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MP : 'देरी से मिला न्याय भी अन्याय', CM मोहन यादव ने बताया भारतीय न्याय परंपरा का महत्व; केस पेंडेंसी घटाने पर दिया जोर

मध्य प्रदेश के इंदौर में आयोजित 'इंहेंसिंग एक्सेस टू जस्टिस' विषय पर वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि देश की न्याय प्रणाली को अधिक सुलभ, पारदर्शी और जनहितैषी बनाने की जरूरत है। कहा- 'देर से मिला न्याय अन्याय' के समान है, लिहाजा छोटे मामलों का समाधान कर केस पेंडेंसी कम करने की दिशा में काम करना होगा।

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इंदौर में 'इंहेंसिंग एक्सेस टू जस्टिस' कार्यक्रम में सीएम मोहन यादव और सीजेआई सूर्यकांत

इंदौर : मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने न्याय व्यवस्था में भारतीय न्याय परंपरा और आधुनिक न्यायिक व्यवस्था के समन्वय पर जोर दिया। ‘Enhancing Access to Justice’ विषय पर आयोजित वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि मध्यस्थता के जरिए छोटे मामलों का समाधान कर केस पेंडेंसी कम करने की दिशा में प्रभावी काम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि न्याय, स्वतंत्रता और बंधुत्व लोकतंत्र के आधार हैं और राज्य सरकार सभी के लिए न्याय सुनिश्चित करने को प्रतिबद्ध है।

भारतीय न्याय परंपरा पर क्या बोले मुख्यमंत्री मोहन यादव

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) भारतीय न्याय परंपरा को समृद्ध करने की दिशा में सराहनीय कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में बदलाव का स्वर्णिम काल चल रहा है। हमने अंग्रेजों के दौर के अनेक गैर-जरूरी कानूनों को समाप्त कर न्याय को आम आदमी के लिए सुलभ और सरल बनाया है।

मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि हाल ही में प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) से संबंधित विधेयक विधानसभा में पारित किया गया है। साथ ही, युवाओं के हितों की रक्षा के लिए पेपर लीक और धोखाधड़ी के मामलों में त्वरित कार्रवाई हेतु इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर में फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया गया है। उन्होंने सम्राट विक्रमादित्य और लोकमाता अहिल्याबाई होलकर के न्याय के ऐतिहासिक उदाहरणों को याद करते हुए कहा कि हमारे लिए "देरी से मिला न्याय भी अन्याय के समान है।"

सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने कही बड़ी बात

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि "सशक्त भविष्य, गरिमा और समावेशन" केवल शब्द नहीं हैं, बल्कि यह विधिक सहायता की वास्तविक परिभाषा है। उन्होंने संवाद की महता पर जोर देते हुए कहा कि न्याय की पहुंच केवल कानून के आधार पर नहीं, बल्कि आपसी संवाद से संभव है। सीजेआई ने कहा कि गरीब, आर्थिक रूप से पिछड़े और महिलाओं की सहायता करना कोई चैरिटी नहीं है, बल्कि यह हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है।

सम्मेलन के दौरान कई महत्वपूर्ण पहलों की शुरुआत की गई। इस अवसर पर 'Ensuring Access Protecting Rights Building Futures' पुस्तक, निवारक एवं रणनीतिक विधिक सेवा योजनाएं, ब्रेल लिपि में मार्गदर्शिका और 'न्याय के स्वर' का विमोचन किया गया। इसके अलावा, सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने नालसा शिक्षा स्कीम और नालसा के थीम सॉन्ग को इंडियन साइन लैंग्वेज में लॉन्च किया। कार्यक्रम में मध्यस्थता पर आधारित सर्टिफिकेट कोर्स 'विवाद से सहमति' और 'जस्टिस टू चिल्ड्रन लिटिगेशन फेलोशिप प्रोग्राम' का भी शुभारंभ किया गया।

इस गरिमामयी अवसर पर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा, जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस मनमोहन, जस्टिस विजय बिश्नोई, जस्टिस आलोक अराधे, जस्टिस शील नागु, जस्टिस संजीव सचदेवा, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश विवेक अग्रवाल, आनंद पाठक सहित देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश, न्यायिक अधिकारी और महापौर पुष्यमित्र भार्गव उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश आनंद पाठक ने सभी का आभार व्यक्त किया।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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