मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष के बीच ईरान में इंटरनेट सेवाएं लगभग पूरी तरह बंद हो गई हैं। इंटरनेट निगरानी संस्था नेटब्लॉक्स (NetBlocks) के अनुसार देश में इंटरनेट कनेक्टिविटी करीब 100 घंटे से ठप है और वर्तमान में यह सामान्य स्तर के केवल 1 प्रतिशत तक रह गई है।
नेटब्लॉक्स का कहना है कि यह इस साल ईरान में लगाया गया दूसरा बड़ा इंटरनेट ब्लैकआउट है। इससे पहले जनवरी में देशभर में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान भी सरकार ने इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी थीं।
संस्था के मुताबिक पिछले इंटरनेट शटडाउन के दौरान ईरान को लगभग 3.7 करोड़ डॉलर (करीब 300 करोड़ रुपये) का आर्थिक नुकसान हुआ था।
होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही घटी
इसी बीच वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी इस संघर्ष का असर दिखाई देने लगा है। शिपिंग ट्रैकर MarineTraffic.com के अनुसार होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल टैंकरों की आवाजाही करीब 90 प्रतिशत तक घट गई है। यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है, क्योंकि दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। सुरक्षा चिंताओं के कारण कई प्रमुख शिपिंग कंपनियों ने अपने जहाजों का रास्ता बदल दिया है।
इजराइल में लगातार सायरन
इस बीच इजराइल में भी तनाव बना हुआ है। उत्तरी इजराइल के कई इलाकों में ड्रोन और मिसाइल हमलों की चेतावनी देने वाले सायरन पिछले डेढ़ घंटे से लगातार बज रहे हैं। इजराइली सेना का कहना है कि कुछ हमले लेबनान की ओर से किए गए। बुधवार को तीसरी बार यरूशलम और तेल अवीव में भी सायरन बजने की खबर है। हालांकि ताजा हमलों में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं मिली है।
अमेरिका अपने नागरिकों को निकाल रहा
अमेरिकी सेना भी इस संकट के बीच अपने नागरिकों को मध्य-पूर्व से निकालने में मदद कर रही है। ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष डैन केन ने बताया कि बड़े सैन्य परिवहन विमान C-17 के जरिए लोगों को सुरक्षित बाहर ले जाने की व्यवस्था की जा रही है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय पहले ही अपने नागरिकों को एक दर्जन से अधिक देशों से निकलने की सलाह दे चुका है।
अमेरिका-इजराइल के बीच गहन सैन्य समन्वय
इजराइली सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक अमेरिका और इजराइल के बीच सैन्य समन्वय बहुत तेज हो गया है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के सैन्य कमांडरों के बीच हर दिन लगभग 4,000 से 5,000 कॉल समन्वय के लिए की जा रही हैं। अधिकारी ने यह भी कहा कि युद्ध की शुरुआती कार्रवाई की योजना करीब तीन सप्ताह पहले से बनाई जा रही थी।
ईरान में भारी तबाही का दावा
इजराइल के इंस्टीट्यूट फॉर नेशनल सिक्योरिटी स्टडीज के विश्लेषक स्टीफन कोहेन के अनुसार उपग्रह तस्वीरों और घोषित लक्ष्यों से संकेत मिलता है कि ईरान में सैन्य ढांचे को व्यवस्थित तरीके से निशाना बनाया जा रहा है।
उनका कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य ईरान की रक्षा संरचना को धीरे-धीरे खत्म करना और उसे जल्दी पुनर्निर्माण करने से रोकना है।हमलों में मिसाइल ठिकाने,रिवोल्यूशनरी गार्ड के ठिकाने,नौसैनिक अड्डे और एयर डिफेंस सिस्टम शामिल हैं। कोहेन के अनुसार कुछ क्षेत्रों में हुई तबाही की स्थिति गाजा में हुए हमलों जैसी दिखाई दे रही है।
