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PM Modi के US दौरे के बीच ऐतिहासिक करार, HAL के साथ मिलकर जेट इंजन बनाएगी GE Aerospace

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jun 22, 2023, 04:15 PM IST

GE Aerospace signs MoU with HAL: जीई एयरोस्पेस की ओर से साझा किए गए बयान के मुताबिक, भारतीय वायु सेना के लिए लड़ाकू जेट इंजन बनाने के लिए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।

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GE एयरोस्पेस और HAL के बीच करार

Photo : BCCL

GE Aerospace signs MoU with HAL: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा, भारत और यूनाइटेड स्टेट ऑफ अमेरिका के बीच गहरी होती दोस्ती का नया चैप्टर शुरू कर रही है। रक्षा हथियारों को लेकर रूस पर निर्भरता से अलग अब भारत ने अपने कदम अमेरिका की तरफ बढ़ाए हैं। पीएम मोदी अमेरिका के दौरे पर हैं और इस दौरान अमेरिका की GE Aerospace और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के बीच ऐतिहासिक करार हुआ है।

जीई एयरोस्पेस की ओर से साझा किए गए बयान के मुताबिक, भारतीय वायु सेना के लिए लड़ाकू जेट इंजन बनाने के लिए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह करार भारतीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की संयुक्त राज्य अमेरिका की आधिकारिक यात्रा के बीच एक बड़ा मील का पत्थर है। दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करने में एक प्रमुख कदम है। GE एयरोस्पेस ने आगे कहा, इस समझौते के तहत भारत में GE एयरोस्पेस के F414 इंजनों का संभावित संयुक्त उत्पादन शामिल है, और GE एयरोस्पेस इसके लिए आवश्यक निर्यात प्राधिकरण प्राप्त करने के लिए अमेरिकी सरकार के साथ काम करना जारी रखेगा। यह प्रयास भारतीय वायु सेना के हल्के लड़ाकू विमान एमके2 कार्यक्रम का हिस्सा है।

क्या है GE के F414 इंजन की खासियत

जीई एयरोस्पेस के 414 इंजन में टर्बोफैन इंजन का इस्तेमाल सैन्य विमानों में किया जाता है। अमेरिकी नौसेना करीब 30 सालों से इसका इस्तेमाल करती आ रही है। इस इंजन में फुल अथॉरिटी डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल तकनीक है, जिसे पूरी तरह डिजिटली कंट्रोल किया जा सकता है। मौजूदा वक्त में सिर्फ आठ देश इस तरह के इंजनों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

इस सौदे के क्या हैं मायने

अमेरिका के अलावा रूस, ब्रिटेन, फ्रांस जैसे कुछ ही देश लड़ाकू विमानों में इस तरह के इंजन का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस करार के बाद भारतीय वायु सेना के बीच विश्वसनीय और लंबे समय तक चलने वाले जेट इंजन होंगे। दरअसल, इन इजनों को कई हजार घंटे तक ओवरहाल किया जा सकता है, लेकिन भारत के पास अभी जो रूसी जेट इंजन हैं, उन्हें कुछ सौ घंओं के बाद ओवरहाल कराने की जरूरत पड़ती है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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