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चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग से मोहम्मद यूनुस ने की मुलाकात, बांग्लादेश से जुड़े किन मुद्दों पर हुई बात; जानें सबकुछ

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार यूनुस ने मुलाकात की। खबरों के अनुसार, ‘बोआओ फोरम फॉर एशिया’ वार्षिक सम्मेलन के इतर यूनुस ने चीन के कार्यकारी उप प्रधानमंत्री डिंग शुएशियांग के साथ बैठक में विकास परियोजनाओं के लिए चीनी समर्थन मांगा। साथ ही उन्होंने जिनपिंग से प्रतिबद्धता शुल्क माफ करने की मांग की।

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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार यूनुस ने मुलाकात की।

Bangladesh made this appeal to China: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने शुक्रवार को यहां मुलाकात की। सरकारी मीडिया की खबर में यह जानकारी दी गई। चीन की चार दिवसीय यात्रा पर आए यूनुस ने बुधवार को हैनान पहुंचने के बाद देश के ‘बोआओ फोरम फॉर एशिया’ वार्षिक सम्मेलन में हिस्सा लिया। वह बृहस्पतिवार को बीजिंग पहुंचे और चीनी उप विदेश मंत्री सुन वेइदोंग ने हवाई अड्डे पर उनका स्वागत किया।

विकास परियोजनाओं के लिए चीन से मांगा समर्थन

यूनुस ने शी के साथ अपनी बैठक से पहले चीनी ऋणों पर ब्याज दर कम करने और चीनी वित्तपोषित परियोजनाओं पर प्रतिबद्धता शुल्क माफ करने की चीन से बृहस्पतिवार को अपील की। बांग्लादेश की विभिन्न मीडिया की खबरों के अनुसार, ‘बोआओ फोरम फॉर एशिया’ वार्षिक सम्मेलन के इतर यूनुस ने चीन के कार्यकारी उप प्रधानमंत्री डिंग शुएशियांग के साथ बैठक में विकास परियोजनाओं के लिए चीनी समर्थन मांगा।

उन्होंने बांग्लादेश को दिए जाने वाले चीनी ऋणों की ब्याज दरों को तीन प्रतिशत से घटाकर एक-दो प्रतिशत करने तथा बांग्लादेश में चीन द्वारा वित्तपोषित परियोजनाओं पर प्रतिबद्धता शुल्क में छूट की भी मांग की।

बांग्लादेश का चौथा सबसे बड़ा ऋणदाता है चीन

बांग्लादेश के समाचार पत्र ‘डेली स्टार’ की खबर के अनुसार जापान, विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक के बाद चीन बांग्लादेश का चौथा सबसे बड़ा ऋणदाता है, जिसने उसे 1975 से अब तक कुल 7.5 अरब अमेरिकी डॉलर का ऋण दिया है। डिंग के साथ अपनी बैठक में यूनुस ने वस्त्र, इलेक्ट्रिक वाहन, हल्की मशीनरी, उच्च तकनीक वाले इलेक्ट्रॉनिक, चिप विनिर्माण और सौर पैनल उद्योग समेत चीनी विनिर्माण उद्योगों के उनके देश में स्थानांतरण के लिए बीजिंग से मदद मांगी।

यूनुस ने रूस के उप प्रधानमंत्री एलेक्सी ओवरचुक से भी मुलाकात की। ओवरचुक ने बांग्लादेश को अधिक गेहूं और उर्वरक निर्यात करने में रुचि व्यक्त की। उन्होंने कहा, ‘‘रूस बांग्लादेश को अधिक गेहूं और उर्वरक निर्यात करना चाहेगा।’’ बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने रूस द्वारा वित्तपोषित रूपपुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र के संचालन पर चर्चा की।

सुचारू रूप से लोकतांत्रिक व्यवस्था बहाल करने के लिए मांगी सलाह

यूनुस ने संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव बान की मून से भी मुलाकात कर उनसे बांग्लादेश में लोकतांत्रिक व्यवस्था सुचारू रूप से बहाल करने में उनका समर्थन और सलाह मांगी। मून ‘बोआओ फोरम’ के अध्यक्ष हैं। ‘डेली स्टार’ ने यूनुस के हवाले से खबर में कहा, ‘‘हम नए सिरे से शुरुआत करना चाहते हैं। हमें आपके समर्थन और सलाह की जरूरत है। अब हमारे पास एक बेहतरीन अवसर है।’’

चीन ने बांग्लादेश के बदलते परिदृश्य के बीच ढाका के साथ संबंधों को मजबूत करने की इच्छा जताई है। बांग्लादेश की सरकारी समाचार एजेंसी ‘बीएसएस’ ने चीनी उप-प्रधानमंत्री के हवाले से कहा, ‘‘राष्ट्रपति शी जिनपिंग आपकी (यूनुस की) यात्रा को अत्यधिक महत्व देते हैं।’’ चीनी उप-प्रधानमंत्री ने यूनुस से कहा कि उन्हें उम्मीद है कि उनके अंतरिम प्रशासन के तहत दक्षिण एशियाई राष्ट्र समृद्ध होगा। डिंग ने कहा कि द्विपक्षीय राजनयिक संबंधों की स्थापना के 50 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में बीजिंग बांग्लादेश सरकार को निवेश, व्यापार और सांस्कृतिक संबंधों के मामले में पूर्ण समर्थन देगा।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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