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ईरान पर हमला करने वाले हैं ट्रंप! 2000 की मौत के बाद खामेनेई को दी धमकी; प्रदर्शनकारियों से बोले- मदद रास्ते में है

तेहरान के हालात बेहद नाजुक हैं। लोग सड़क पर हैं, हिंसा में 2000 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है, इंटरनेट सेवाएं अभी भी ठप हैं। लोगों का गुस्सा ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई और शासन व्यवस्था के खिलाफ उग्र रूप ले चुका है। वहीं, ईरान ने अमेरिका और इजरायल पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

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ईरान में क्यों भड़का विद्रोह?

ईरान में हिंसक विरोध प्रदर्शन जारी हैं। वहां अब तक 2000 से भी ज्यादा लोगों की मौत हो गई है। इस बीच, कहा जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जल्द ही ईरान पर हमले के मूड में है। इस बारे में उन्होंने अपनी ताजा पोस्ट में इसके संकेत भी साफ साफ दे दिए हैं। उन्होंने ट्रुथ सोशल पर अपनी ताजा पोस्ट में प्रदर्शनकारियों को मदद का भरोसा दिया है। साथ ही कहा कि वे चिंता न करें, अपना प्रदर्शन जारी रखें और आगे बढ़कर संस्थाओं पर कब्जा करें। मदद आ रही है। इस बीच, कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि राष्ट्रपति ट्रंप को ईरान पर हमले के नए विकल्पों के बारे में जानकारी दी गई है। इससे पहले, आज ही अमेरिका ने ईरान पर दबाव बनाने की अपनी रणनीति के तहत आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे। ट्रंप ने कहा था कि जो देश ईरान के साथ कारोबार करेंगे, उन पर अमेरिका के साथ व्यापार करने पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा।

ट्रंप ने ताजा पोस्ट में क्या कहा?

ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में ईरानी प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि ईरानी देशभक्तों अपना विरोध जारी रखें। अपनी संस्थाओं पर कब्जा करें। ट्रंप ने यह भी कहा कि प्रदर्शनकारियों की हत्या करने और उनपर अत्याचार करने वालों को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। वे सबके नाम लिखकर रख लें। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों की निरर्थक हत्याओं के रुकने तक मैंने ईरानी अधिकारियों संग सारी बैठकें रद्द कर दी हैं। मदद आ रही है।

रेजा पहलवी ने की ट्रंप से कार्रवाई की अपील

वहीं दूसरी ओर, ईरान के निर्वासित राजकुमार रेजा पहलवी ने भी ट्रंप से ईरान में खामेनेई शासन के विरोध में कार्रवाई करने की अपील की है। उन्होंने एक अमेरिकी चैनल से बात करते हुए कहा कि खामेनेई पहले ही रेड लाइन को क्रास कर चुके हैं। ऐसे में अगर जल्द कोई कार्रवाई नहीं की गई तो हालात और बदकर हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि ये विरोध प्रदर्शन महज एक आर्थिक मुद्दा नहीं है, बल्कि ईरान में यह खामेनेई की सत्ता को खत्म करने की मांग है। अपील करते हुए रेजा पहलवी ने कहा कि ऐसे हालात में दुनिया को इस बेरोकटोक दमन के खिलाफ आगे आना चाहिए।

व्हाइट हाउस ने कही थी ये बात

इससे पहले दिन में, व्हाइट हाउस ने कहा कि अमेरिका एक तरफ ईरान से बातचीत के रास्ते खुले रखना चाहता है, तो दूसरी तरफ जरूरत पड़ने पर सैन्य विकल्प भी तैयार रखेगा। ईरान के भीतर जारी विरोध प्रदर्शन और पर्दे के पीछे चल रही बातचीत से तेहरान के रुख में कुछ बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने कहा कि राष्ट्रपति की प्राथमिकता हिंसा को रोकना है और साथ ही ईरान के अधिकारियों की ओर से आ रहे निजी संदेशों का आकलन करना है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति नहीं चाहते कि तेहरान की सड़कों पर लोगों की जान जाए, लेकिन दुर्भाग्य से फिलहाल ऐसा होते हुए देखा जा रहा है।

