UN peacekeeping missions: भारत ने संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों को 'बेहतर संसाधन-संपन्न, बेहतर सुरक्षित और अधिक प्रतिनिधिक' बनाने की मांग की है। शांति अभियानों की संपूर्ण समीक्षा पर आयोजित वार्षिक बहस को संबोधित करते हुए भारत के सैन्य सलाहकार कर्नल तरुणेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि शांति स्थापना संयुक्त राष्ट्र के जनादेश का अनिवार्य हिस्सा है। भारत के स्थायी मिशन ने इस बयान को सोशल मीडिया मंच X पर साझा किया। सिंह ने गुटनिरपेक्ष आंदोलन की ओर से मोरक्को द्वारा दिए गए वक्तव्य के साथ भारत की सहमति भी जताई।
सर्वोच्च बलिदान को श्रद्धांजलि
सिंह ने इस वर्ष जान गंवाने वाले शांति सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि भारत अब तक 50 मिशनों में 3 लाख से अधिक सैनिक तैनात कर चुका है और इस नाते सबसे बड़ा सैन्य योगदानकर्ता है। उन्होंने बताया कि संयुक्त राष्ट्र ध्वज तले कर्तव्य निभाते हुए 184 भारतीय शांति सैनिकों ने सर्वोच्च बलिदान दिया है।
सात दशकों की प्रतिबद्धता
सिंह के अनुसार भारत की प्रतिबद्धता सात दशकों के परिचालन अनुभव पर आधारित है। उन्होंने कहा कि निष्पक्षता, सहमति और केवल आत्मरक्षा व जनादेश की रक्षा में बल प्रयोग जैसे सिद्धांतों के कारण शांति अभियान अपरिहार्य बने हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अभियान तभी सफल होते हैं जब उनके साथ व्यापक राजनीतिक प्रक्रिया, स्पष्ट राजनीतिक लक्ष्य और तैनात कर्मियों के लिए पर्याप्त संसाधन हों। साथ ही उन्होंने चेताया कि कम संसाधनों में शांति सैनिकों से अधिक अपेक्षा नहीं की जानी चाहिए।
परामर्श, जवाबदेही और तकनीक
भारत ने मांग की कि जनादेश पारित या पुनर्विचार से पहले सैन्य और पुलिस योगदानकर्ता देशों के साथ संस्थागत परामर्श हो। शांति सैनिकों पर हमलों के दोषियों को जवाबदेह ठहराने पर जोर देते हुए सिंह ने इस विषय पर सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2589 में भारत के नेतृत्व का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि स्पष्ट परिचालन औचित्य के बिना चल रहे अभियान संसाधनों को खपाते हैं और शांति स्थापना की विश्वसनीयता को कमजोर करते हैं। उन्होंने मिशनों में तकनीक और नवीकरणीय ऊर्जा के तेज एकीकरण की वकालत की और UNITE AWARE पहल के लिए भारत के समर्थन को रेखांकित किया।
महिला शांति सैनिक
सिंह ने बताया कि भारत 1960 से महिला शांति सैनिक तैनात कर रहा है और 2007 में लाइबेरिया में पहली बार पूर्णतः महिला फॉर्म्ड पुलिस यूनिट भेजी थी। वर्तमान में विभिन्न मिशनों में 160 भारतीय महिला शांति सैनिक तैनात हैं।
सुरक्षा परिषद की दावेदारी
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि शांति स्थापना 2028-29 कार्यकाल के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की उम्मीदवारी की प्राथमिकता है। उन्होंने दोहराया कि शांति अभियानों पर चर्चा के लिए विशेष समिति C-34 ही उपयुक्त मंच है।
