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ट्रंप के आदेश से फंस गए 25 हजार से ज्यादा अफगान शरणार्थी? कभी तालिबान के खिलाफ लड़ाई में दिया था अमेरिका का साथ

तालिबान के खिलाफ लड़ाई में अमेरिका का साथ देने वाले हजारों अफगान नागरिक इस समय पाकिस्तान में रह रहे हैं, इन्हें अमेरिका में बसाया जाना था, लेकिन अब इनके भविष्य पर संकट खड़ा हो गया है।

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अमेरिका ने नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

Photo : AP

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शरणार्थी कार्यक्रम को निलंबित करने का कार्यकारी आदेश जारी किया है। उनके इस कदम ने पाकिस्तान में रहने वाले हजारों अफगानों के भाग्य पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।

अमेरिका में था बसाया जाना

अमेरिकी शरणार्थी कार्यक्रम के तहत अफगानिस्तान से भागकर पाकिस्तान में रह रहे 25,000 से अधिक अफगान नागरिकों को अंततः अमेरिका में बसाया जाना था। ये वे लोग थे जो तालिबान शासित अफगानिस्तान से भागकर पाकिस्तान में आए थे और वर्षों से अमेरिका में पुनर्वास का इंतजार कर रहे थे।

पाकिस्तान अमेरिका के बीच हुआ था समझौता

पाकिस्तान सरकार और बाइडेन प्रशासन के बीच हुए समझौते के अनुसार, दोनों देशों के बीच यह सहमति बनी थी कि 25,000 से अधिक अफगानों - को बाद में अमेरिका में बसाया जाएगा। इनमें से अधिकांश ने अगस्त 2021 में तालिबान के काबुल की सत्ता पर कब्जे से पहले अमेरिकी सेना और उसके ठेकेदारों के साथ काम किया था इस्लामाबाद को शुरू में उम्मीद थी कि यह समझौता अफगान नागरिकों के देश में अस्थायी प्रवास के लिए होगा। हालांकि, पिछले साढ़े तीन वर्षों से इस पर कोई प्रगति नहीं हुई है। वरिष्ठ रणनीतिक विश्लेषक कामरान यूसुफ ने कहा, "बाइडेन प्रशासन ने पाकिस्तान को आश्वासन दिया था कि विशेष अप्रवासी वीजा (एसआईवी) और अमेरिकी शरणार्थी प्रवेश कार्यक्रम (यूएसआरएपी) जैसी पहलों के माध्यम से अफगानों को फिर से बसाया जाएगा। लेकिन अब, ट्रम्प के कार्यकारी आदेश के बाद, पूरी प्रक्रिया बाधित हो गई है।"

फैसले का बड़ा असर

वाशिंगटन के इस फैसले ने अब पाकिस्तान में इन अफगान नागरिकों के भाग्य को खतरे में डाल दिया है। सोसाइटी फॉर ह्यूमन राइट्स एंड प्रिजनर्स एड (एसएचएआरपी) के अध्यक्ष सैयद लियाकत बनोरी ने कहा, "इन दुर्भाग्यपूर्ण अफगानों को अब कई समस्याओं और गंभीर मुद्दों का सामना करना पड़ रहा है। वे पाकिस्तान में हैं, एक ऐसा देश जो अवैध अफगानों को उनके देश वापस भेज रहा है। अफगानिस्तान में, इन लोगों को गिरफ्तार किए जाने और मारे जाने का खतरा है क्योंकि अफगान तालिबान उन सभी लोगों के खिलाफ है जिन्होंने अगस्त 2021 से पहले अमेरिकी सेना के साथ काम किया था।"

पाकिस्तान ने की चिंता व्यक्त

पाकिस्तान सरकार के सूत्रों ने भी नवीनतम घटनाक्रम पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। एक अधिकारी ने कहा, "हमें पता था कि राष्ट्रपति ट्रंप के कार्यभार संभालने के बाद यह शरणार्थी कार्यक्रम जांच के दायरे में आ सकता है, लेकिन नए प्रशासन ने जिस तरह से इस पर कार्रवाई की है, वह आश्चर्यजनक है।"

Shishupal Kumar
शिशुपाल कुमारauthor

शिशुपाल कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 13 वर्षों का अनुभव हासिल है। राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय और क्राइम रिपोर्टिंग में गहरी रुचि और मजबूत पकड़ के साथ वे समाचारों की बारीकियों को समझने और उन्हें प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। शिशुपाल ने अपने करियर की शुरुआत एक इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के रूप में की, जहां उन्होंने प्रोडक्शन से लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग तक पत्रकारिता के कई महत्वपूर्ण पहलुओं में काम किया। फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क दोनों स्तरों पर उनकी दक्षता है। अब तक शिशुपाल कुमार 15,000 से अधिक खबरें प्रकाशित कर चुके हैं। वह ब्रेकिंग न्यूज, रियल-टाइम कवरेज, डेटा-आधारित विश्लेषण और एक्सप्लेनर लिखने में खास महारत रखते हैं। उनकी स्टोरीज तथ्यों की सटीकता और सहज भाषा की वजह से पाठकों पर मजबूत प्रभाव छोड़ती हैं।

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