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गाजा पर इजराइली बॉम्बरों का कहर, बिजली-इंटरनेट सब ठप; WHO और UNICEF का कर्मचारियों से टूटा संपर्क

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Oct 28, 2023, 08:04 AM IST

Israel Hamas War: डब्ल्यूएचओ चीफ की ओर से एक्स पर कहा गया कि हमने गाजा में अपने कर्मचारियों, स्वास्थ्य सुविधाओं, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और जमीन पर हमारे बाकी मानवीय सहयोगियों के साथ संपर्क खो दिया है। यूनिसेफ के कार्यकारी निदेशक कैथरीन रसेल ने कहा कि यूनिसेफ ने गाजा में अपने सहयोगियों के साथ संपर्क खो दिया है।

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इजराइल हमास संघर्ष

Photo : AP

Israel Hamas War: हमास के हमले के बाद गाजा पट्टी पर छिड़ा संघर्ष काफी खतरनाक हो गया है। इजराइल ने गाजा पट्टी पर अभूतपूर्व बमबारी शुरू कर दी है। इजराइली सेना अब आसमान और जमीन दोनों तरफ से कहर बरपा रही है। इस बीच खबर आई है कि गाजा पर हुई इस अभूतपूर्व बमबारी के कारण यहां का कम्यूनिकेश सिस्टम पूरी तरह से ठप पड़ गया है। हमलों के बाद गाजा में पूरी तरह से ब्लैकआउट हो गया है और बिजली और इंटरनेट बंद हो गया है।

इस बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टेड्रोस अदनोम घेबियस ने कहा है कि डब्ल्यूएचओ ने गाजा में अपने कर्मचारियों, स्वास्थ्य सुविधाओं, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और जमीन पर अपने बाकी मानवीय सहयोगियों के साथ संपर्क खो दिया है। उन्होंने सभी नागरिकों की तत्काल सुरक्षा और पूर्ण मानवीय पहुंच का आह्वान किया।

यूनिसेफ का भी कर्मचारियों से टूटा संपर्क

डब्ल्यूएचओ चीफ की ओर से एक्स पर कहा गया कि हमने गाजा में अपने कर्मचारियों, स्वास्थ्य सुविधाओं, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और जमीन पर हमारे बाकी मानवीय सहयोगियों के साथ संपर्क खो दिया है। यह घेराबंदी मुझे उनकी सुरक्षा और तत्काल स्वास्थ्य जोखिमों के लिए गंभीर रूप से चिंतित करती है। इसी तरह, यूनिसेफ के कार्यकारी निदेशक कैथरीन रसेल ने कहा कि यूनिसेफ ने गाजा में अपने सहयोगियों के साथ संपर्क खो दिया है।

गाजा में 96 फीसदी लोग करीबी में डूबे

पश्चिमी एशिया के लिए संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक आयोग (ईएससीडब्ल्यूए) ने कहा है कि इजराइल और हमास के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण गाजा के लगभग 96 प्रतिशत लोग गरीबी में डूब गए हैं। समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने ईएससीडब्ल्यूए के एक बयान के हवाले से कहा, इसकी तुलना 2017-2018 में गाजा की 45 प्रतिशत गरीबी दर से की गई है। बता दें, इजराइल और हमास के बीच 7 अक्टूबर से संघर्ष जारी है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, हिंसा में अब तक गाजा में लगभग 7,028 फिलिस्तीनी और इजराइल में कम से कम 1,400 लोग मारे गए हैं।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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