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व्हाइट हाउस में दिवाली की रौनक, ट्रंप जलाएंगे दीप, भारतीय समुदाय से करेंगे मुलाकात

यह परंपरा कोई नई नहीं है। इसकी शुरुआत राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश के दौर में हुई थी। तब यह आयोजन ज़्यादातर आइज़नहावर एग्ज़ीक्यूटिव ऑफिस बिल्डिंग में होता था। वहाँ भारतीय-अमेरिकी समुदाय के लोग और भारतीय राजनयिक जमा होते और दिवाली की शुभकामनाएं बांटते थे।

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ह्वाइट हाउस में दिवाली कार्यक्रम। -फाइल पिक्चर

Diwali at White House : अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन के लिए शुक्रवार का दिन खास है। व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में दिवाली का जश्न मनाया जा रहा है, और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इसमें शामिल हो रहे हैं। जिस कमरे से दुनिया के सबसे अहम फैसले लिए जाते हैं, वहाँ आज दीये की लौ टिमटिमाएगी।

जॉर्ज डब्ल्यू बुश के दौर में शुरू हुई यह परंपरा

यह परंपरा कोई नई नहीं है। इसकी शुरुआत राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश के दौर में हुई थी। तब यह आयोजन ज़्यादातर आइज़नहावर एग्ज़ीक्यूटिव ऑफिस बिल्डिंग में होता था। वहाँ भारतीय-अमेरिकी समुदाय के लोग और भारतीय राजनयिक जमा होते और दिवाली की शुभकामनाएं बांटते थे। कार्यक्रम छोटा और औपचारिक होता था, लेकिन उसका संदेश साफ़ था कि अमेरिका में बसा भारतीय समुदाय अब देश की सामाजिक और राजनीतिक तस्वीर का अहम हिस्सा है।

2009 में इस परंपरा ने नया मोड़ लिया

2009 में इस परंपरा ने नया मोड़ लिया। राष्ट्रपति बराक ओबामा व्हाइट हाउस में खुद दीया जलाने वाले पहले राष्ट्रपति बने। ईस्ट रूम में हुए उस समारोह में जब उन्होंने दीप प्रज्वलित किया, तो वह तस्वीर भारतीय मूल के लाखों लोगों के लिए गर्व का क्षण बन गई। उसके बाद दीप जलाने का सिलसिला चल पड़ा, और व्हाइट हाउस के अलग-अलग हिस्सों, जैसे रूजवेल्ट रूम और ओवल ऑफिस, में दिवाली मनाई जाने लगी।

अंधेरे पर रोशनी की जीत का प्रतीक

पिछले साल इस परंपरा की एक और झलक देखने को मिली। अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा ओवल ऑफिस पहुंचे और राष्ट्रपति ट्रंप के साथ पारंपरिक ढंग से दीप जलाकर दिवाली मनाई। एक तरफ दुनिया की सबसे ताकतवर कुर्सी थी, दूसरी तरफ भारत का प्रतिनिधि, और बीच में एक छोटा-सा दीया, जो अंधेरे पर रोशनी की जीत का प्रतीक है।

दिखती है भारत-यूएस रिश्ते की गर्मजोशी

इस साल भी वही दृश्य दोहराया जाएगा। कूटनीति की दुनिया में ऐसे प्रतीकात्मक पल बड़े मायने रखते हैं। व्यापार, रक्षा और रणनीतिक साझेदारी की लंबी बातचीत के बीच दिवाली जैसे आयोजन दो देशों के लोगों के रिश्ते को गर्मजोशी देते हैं। शायद इसीलिए ओवल ऑफिस का यह दीया सिर्फ एक रस्म नहीं है। यह उस पुल की निशानी है जो भारत और अमेरिका के लोगों को जोड़ता है, और हर साल यह लौ उस रिश्ते को थोड़ा और रोशन कर देती है।

Alok Rao
आलोक कुमार रावauthor

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

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