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पाकिस्तान में ही है मसूद अजहर! एक बार फिर सामने आया PAK का झूठ, भारत ने की कार्रवाई की मांग

Masood Azhar in Pakistan: 2022 में पाकिस्तान के तत्कालीन विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ने कथित तौर पर कहा था कि अजहर अफगानिस्तान भाग गया है। अब खबर आई है कि अजहर पाकिस्तान में ही है और उसने हाल ही में बहावलपुर में एक जनसभा को संबोधित किया। भारत ने कहा है कि मसूद अजहर को लेकर पाकिस्तान का झूठ फिर उजागर हो गया है।

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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल

Masood Azhar in Pakistan: आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के चीफ मसूद अजहर को लेकर एक बार फिर पाकिस्तान का झूठ दुनिया के सामने आ गया है। एक तरफ पाकिस्तान मसूद अजहर के पाकिस्तान में न होने का दावा करता है। अब खबर आई है कि जैश-ए-मोहम्मद चीफ अहजर ने बहावलपुर में जनसभा को संबोधित किया। इसके बाद भारत ने मसूद अजहर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि यदि खबर सही है, तो इससे आतंकवादी गतिविधियों को रोकने के मामले में पाकिस्तान का दोहरा रवैया उजागर हो गया है। बता दें, 2019 के पुलवामा आतंकवादी हमले के मास्टरमाइंड माने जाने वाले अजहर को उसी वर्ष संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने वैश्विक आतंकवादी घोषित किया था।

पाकिस्तान का दोहरा रवैया उजागर

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, हम मांग करते हैं कि मसूद अजहर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करके उसे न्याय के कटघरे में लाया जाए। पिछले महीने बहावलपुर में अजहर के एक जनसभा को संबोधित करने से जुड़ी खबरों के बारे में पूछे जाने पर जायसवाल ने यह टिप्पणी की। जायसवाल ने पाकिस्तान के इस दावे पर भी सवाल उठाया कि अजहर पाकिस्तान में नहीं है। उन्होंने कहा, अजहर के पाकिस्तान में होने की बात से इनकार किया जा रहा था। अगर खबर सही है तो इससे पाकिस्तान का दोहरा रवैया उजागर होता है।

सीमापार आतंकी गतिविधियों में शामिल है अजहर

जायसवाल ने कहा, मसूद अजहर भारत के खिलाफ सीमा पार से आतंकवादी हमलों में शामिल है और हम चाहते हैं कि उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

वर्ष 2022 में पाकिस्तान के तत्कालीन विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ने कथित तौर पर कहा था कि अजहर अफगानिस्तान भाग गया है। भारत ने 1999 में अपहृत इंडियन एयरलाइंस की उड़ान 814 (आईसी814) के बंधकों को रिहा करने के बदले अजहर को रिहा किया था।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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