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गाजा में थम जाएगी जंग? मिस्र के राष्ट्रपति ने दिया ऑफर, क्या मानेंगे इजराइल और हमास

Israel Hamas War: यह पहली बार है जब मिस्र के राष्ट्रपति ने सार्वजनिक रूप से हमास और इजराइल के बीच युद्ध विराम का प्रस्ताव रखा है। माना जा रहा है कि मिस्र के राष्ट्रपति की ओर से इस तरह का प्रस्ताव, पिछले एक साल से चली आ रही जंग को पूर्ण युद्धविराम की तरफ ले जाना है।

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मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल-फतेह अल सीसी ने गाजा में दो दिवसीय युद्ध विराम का प्रस्ताव रखा।

Photo : AP

Israel Hamas War: इजराइल और हमास के बीच गाजा में पिछले एक साल से छिड़ी जंग थम सकती है। मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल-फतेह अल सीसी ने इस जंग को रोकने के लिए ऑफर दिया है। मिस्र के राष्ट्रपति ने कहा है कि उनके देश ने इजराइल और हमास के बीच दो दिन के संघर्षविराम का प्रस्ताव रखा है और इस दौरान गाजा में बंधक बनाए गए चार लोगों को रिहा कर दिया जाएगा।

राष्ट्रपति अब्देल-फतेह अल सीसी ने काहिरा में कहा कि प्रस्ताव में कुछ फलस्तीनी कैदियों की रिहाई और गाजा पट्टी में मानवीय सहायता पहुंचाना भी शामिल है। यह पहली बार है जब मिस्र के राष्ट्रपति ने सार्वजनिक रूप से ऐसी योजना प्रस्तावित की है। माना जा रहा है कि मिस्र के राष्ट्रपति की ओर से इस तरह का प्रस्ताव, पिछले एक साल से चली आ रही जंग को पूर्ण युद्धविराम की तरफ ले जाना है।

हमास और इजराइल ने नहीं दी प्रतिकिया

कतर और अमेरिका के साथ मिस्र एक प्रमुख मध्यस्थ रहा है। हालांकि, मिस्र के राष्ट्रपति की ओर से आए इस प्रस्ताव पर इजराइल या हमास की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। अल-सिसी ने कहा कि प्रस्ताव का उद्देश्य स्थिति को बेहतर करने का मार्ग प्रशस्त करना है। उन्होंने कहा कि एक बार दो दिवसीय संघर्षविराम लागू हो जाने के बाद इसे स्थायी बनाने के लिए बातचीत जारी रहेगी।

नेतन्याहू का विरोध

उधर, दक्षिणी इजराइल पर हमास के हमले के पीड़ितों की याद में रविवार को आयोजित एक कार्यक्रम में इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के संबोधन को प्रदर्शनकारियों ने बाधित किया। प्रदर्शनकारियों ने शर्म करो के नारे लगाए और हंगामा किया, जिससे नेतन्याहू को अपना भाषण शुरू होने के कुछ ही समय बाद रोकना पड़ा। इस प्रमुख स्मृति कार्यक्रम का पूरे देश में सीधा प्रसारण किया जा रहा है। कई इजराइलियों का मानना है कि नेतन्याहू की विफलताओं के परिणामस्वरूप ही हमास सात अक्टूबर 2023 को इजराइल पर हमला कर पाया था। साथ ही ये लोग गाजा में हमास द्वारा बंधक बनाए गए शेष बंधकों को अब तक नहीं छुड़ाने के लिए भी नेतन्याहू को जिम्मेदार मानते हैं।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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