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जिस हेलिकॉप्टर में सवार थे ईरान के राष्ट्रपति रईसी, वो कितना सेफ और ताकतवर? कब-कब हुआ हादसे का शिकार

Ebrahim Raisi Helicopter Crash: इब्राहिम रईसी बेल 212 हेलिकॉप्टर से यात्रा कर रहे थे, जो अमेरिका मेड हेलिकॉप्टर है। यह हेलिकॉप्टर रविवार को अजरबैजान के पास हादसे का शिकार हो गया। ईरान की सरकारी टीवी की ओर से दावा किया गया है कि हादसे वाली जगह से राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी व अन्य लोगों के शव मिले हैं।

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इब्राहिम रईसी की हेलिकॉप्टर हादसे में मौत

Photo : AP

Ebrahim Raisi Helicopter Crash: ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी का हेलिकॉप्टर रविवार को क्रैश हो गया। हादसा अजरबैजान के घने जंगलों और पहाड़ी इलाकों के बीच हुआ। हादसे के करीब 18 घंटे बाद रेस्क्यू टीमों को राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी के दुर्घटनाग्रस्त हेलिकॉप्टर की लोकेशन मिली। ईरान की सरकारी टीवी की ओर से दावा किया गया है कि हादसे वाली जगह से राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी व अन्य लोगों के शव मिले हैं। बता दें, रईसी के साथ हेलिकॉप्टर में ईरान के विदेश मंत्री, पूर्वी अजरबैजान प्रांत के गवर्नर और अन्य अधिकारी भी यात्रा कर रहे थे।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इब्राहिम रईसी बेल 212 हेलिकॉप्टर से यात्रा कर रहे थे, जो अमेरिका मेड हेलिकॉप्टर है और बेल टेक्सट्रॉन इंक ने इसका निर्माण किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह हेलिकॉप्टर 15 सीटर था, जिसमें हादसे के समय चालक दल के साथ कुल 9 लोग सवार थे। रेस्क्यू टीमों को हेलिकॉप्टर का मलबा दिखाई दिया है। आइए जानते हैं ईरान के राष्ट्रपति के हेलिकॉप्टर के बारे में...

दो इंजन वाला हेलिकॉप्टर

बेल 212 को (बेल टू-ट्वेल्व) के ना से भी जाना जाता है। यह मीडियम आकार वाला दो इंजन का हेलिकॉप्टर होता है। दोनों छोटे इंजन अगल-बगल होते हैं और एक कंबाइंड गियरबॉक्स को अपनी पॉवर देते हैं। इस हेलिकॉप्टर में पायलट के अलावा 14 लोगों के बैठने की क्षमता होती है। इस हेलिकॉप्टर को कई प्रयोगों में लाया जा सकता है। जैसे ट्रांसपोर्टेशन, एरियल फायरफाइटिंग गियर, माल ढुलाई और इसमें हथियारों को भी लगाया जा सकता है।

इन देशों में हो रहा इस हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल

बेल 212 हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल जापान के तटरक्षक बलों द्वारा किया जाता है। इसके अलावा संयुक्त राज्य अमेरिका में कानून प्रवर्तन एजेंसियां और अग्निशमन विभाग द्वारा भी इसे इस्तेमाल में लाया जाता है। वहीं, थाईलैंड की राष्ट्रीय पुलिस इसका इस्तेमाल करती है। ईरान की सरकार द्वारा कितने बेल 212 हेलिकॉप्टर इस्तेमाल किए जाते हैं, यह स्पष्ट नहीं है। हालांकि, वर्ल्ड एयरफोर्स डायरेक्टरी 2024 के अनुसार, वायु सेना ओर नौसेना में इनकी संख्या कुल 10 है।

कई बार हो चुका है हादसे का शिकार

बेल 212 हेलिकॉप्टर सितंबर, 2023 में दुर्घटना का शिकार हो गया था, जब संयुक्त अरब अमीरात में इसे निजी तौर पर संचालित किया जा रहा था। 2018 में ईरान में हुए एक हादसे में चार लोगों की मौत हो गई थी। वहीं, 2009 में कनाडा में हुई दुर्घटना में 17 से 18 लोगों की मौत हो गई थी।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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