Israel Attacks Iran: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच, अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान पर बड़े पैमाने पर हमला किया। इस कार्रवाई में ईरान के कई शहरों को हवाई हमलों के माध्यम से निशाना बनाया गया। इसी बीच इजराइली वायु सेना ने कहा है कि, उन्होंने इतिहास का सबसे बड़ा मिलिट्री फ्लाईओवर प्रदर्शन किया है, जिसमें लगभग 200 फाइटर जेट्स शामिल थे। इस कार्रवाई में पश्चिमी और मध्य ईरान में ईरानी शासन के मिसाइल ढांचे और डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाया गया। शनिवार की सुबह से, IDF (इजराइल डिफेंस फोर्स) ने इंटेलिजेंस और वायु सेना के सहयोग से इस बड़े हमले को अंजाम दिया।
500 ठिकानों को बनाया निशाना
बताया जा रहा है कि, इजराइली वायु सेना (IAF) ने अपने इतिहास का सबसे बड़ा सैन्य उड़ान प्रदर्शन अंजाम दिया, जिसमें सटीक योजना और उच्च स्तरीय खुफिया जानकारी के आधार पर सैकड़ों फाइटर जेट्स को एक साथ समन्वित किया गया। इन जेट्स ने ईरान में कई स्थानों पर करीब 500 ठिकानों को निशाना बनाते हुए भारी मात्रा में हथियार गिराए, जिनमें एरियल डिफेंस सिस्टम और मिसाइल लॉन्चर शामिल थे। इन हमलों के बाद IAF की हवाई श्रेष्ठता ईरानी हवाई क्षेत्र में और मजबूत हो गई, जबकि पश्चिमी ईरान में ईरानी शासन की हमले की क्षमता काफी हद तक कम हो गई।
ईरान में लोगों को घरों में रहने की सलाह
गौरतलब है कि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ एक बड़े सैन्य अभियान की शुरुआत की घोषणा की। उन्होंने ईरानी सुरक्षा बलों से अपने हथियारों को छोड़ने का आग्रह किया और चेतावनी दी कि ऐसा न करने पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं। इसके साथ ही, ट्रंप ने ईरान की जनता से सुरक्षित रहने के लिए घरों में रहने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी, क्योंकि स्थिति बेहद संवेदनशील और खतरनाक हो सकती है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना का मुख्य उद्देश्य अपने नागरिकों की सुरक्षा करना और ईरान से उत्पन्न तत्काल खतरों को समाप्त करना है। उन्होंने ईरान पर आरोप लगाया कि वह लंबे समय से अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के खिलाफ शत्रुतापूर्ण गतिविधियों में शामिल रहा है और स्पष्ट किया कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि पहले किए गए अभियानों में ईरान के परमाणु स्थलों को काफी नुकसान पहुंचाया गया है। उन्होंने बताया कि नया सैन्य अभियान ईरान की मिसाइल और नौसैनिक क्षमताओं को निष्क्रिय करने के उद्देश्य से शुरू किया गया है। राष्ट्रपति ने यह स्वीकार किया कि युद्ध में जोखिम हमेशा रहते हैं, लेकिन अमेरिका अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
