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गाजा में इजरायली हमले में एक ही परिवार के आठ सदस्यों की मौत, लेबनान में एक सदी पुराना बाजार ध्वस्त

World News: इजरायल ने अपने दुश्मनों के खिलाफ हमले का सिलसिला जारी रखा है। इस बीच ये जानकारी सामने आई है कि गाजा में इजरायली हमले में एक ही परिवार के आठ सदस्यों की मौत हो गई है। वहीं लेबनान में एक सदी पुराना बाजार ध्वस्त हो गया। इजरायल के हवाई हमलों में तबाह हुए बाजार में एक शख्स की मौत हो गई।

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आतंकवादी ठिकानों को निशाना बना रहा है इजरायल।

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

Israel Lebanon War: मध्य गाजा पट्टी में इजरायल के हमले में एक ही परिवार के आठ सदस्यों की मौत हो गयी। फलस्तीन के चिकित्सा अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी। दीर अल-बला स्थित अल-अक्सा शहीद अस्पताल के अनुसार, गाजा में शनिवार देर रात को नुसरत शरणार्थी शिविर में एक मकान पर हमला किया गया जिसमें माता-पिता और आठ से 23 साल की उम्र के उनके छह बच्चों की मौत हो गयी। शवों को इसी अस्पताल में लाया गया था।

आतंकवादी ठिकानों को निशाना बना रहा है इजरायल

उसने बताया कि हमले में सात लोग घायल भी हुए हैं जिनमें दो महिलाओं और एक बच्चे की हालत गंभीर है। ‘एसोसिएटेड प्रेस’ के एक संवाददाता ने शवों की गिनती की है। हमास के साथ युद्ध को एक साल से अधिक समय होने पर भी इजरायल के हमले जारी है और वह गाजा में लगभग हर दिन आतंकवादी ठिकानों को निशाना बना रहा है। हाल के महीनों में उसने विस्थापित लोगों द्वारा पनाह के रूप में इस्तेमाल किए जा रहे स्कूलों को भी निशाना बनाया है। वह आतंकवादियों पर इन विस्थापित लोगों के बीच छिपने का आरोप लगाता है।

उत्तरी गाजा को पूरी तरह खाली करने का दिया है आदेश

इजरायल ने उत्तरी गाजा को पूरी तरह से खाली करने का दबाव बनाया है। उत्तरी गाजा में इजरायल के हवाई और जमीनी बल जबालिया पर हमले कर रहे हैं, जहां उसके अनुसार आतंकवादी पुन: संगठित हो गए हैं। इजरायल ने गाजा सिटी समेत उत्तरी गाजा को पूरी तरह खाली करने का आदेश दिया है। सेना ने शनिवार को पुष्टि की कि अस्पतालों को भी खाली करने का आदेश दिया गया है, लेकिन उसने इसके लिए कोई समयसीमा तय नहीं की है।

इस बीच, इजरायल के हवाई हमलों में लेबनान में तुर्क काल का एक बाजार तबाह हो गया है। इजरायली हवाई हमलों ने रात भर दक्षिण नेबातियेह शहर में तुर्क काल का एक बाजार ध्वस्त कर दिया जिसमें एक से कम एक व्यक्ति की मौत हो गयी और चार अन्य घायल हो गए।

लेबनान के सिविल डिफेंस ने कहा कि उसे 1910 के बाजार में 12 रिहायशी इमारतों और 40 दुकानों पर लगी आग पर काबू पा लिया गया है। एक अलग घटना में लेबनानी रेड क्रॉस ने बताया कि अर्द्ध चिकित्सक दक्षिणी लेबनान में रविवार को इजरायली हवाई हमले में ध्वस्त एक मकान के मलबे में दबे लोगों की तलाश कर रहे हैं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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