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नेतन्याहू ने फिर उलझाया, जानिए कब से लागू होगा इजरायल-हमास के बीच युद्धविराम समझौता

World News: हमास और इजरायल के बीच युद्धविराम समझौते को लेकर तरह-तरह की जानकारियां सामने आ रही हैं। इस बीच जहां कतर ने ये बताया कि इजरायल-हमास के बीच युद्धविराम समझौता रविवार सुबह साढ़े आठ बजे से लागू होगा। तो वहीं नेतन्याहू ने एक बार फिर सभी को उलझा दिया है। इजरायली पीएम ने कहा है कि हमास के साथ युद्ध विराम को इजरायल अस्थायी मान रहा है।

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नेतन्याहू ने इजरायल और हमास के बीच युद्धवविराम समझौते पर फिर उलझाया।

Netanyahu on Israel-Hamas Ceasefire Agreement: क्या आप ये जानते हैं कि इजरायल-हमास के बीच युद्धविराम समझौता कब से लागू होगा? इससे जुड़ी जानकारी कतर ने साझा की है। वहीं इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपने एक बयान के बाद सभी को उलझन में डाल दिया है। क्या इजरायल और हमास के बीच हो रहे युद्धविराम समझौते का कोई खास मतलब नहीं है? ऐसा हम नहीं कह रहे, बल्कि खुद नेतन्याहू ने ये दावा किया कि हमास के साथ युद्धविराम को इजरायल अस्थायी मान रहा है।

हमास के साथ युद्धविराम को अस्थायी मान रहा इजरायल

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने शनिवार को कहा कि उनका देश हमास के साथ युद्ध विराम को अस्थायी मान रहा है और यदि आवश्यक हुआ तो लड़ाई जारी रखने का अधिकार रखता है। युद्ध विराम शुरू होने से ठीक 12 घंटे पहले राष्ट्र को संबोधित करते हुए नेतन्याहू ने दावा किया कि उन्हें अमेरिका के निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन प्राप्त है, जिनसे उन्होंने बुधवार को बात की थी। नेतन्याहू ने लेबनान और सीरिया में इजरायल की सैन्य सफलताओं को भी हमास द्वारा युद्ध विराम के लिए सहमत होने का कारण बताया। नेतन्याहू ने कहा, ‘‘हमने मध्य पूर्व का चेहरा बदल दिया है।’’

इजरायल-हमास के बीच युद्धविराम समझौता कब से होगा लागू?

हमास और इजरायल के बीच युद्धविराम समझौता स्थानीय समयानुसार रविवार सुबह 8.30 बजे से लागू होगा। कतर के विदेश मंत्रालय ने शनिवार को यह जानकारी दी। कतर के विदेश मंत्री माजिद अल-अंसारी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी पोस्ट में कहा कि युद्धविराम रविवार को स्थानीय समयानुसार सुबह 8:30 बजे (भारतीय समयानुसार दोपहर 12 बजे) से प्रभावी होगा, और लोगों को सावधानी बरतने और अधिकारियों के निर्देशों की प्रतीक्षा करने की सलाह दी। इससे पहले शनिवार सुबह इजरायल के मंत्रिमंडल ने गाजा में युद्ध विराम समझौते को मंजूरी दे दी, जिससे दर्जनों बंधकों की रिहायी हो सकेगी और हमास के साथ 15 महीने से जारी युद्ध रुक जाएगा। उम्मीद है कि इससे दोनों पक्ष अपने सबसे घातक और विनाशकारी संघर्ष को समाप्त करने के एक कदम और करीब पहुंच जाएंगे।