जब उनसे पूछा गया कि क्या अमेरिका अब भी ईरान के पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण की मांग कर रहा है, तो उन्होंने कोई स्पष्ट शर्त नहीं बताई। लेकिन उन्होंने यह जरूर कहा कि राष्ट्रपति जरूरत पड़ने पर कड़े कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगे। इसके साथ ही उन्होंने यह भी दोहराया कि अमेरिका की पहली पसंद हमेशा कूटनीति ही है। उनका कहना था कि ईरान सरकार जो बातें सार्वजनिक रूप से कह रही है, वे उन निजी संदेशों से अलग हैं जो अमेरिका को मिल रहे हैं, और राष्ट्रपति उन संदेशों पर गौर करना चाहते हैं।

लेविट ने कहा कि विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ईरान कूटनीति में केंद्रीय भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा, "मैं समझती हूं कि स्टीव विटकॉफ ईरान के साथ डिप्लोमेसी में एक बहुत ही महत्वपूर्ण बने रहेंगे।" उन्होंने यह भी कहा कि ईरान अच्छी तरह जानता है कि राष्ट्रपति ट्रंप पहले भी जरूरत पड़ने पर सख्त फैसले ले चुके हैं और आगे भी ऐसा कर सकते हैं। यह सभी बयान ऐसे समय में आए हैं, जब ईरान में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं और अमेरिका की ईरान नीति पर एक बार फिर गहन नजर डाली जा रही है।

2000 लोग मारे गए, इंटरनेट पर अभी भी बैन

एक अज्ञात ईरानी अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि चल रहे विरोध प्रदर्शनों के दौरान लगभग 2,000 लोग मारे गए हैं, और इन मौतों के लिए 'आतंकवादियों' को ज़िम्मेदार ठहराया है। सरकार ने देश भर में मरने वालों का कोई आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया है। एसोसिएटेड प्रेस ने बताया कि ईरान ने मंगलवार को कुछ पाबंदियों में ढील दी, जिससे लोग कई दिनों में पहली बार मोबाइल फोन से विदेश में फोन कॉल कर पाए। हालांकि, इंटरनेट सेवाएं और टेक्स्ट मैसेजिंग अभी भी बंद हैं।

कैसे शुरू हुआ था विरोध

ईरान में हालिया प्रदर्शन 28 दिसंबर 2025 को शुरू हुआ था, जब तेज महंगाई, खाद्य और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों में उछाल और रियाल के रिकॉर्ड स्तर तक गिरने से जनता का धैर्य टूट गया। शुरुआती प्रदर्शन बाजारों और व्यावसायिक इलाकों में व्यापारियों ने किया था। उन्होंने अपनी दुकानों के शटर गिरा दिए। जनता इस आंदोलन में तब जुड़ी जब बाजार से खाने का तेल, चिकन जैसी चीजें या तो गायब हो गईं या फिर उनकी कीमते बेहहाशा बढ़ गईं। वहीं, फिर खामेनेई सरकार द्वारा सस्ती डॉलर व्यवस्था को बंद कर देने के फैसले ने इस आग को और भड़का दिया।

Shiv Shukla
शिव शुक्लाauthor

शिव शुक्ला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में कार्यरत एक अनुभवी न्यूज राइटर हैं। छह वर्षों के पेशेवर अनुभव के साथ वे डिजिटल पत्रकारिता में तेज, सटीक और प्रभावी कंटेंट तैयार करने के लिए पहचाने जाते हैं। वह राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों, राजनीतिक घटनाक्रमों और गहन विश्लेषण पर विशेष पकड़ रखते हैं। ब्रेकिंग न्यूज कवरेज, लाइव ब्लॉग, एक्सप्लेनर और एनालिसिस आर्टिकल तैयार करने में उन्हें विशेषज्ञता हासिल है। शिव शुक्ला 8,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट प्रकाशित कर चुके हैं। मजबूत न्यूज सेंस, विश्लेषण क्षमता और स्पष्ट लेखन शैली उनकी खासियत है। उन्हें नए स्थानों की यात्रा करना और किताबें पढ़ने का शौक है, जो उनकी लेखन शैली एवं दृष्टिकोण को और समृद्ध बनाता है।

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