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VIDEO: हाथों में पानी के खाली डिब्बे, आंखों में दर्द का समंदर… दिल झकझोर देगा गाजा की इस मासूम बच्ची का वीडियो

Israel Hamas War: गाजा के लोग पानी, खाना और अन्य मूलभूत सुविधाओं की भयंकर कमी से जूझ रहे हैं। अगर सिर्फ बात करें गाजा की तो वहां लगभग 70 फीसदी इमारत पूरी तरह से बर्बाद हो चुके हैं। इसी कड़ी में सोशल मीडिया पर एक वीडियो काफी वायरल हो रहा है। गाजा से आ रही यह तस्वीर किसी का भी दिल दहलाने के लिए काफी है।

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गाजा में एक बच्ची का वायरल वीडियो। Times of Gaza X handle

Photo : Twitter

Israel Hamas War: इजरायल-हमास जंग का सबसे बुरा असर अगर किसी पर पड़ा है तो वो हैं, गाजा में रहने वाले लोग। पिछले साल इस जंग पर विराम तो लग गया था, लेकिन आज के समय भी गाजा के लोग इस अशांति से उभर नहीं सके हैं। गाजा के लोग पानी, खाना और अन्य मूलभूत सुविधाओं की भयंकर कमी से जूझ रहे हैं। अगर सिर्फ बात करें गाजा की तो वहां लगभग 70 फीसदी इमारत पूरी तरह से बर्बाद हो चुके हैं।

इसी कड़ी में सोशल मीडिया पर एक वीडियो काफी वायरल हो रहा है। गाजा से आ रही यह तस्वीर किसी का भी दिल दहलाने के लिए काफी है। एक छोटी सी बच्ची, जिसके हाथों में खाली गैलन हैं, मलबे और टेंटों के बीच से गुजर रही है। उसकी आंखों में वो चमक नहीं, बल्कि एक ऐसा भारीपन है जैसे वक्त ने उसे उसकी उम्र से कहीं ज्यादा बड़ा कर दिया हो।

अंधकार में एक पूरी पीढ़ी का भविष्य

बता दें कि गाजा में 90% से अधिक जल स्रोत दूषित हो चुके हैं। बच्चे घंटों लाइनों में लगकर कुछ लीटर पानी जुटा पाते हैं। जहां कभी खेल के मैदान थे, आज वहां कंक्रीट का ढेर और अस्थायी टेंट लगे हैं। गाजा में स्कूल या तो मलबे में तब्दील हो चुके हैं या शरणार्थी शिविर बन चुके हैं, जिससे एक पूरी पीढ़ी का भविष्य अंधकार में है।

युद्ध में कितने लोगों ने गंवाई जान?

गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार अब तक हमले में 42 हजार से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। इनमें से 16,765 बच्चे हैं। वहीं लगभग 98 हजार लोग घायल हुए हैं। 10 हजार से ज्यादा लोग लापता हैं। दूसरी तरफ युद्ध में अबतक इजरायल के लगभग 1,139 लोग मारे गए हैं और 8,730 घायल हुए है। इसके अलावा 125 जर्नलिस्ट भी हमले में मारे जा चुके हैं।

मलबे में तब्दील हुए लाखों इमारत

आंकड़ों के अनुसार, गाजा की 80 फीसदी व्यावसायिक सुविधाएं और 87 फीसदी स्कूल इमारतें पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी हैं, जिसने शिक्षा और व्यापार के भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिया है। पूरे क्षेत्र में लगभग 1,44,000 से 1,75,000 इमारतें या तो क्षतिग्रस्त हुई हैं या मलबे में तब्दील हो गई हैं, जिसके कारण 20 लाख से अधिक लोग बेघर होकर दर-दर भटकने को मजबूर हैं।

स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति भी अत्यंत नाजुक है; गाजा के कुल 36 अस्पतालों में से अब महज 17 ही किसी तरह काम कर पा रहे हैं। इसके अलावा, 68 फीसदी सड़क नेटवर्क तबाह होने से राहत कार्यों में भारी बाधा आ रही है।

न रोजगार, न कमाई का कोई साधन

आर्थिक मोर्चे पर तबाही और भी गहरी है, जहां गजा की जीडीपी (GDP) में 81 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई है। इस युद्ध ने रोजगार के अवसरों को पूरी तरह खत्म कर दिया है, जिससे 2.01 लाख लोग बेरोजगार हो गए हैं, जिनमें वे 85 हजार फलस्तीनी मजदूर भी शामिल हैं जिनकी इजरायल में नौकरियां छूट चुकी हैं।

केवल उद्योग ही नहीं, बल्कि प्रकृति और संसाधनों पर भी गहरा प्रहार हुआ है; गजा की 68 फीसदी खेती योग्य जमीन अब बंजर हो चुकी है, जिससे आने वाले समय में भुखमरी का संकट और भी भयावह होने की आशंका है। कुल मिलाकर, गजा का सामाजिक और आर्थिक ढांचा अब पूरी तरह पतन की ओर है।

Piyush Kumar
पीयूष कुमारauthor

पीयूष कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर Senior Copy Editor के रूप में कार्यरत हैं। देश-दुनिया की हलचल पर उनकी पैनी नजर रहती है और इन घटनाओं को सटीक, सरल और असरदार अंदाज में खबरों की भाषा देना उनकी सबसे बड़ी ताकत है। ब्रेकिंग न्यूज की रफ्तार हो या किसी जटिल मुद्दे को आसान बनाकर समझाने वाले एक्सप्लेनर—पीयूष दोनों में बराबर दक्षता रखते हैं। न्यूज जजमेंट, फैक्ट-बेस्ड राइटिंग और एंड-टू-एंड कॉपी प्रोडक्शन पर इनकी पकड़ मजबूत है और अबतक 4,000 से अधिक स्टोरी लिख चुके हैं।

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