युद्ध विराम की खबर के बावजूद, शनिवार को मध्य इजरायल में सायरन बजते रहे। सेना ने बताया कि उसने यमन से दागे गए रॉकेट को निष्क्रिय कर दिया। ईरान समर्थित हूती चरमपंथियों ने हाल के हफ्तों में अपने मिसाइल हमले तेज कर दिये हैं। समूह का कहना है कि ये हमले गाजा में युद्ध रोकने के लिए इजरायल और पश्चिमी देशों पर दबाव बनाने के लिए है। गाजा में भी इजरायली हमले भी जारी हैं। फलस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि गत दिन कम से कम 23 लोग मारे गए। युद्ध विराम के पहले चरण के तहत हमास इजरायल की कैद में मौजूद सैकड़ों फलस्तीनियों बंधकों की रिहायी के बदले अगले छह सप्ताह में 33 बंधकों को रिहा करेगा। पुरुष सैनिकों सहित बाकी लोगों को दूसरे चरण में रिहा करेगा और इस बारे में पहले चरण के दौरान बातचीत की जाएगी।

हमास ने कहा है कि वह स्थायी युद्धविराम और इजरायल की पूर्ण वापसी के बिना शेष बंदियों को रिहा नहीं करेगा। इजरायल के मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित और उसके राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार द्वारा हस्ताक्षरित युद्धविराम योजना के अनुसार, यह आदान-प्रदान रविवार को स्थानीय समयानुसार शाम चार बजे (भारतीय समयानुसार शाम साढ़े सात बजे) से शुरू होगा। बंधकों की अदला-बदली के तहत बंधकों के सुरक्षित पहुंचने के बाद इजरायल फलस्तीनी कैदियों को रिहा करेगा। योजना के अनुसार पहले चरण के दौरान, 33 जीवित और मृत इजरायली बंधकों के बदले में इजरायल करीब 1,900 फलस्तीनी कैदियों को रिहा करेगा। इजरायल द्वारा रिहा किये जाने वाले कैदियों में 1,167 गाजा के निवासी हैं लेकिन वे सात अक्टूबर, 2023 को इजरायल पर हमास के हमले में शामिल नहीं थे।

19 वर्ष से कम आयु की सभी महिलाओं और बच्चों को किया जाएगा मुक्त

पहले चरण में इजरायल के कब्जे वाले गाजा के 19 वर्ष से कम आयु की सभी महिलाओं और बच्चों को मुक्त कर दिया जाएगा। घातक हमलों के लिए दोषी ठहराये गए सभी फलस्तीनी कैदियों को या तो गाजा या विदेश में निर्वासित कर दिया जाएगा, तथा उनके इजरायल या पश्चिमी तट वापस आने पर रोक लगा दी जाएगी। कुछ का निर्वासन तीन साल का होगा जबकि बाकी हमेशा के लिए निर्वासित होंगे। समझौते तहत हमास 33 बंधकों को छोड़ेगा। इनमें से तीन महिलाओं को पहले दिन रिहा करेगा, सातवें दिन चार को, तथा शेष 26 को अगले पांच सप्ताह में रिहा करने पर सहमति जताई है।

इजरायल के न्याय मंत्रालय ने 700 से अधिक लोगों की सूची जारी की है, जिन्हें समझौते के पहले चरण में रिहा किया जाना है। मंत्रालय ने बताया कि रविवार को स्थानीय समयानुसार शाम चार बजे से पहले रिहाई शुरू नहीं होगी। युद्धविराम समझौते के पहले चरण के तहत इजरायली सैनिकों को बफर जोन में वापस लौटना होगा। साथ ही विस्थापित फलस्तीनियों को गाजा शहर और उत्तरी गाजा सहित अपने घरों में लौटने का अवसर मिलेगा। इस समझौते के अमल के साथ गाजा में बड़े पैमाने पर मानवीय सहायता पहुंचने की उम्मीद है और बड़ी संख्या में ट्रक राफा सीमा के नजदीक मिस्र में खड़े हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि शनिवार को मिस्र सरकार के दो मंत्री सहायता पहुंचाने तथा घायल मरीजों को निकालने की तैयारियों की देखरेख करने उत्तरी सिनाई प्रायद्वीप पहुंचे।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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