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ईरान ने इन 5 देशों को बताया 'आक्रामकता' को बढ़ावा देने के लिए जिम्मेदार, कहा- हमें नुकसान पहुंचाया, हर्जाना दो

Iran Compensation News: क्या ईरान लड़ाई से 12 साल पीछे चला गया? पुनर्निर्माण में 12 साल लगने का अनुमान है, ऐसे में तेहरान बुनियादी ढांचे के विनाश के लिए पड़ोसी देशों को आर्थिक रूप से जिम्मेदार ठहरा रहा है।

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ईरान ने इन 5 देशों को बताया 'आक्रामकता' को बढ़ावा देने के लिए जिम्मेदार, कहा- हमें नुकसान पहुंचाया, हर्जाना दो

Iran News: इस्लामाबाद में लंबी चली संघर्ष-विराम वार्ताओं के विफल होने के बाद, ईरानी सरकारी मीडिया ने सोमवार को बताया कि इस्लामिक गणराज्य ने अपने पांच पड़ोसी देशों से युद्ध से हुए नुकसान के लिए औपचारिक रूप से मुआवजें की मांग की है।

यह कदम तेहरान के कूटनीतिक अभियान में एक महत्वपूर्ण तेजी को दर्शाता है, क्योंकि वह अमेरिका और इजरायल के साथ हाल ही में हुए 40-दिवसीय संघर्ष के कारण अर्थव्यवस्था को हुए भारी नुकसान की भरपाई करना चाहता है।

सरकारी समाचार एजेंसी 'Irna' के अनुसार, ईरानी सरकार ने बहरीन, सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और जॉर्डन को उन देशों के रूप में चिह्नित किया है, जिन्होंने ईरानी क्षेत्र के खिलाफ 'आक्रामकता' को बढ़ावा देने में भूमिका निभाई है।

कानूनी आधार और दायित्व

यह मांग संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत, अमीर सईद इरावानी ने उठाई, जिन्होंने दावा किया कि इन देशों ने ऐसी लॉजिस्टिक और खुफिया सहायता प्रदान की, जिससे ईरानी बुनियादी ढांचे पर विदेशी हमले संभव हो पाए।

इरावानी ने कहा, 'इन देशों ने अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के प्रति अपने अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का उल्लंघन किया है।' 'अपने हवाई क्षेत्र और सैन्य सुविधाओं तक पहुंच देकर, वे हमारी संप्रभु संपत्तियों के विनाश में भागीदार बन गए हैं, और उन्हें पुनर्निर्माण का वित्तीय बोझ उठाना होगा।'

यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब ईरान के सेंट्रल बैंक ने एक गंभीर आकलन जारी करते हुए चेतावनी दी है कि देश की युद्ध-ग्रस्त अर्थव्यवस्था, जिसमें ठप पड़ी तेल रिफाइनरियां और क्षतिग्रस्त परिवहन केंद्र भी शामिल हैं। इनके पुनर्निर्माण में 12 साल से भी अधिक समय लग सकता है।

बातचीत नाकाम होने के बाद सख्त रुख

मुआवजे की यह मांग, इस हफ्ते के आखिर में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के पाकिस्तान से चले जाने के बाद सामने आई है। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकिर कालिबफ और अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के बीच हुई उच्च-स्तरीय बातचीत, परमाणु सुरक्षा और होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण के मुद्दों पर किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई।

ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति, मोहम्मद रजा आरिफ ने रविवार को एक बयान में क्षेत्रीय जवाबदेही की भावना को दोहराते हुए कहा, 'ईरान पर हुए हमलों से हुए नुकसान के लिए मुआवजा पाने का प्रयास हमारे लोगों का ऐसा अधिकार है जिस पर कोई समझौता नहीं हो सकता। जिन लोगों ने इस आग को भड़काया है, वे यह उम्मीद नहीं कर सकते कि वे इसके नतीजों से बचे रहेंगे।'

वहीं, खाड़ी के पड़ोसी देशों और जॉर्डन को निशाना बनाना तेहरान की रणनीति में आए एक बदलाव का संकेत देता है। यह बदलाव सीधे सैन्य टकराव से हटकर, कानूनी और कूटनीतिक माध्यमों से आर्थिक युद्ध की ओर हुआ है। हालांकि, जिन पांच देशों के नाम लिए गए हैं, उन्होंने अभी तक कोई औपचारिक सामूहिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की है, लेकिन क्षेत्रीय विश्लेषकों का मानना है कि इस मांग का मकसद अरब देशों की राजधानियों पर दबाव डालना है, ताकि वे अमेरिका द्वारा हाल ही में लागू की गई नौसैनिक नाकेबंदी से अपना समर्थन वापस ले लें।

जैसे-जैसे दो हफ्ते की नाज़ुक सीजफायर 22 अप्रैल की अपनी तय तारीख के करीब पहुंच रही है, मुआवजे की मांग इस संघर्ष में एक नया और विस्फोटक पहलू जोड़ रही है। यह एक ऐसा संघर्ष बन गया जिसने पहले ही वैश्विक तेल की कीमतों को $100 प्रति बैरल से ऊपर पहुंचा दिया है।

Nitin Arora
नितिन अरोड़ा author

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदे... और देखें

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