अमेरिका-इजराइल और ईरान की जंग को दस दिन बीत चुके हैं। 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमला किया था। जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई। इसकी जानकारी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दी। खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को ईरान का सर्वोच्च लीडर चुना गया हैं।
वहीं अब ईरान पूरी ताकत के साथ अमेरिका पर वार कर रहा है। जंग की आग मीडिल ईस्ट में भी भड़क गई है। विदेश मामलों के जानकार रोबिंदर सचदेव ने ईरान युद्ध के ताजा हालात पर टाइम्स नाउ नवभारत के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बातचीत की है। इस बातचीत में उन्होंने बताया कि अमेरिका और इजराइल ने जैसा सोचा था यह युद्ध उस तरह नहीं हो रहा है। ईरान ने खाड़ी देशों में अमेरिका पर चोट करना शुरू किया है, क्योंकि वह अली खामेनेई की मौत से तिलमिलया हुआ है। रोबिंदर सचदेव यह कहते हैं कि अमेरिका और इजराइल ने मिलकर खामेनेई को मारने का पूरा प्लान बनाया और कोई अंदर का ही गद्दार था जिसकी दी हुई सूचना के आधार पर खामेनेई तक अमेरिका और इजराइल पहुंच सका। हालांकि उनका यह भी कहना है कि अमेरिका वेनुजुएला जैसा ऑपरेशन ईरान में नहीं चला सका क्योंकि ईरान ने अमेरिका को जवाब देने की पूरी तैयारी की थी। इसलिए हमले के तुरंत बाद ईरान ने अपना पलटवार शुरू कर दिया।
बातचीत में रोबिंदर सचदेव ने ईरान-इजराइल संघर्ष और हालिया हमलों के प्रभावों पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि ईरान ने अपनी रणनीति कैसे बदली है, इजराइली ठिकानों पर हमले करने के बजाय अब वह खाड़ी देशों में नागरिक बुनियादी ढांचे और पश्चिमी हितों को निशाना बना रहा है। पूरा इंटरव्यू आप यहां क्लिक कर सुन सकते हैं...
कुल मिलाकर विदेश मामलों के विशेषज्ञ रोबिंदर सचदेव के मुताबिक ईरान-इजराइल संघर्ष अब नए चरण में पहुंच चुका है, जहां ईरान सीधे इजराइल के बजाय खाड़ी देशों में पश्चिमी हितों और नागरिक ढांचे को निशाना बनाकर दबाव की रणनीति अपना रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर खतरा बढ़ने से तेल कीमतों में उछाल और खाड़ी में काम कर रहे भारतीयों की सुरक्षा जैसे मुद्दे भारत के लिए भी बड़ी चिंता बन सकते हैं।
