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मेड इन चाइना ने फिर दिया धोखा, वैक्सीन लेना इन देशों को पड़ रहा है भारी !

  • Authored by: प्रशांत श्रीवास्तव
  • Updated Dec 22, 2022, 03:56 PM IST

Covid-19 Outbreak in China:चीन में कोरोना के हालात से साफ है कि चीन की वैक्सीन कारगर साबित नही हो रही है। और इसका खामियाजा चीन ही नहीं दुनिया के उन 119 देशों को भी उठाना पड़ सकता है, जिन्होंने चीन से भारी मात्रा में वैक्सीन खरीदी या दान में प्राप्त की थी।

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दुनिया में बढ़ा कोरोना का खतरा

KEY HIGHLIGHTS
  • ब्राजील, मैक्सिको,फिलीपींस में तेजी से बढ़ रहे है मामले
  • चीन की वैक्सीन रोग प्रतिरोधी क्षमता कमजोर और आंकड़ों पर संदेह
  • चीन से इंडोनेशिया, पाकिस्तान, ईरान ने सबसे ज्यादा वैक्सीन खरीदी है।

Covid-19 Outbreak in China:कोरोना एक बार फिर चीन से फैल रहा है। तीन साल पहले चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग जिस दंभ से यह दावा कर रहे थे कि उन्होंने कोरोनो को काबू कर लिया है। वहीं अब उनकी तैयारियों की पोल खोल रहा है। इस समय चीन में हालात इतने बुरे हैं कि अस्पतालों और श्मशानों में लंबी कतारें लगी हुई हैं। और ऐसा तब हो रहा है जब चीन ने सख्त कोविड पॉलिसी लागू कर रखी थी और उसका दावा था कि उसकी 90 फीसदी आबादी को कोरोना रोधी वैक्सीन की 2 डोज लग चुकी है। लेकिन चीन के हालात से साफ है कि चीन की वैक्सीन कारगर नही है। और अब इसका खामियाजा चीन ही नहीं दुनिया के उन 119 देशों को भी उठाना पड़ सकता है, जिन्होंने चीन से भारी मात्रा में वैक्सीन खरीदी या दान में प्राप्त की थी। इन देशों में से कई में तो उसका असर भी दिखने लगा है और वहां पर तेजी से कोरोना के केस बढ़ रहे हैं।

चीन ने बनाई थी दो वैक्सीन

चीन ने Coronavac और Sinopharm वैक्सीन बनाई है और जिनकी दुनिया के कई देशों में उसने सप्लाई की है। WHO की रिपोर्ट के अनुसार Coronavac की कोरोना के खिलाफ लड़ने की क्षमता 65.9 फीसदी है, जबकि Sinopharm की प्रतिरोधी क्षमता करीब 79 फीसदी रही थी। जो कि दुनिया के दूसरे देशों की वैक्सीन की तुलना में कमजोर है। भारत की कोवैक्सीन और कोवैक्स वैक्सीन की गंभीर लक्षणों में 93 फीसदी से ज्यादा प्रतिरोधी क्षमता है। इसके अलावा फाइजर और दुनिया के दूसरी प्रमुख वैक्सीन भी चीन से बेहतर स्थिति में है। अहम बात यह है कि चीन जिस प्रतिरोधी क्षमता का दावा करता है उसको लेकर भी शक है। क्योंकि उसने कोरोना आने के 6 महीने के अंदर ही दावा कर दिया था कि उसने वैक्सीन बना ली थी। इसके अलाव इस बात पर भी संदेह है कि क्या चीन ने क्लीनिकल ट्रॉयल के लिए जरूरी मानक पूरे किए गए हैं कि नहीं।

इन देशों को वैक्सीन लेना पड़ रहा है भारी

चीन से वैक्सीन लेने वाले देशों के अगर कोविड-19 के आंकड़े देखें जाय, तो साफ नजर आ रहा है, कि कई देशों में कोरोना केस पिछले एक हफ्ते में काफी तेजी से बढ़े हैं। इसमें सबसे ऊपर ब्राजील है, जहां पर पिछले एक हफ्ते में 2.75 लाख से ज्यादा केस सामने आए हैं। ब्राजील ने चीन से 10 करोड़ वैक्सीन डोज हासिल की थी। इसी तरह मैक्सिको में 26 हजार से ज्यादा केस आए हैं। जबकि उसने भी चीन से 4.2 करोड़ डोज ले रखे हैं।

देशवैक्सीन डोजएक हफ्ते में कितने मामले
इंडोनेशिया26.8 करोड़8588
ब्राजील10.2 करोड़275554
मैक्सिको4.2 करोड़26,832
फिलीपींस6 करोड़6,682
प्रशांत श्रीवास्तव
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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