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बिना सुरक्षा परिषद सुधार के नहीं खत्म होगी असमानता, वीटो का ना हो राजनीतिक इस्तेमाल, UNSC में भारत की खरी-खरी

भारत के सैद्धांतिक रुख को रेखांकित करते हुए पर्वतनेनी हरीश ने कहा कि भारत की स्थिति 'कॉमन अफ़्रीकी पोजिशन' के साथ पूरी तरह से मेल खाती है। उन्होंने जोर देकर कहा, जब तक वीटो का अस्तित्व है, तब तक यह सुधारित परिषद के सभी स्थायी सदस्यों के पास होना चाहिए।

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UNSC में सुधार की मांग

India At UNSC: भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में व्यापक और समावेशी सुधारों की अपनी मांग को एक बार फिर प्रमुखता से दोहराया है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत पर्वतानेनी हरीश ने स्पष्ट कहा कि सुरक्षा परिषद में सुधार की शुरुआत बिना किसी देरी के स्पष्ट समय-सीमा और मील के पत्थरों के साथ 'टेक्स्ट-आधारित वार्ता' से होनी चाहिए।

"सिर्फ खुला वीटो ही नहीं, 'डी-फैक्टो वीटो' भी बड़ी समस्या"

राजदूत हरीश ने कहा कि केवल वीटो (Veto) के मुद्दे पर अलग से चर्चा करने से P5 (पांच स्थायी सदस्यों) की निर्णय लेने की मानसिकता में बदलाव नहीं आएगा। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा, वीटो सिर्फ वही नहीं है जो खुले तौर पर डाला जाता है। एक 'डी-फैक्टो' या व्यावहारिक वीटो भी है, जिसका इस्तेमाल सुरक्षा परिषद के सदस्य (चुने हुए और गैर-चुने हुए) करते हैं। उन्होंने आगे समझाया कि राष्ट्रपति के बयानों, प्रेस बयानों और प्रतिबंध समितियों के फैसलों में सर्वसम्मति के अलिखित नियम का फायदा उठाकर कोई भी एक सदस्य बिना कोई कारण बताए किसी भी प्रस्ताव को रोक देता है।

"नए सदस्यों के साथ भेदभाव मंजूर नहीं"

भारत के सैद्धांतिक रुख को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत की स्थिति 'कॉमन अफ़्रीकी पोजिशन' के साथ पूरी तरह से मेल खाती है। उन्होंने जोर देकर कहा, जब तक वीटो का अस्तित्व है, तब तक यह सुधारित परिषद के सभी स्थायी सदस्यों के पास होना चाहिए। निष्पक्षता और न्याय की मांग है कि सभी स्थायी सदस्यों को समान अधिकार और जिम्मेदारियां मिलें। उन्होंने चेतावनी दी कि बिना वीटो के या अलग शर्तों के साथ नई श्रेणी के स्थायी सदस्य बनाना पहले से ही कठिन चर्चा को और जटिल बनाएगा और उसी असमानता को बढ़ावा देगा जिसे हम ठीक करने की कोशिश कर रहे हैं।

"संयम से हो वीटो का इस्तेमाल, 35 सालों का रिकॉर्ड उजागर"

वीटो के इतिहास पर बात करते हुए भारतीय राजदूत ने कहा कि वीटो केवल पांच स्थायी सदस्यों का विशेषाधिकार है, लेकिन यह एक ऐसी जिम्मेदारी है जिसका इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए अत्यधिक संयम के साथ किया जाना चाहिए। इसका उपयोग संकीर्ण राजनीतिक लाभ के लिए नहीं होना चाहिए। उन्होंने आंकड़े साझा करते हुए बताया कि संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में अब तक लगभग 200 प्रस्तावों पर 331 बार वीटो का इस्तेमाल किया जा चुका है। उन्होंने P5 के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि पांच में से दो स्थायी सदस्यों ने पिछले साढ़े तीन दशकों से एक बार भी वीटो का उपयोग नहीं किया है, जबकि अधिकांश वीटो या वीटो की धमकियां केवल तीन देशों की ओर से ही आई हैं।

  • समय-सीमा तय करके तुरंत पाठ-आधारित (Text-based) वार्ता शुरू की जाए।
  • अगर वीटो खत्म नहीं होता, तो सभी नए और पुराने स्थायी सदस्यों को समान वीटो अधिकार मिलना चाहिए।
  • अनौपचारिक (De-facto) वीटो और बिना जवाबदेही प्रस्ताव रोकने की प्रथा बंद होनी चाहिए।
  • 331 बार वीटो का प्रयोग हुआ है, जिसमें से अधिकांश केवल 3 देशों द्वारा राजनीतिक कारणों से किया गया।
Amit Mandal
अमित कुमार मंडलauthor

अमित मंडल टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में न्यूज डेस्क पर Assistant Editor के रूप में काम कर रहे हैं। प्रिंट, टीवी और डिजिटल—तीनों माध्यमों में कुल मिलाकर 15 सालों से अधिक का अनुभव उन्हें खबरों को देखने की व्यापक दृष्टि देता है। ब्रेकिंग न्यूज, लाइव ब्लॉग, स्पेशल स्टोरीज और एक्सप्लेनेर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। एंगल चुनने की कला, खबरों की गति को समझना और समय पर सही जानकारी पहुंचाना—ये उनकी सबसे बड़ी खूबियां हैं। अमित अपने करियर में करीब 20 हजार से अधिक न्यूज आर्टिकल, एनालिसिस और एक्सप्लेनर पब्लिश कर चुके हैं।

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