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फिलिस्तीनियों की मदद करेगी इजरायली सेना; नेतन्याहू के रक्षा मंत्री ने किया बड़ा ऐलान

Israeli Army's Big Announcement: क्या इजरायल अपने दुश्मन देश के लोगों के प्रति नरम रुख अख्तियार करने के बारे में विचार कर रहा है? ये सवाल इसलिए उठ रहे हैं, क्योंकि इजरायल के रक्षा मंत्री ने ऐलान बड़ा ऐलान करते हुए ये बताया है कि गाजा छोड़ कर जाने वाले फिलिस्तीनियों की इजरायली सेना मदद करेगी। आपको बताते हैं, उन्होंने क्या कुछ कहा।

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गाजा छोड़ने के लिए फिलिस्तीनियों की मदद करेगी इजरायली सेना।

Israel To Allow Gaza Residents To Leave Via Land: इजरायली रक्षा मंत्री इजरायल कैट्ज ने बृहस्पतिवार को कहा कि उन्होंने सेना को एक योजना तैयार करने का निर्देश दिया है, जिससे गाजा पट्टी छोड़ने के इच्छुक फिलिस्तीनियों की क्षेत्र से बाहर जाने में मदद की जा सके। उनका यह बयान राष्ट्रपति ट्रंप की इस घोषणा पर आया कि अमेरिका गाजा पर नियंत्रण करने, वहां रहने वाले को पुनर्स्थापित करने और इस क्षेत्र का विकास करने का लक्ष्य रखता है।

कैट्ज ने एक्स पर कहा, 'इस योजना में भूमि क्रॉसिंग के जरिए बाहर निकलने के विकल्प शामिल होंगे, साथ ही समुद्र और हवाई मार्ग से प्रस्थान के लिए विशेष व्यवस्था भी शामिल होगी।'

फिलिस्तीनियों को गाजा छोड़ने में मदद करेगी इजरायली सेना

इजरायली मंत्री ने कहा, 'स्पेन, आयरलैंड, नॉर्वे और अन्य देश, जिन्होंने गाजा में इजरायल की कार्रवाइयों पर झूठा आरोप लगाया, कानूनी रूप से गाजा के लोगों को अपने क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति देने के लिए बाध्य हैं। अगर वे मना करते हैं तो उनका पाखंड उजागर हो जाएगा। इस बीच, कनाडा जैसे देश, जिनके पास एक संरचित आव्रजन कार्यक्रम है, ने पहले गाजा के निवासियों को लेने की इच्छा व्यक्त की। कनाडा जैसे देश, जिनके पास एक आव्रजन कार्यक्रम है, ने पहले भी गाजा निवासियों को स्वीकार करने की इच्छा व्यक्त की है।'

कैट्ज ने लिखा, 'गाजा के लोगों को आवागमन और प्रवास की स्वतंत्रता का अधिकार होना चाहिए, जैसा कि दुनिया में हर जगह प्रचलित है। मैं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की साहसिक पहल का स्वागत करता हूं, जो गाजा में रहने वाले उन लोगों के लिए व्यापक अवसर पैदा कर सकती है जो छोड़ना चाहते हैं।'

नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के उस बयान का किया समर्थन

इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान का समर्थन किया जिसमें गाजा पट्टी के पुनर्निर्माण के लिए वहां से फिलिस्तीनियों को स्थानांतरित करने का प्रस्ताव शामिल है। उन्होंने इस योजना को 'असाधारण' बताया।

रिपोर्ट के मुताबिक नेतन्याहू ने अमेरिकी मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में बुधवार को कहा, 'यह पहला अच्छा विचार है जो मैंने सुना है। यह एक उल्लेखनीय विचार है। मुझे लगता है कि इसे आगे बढ़ाया जाना चाहिए और लागू किया जाना चाहिए - क्योंकि यह सभी के लिए एक अलग भविष्य बनाएगा।'

बता दें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि संयुक्त राज्य अमेरिका युद्ध से तबाह गाजा पट्टी पर कब्ज़ा करेगा और फ़िलिस्तीनियों को कहीं और बसाए जाने के बाद इसे आर्थिक रूप से विकसित करेगा। उन्होंने मंगलवार को इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में बिना कोई विशेष जानकारी दिए अपनी आश्चर्यजनक योजना का खुलासा किया।

हालांकि जब इस बयान पर हंगामा हुआ तो व्हाइट हाउस ने बाद में सफाई दी। वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि वाशिंगटन का लक्ष्य केवल फिलिस्तीनियों को 'अस्थायी रूप से' हटाना है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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