैं। काट्ज ने गैलेंट को धन्यवाद दिया और कहा कि युद्ध का उद्देश्य ईरानी आक्रामकता को रोकना, उसकी क्षमताओं को खत्म करना, हमास का खात्मा और हिज्बुल्ला को हराना है। उन्होंने कहा कि बंधकों को वापस लाना सर्वोच्च "नैतिक प्राथमिकता" है। काट्ज ने कहा, योआव, हम दोस्त थे और दोस्त रहेंगे क्योंकि हम उन्हीं चीजों में विश्वास करते हैं जो इजराइल, यहूदी देश की सुरक्षा और भविष्य को सुरक्षित बनाएंगी।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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