Donald Trump : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि दुनिया के अहम समुद्री जलमार्गों में से एक पनामा कैनाल को पनामा को नहीं सौंपा जाना चाहिए था। राष्ट्रपति ने कहा कि इसे सौंपे जाने के बाद पनामा ने यहां से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क में वृद्धि कर दी। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अब चीन पनामा कैनाल पर अपना नियंत्रण चाहता है लेकिन वह ऐसा नहीं होने देंगे। बुधवार (स्थानीय समयानुसार) को थियोडोर रूजवेल्ट प्रेसिडेंशियल लाइब्रेरी के एक कार्यकम में ट्रंप ने कहा कि यूएस द्वारा पैनामा कैनाल को पनामा को सौंपे जाने की आलोचना की और कहा कि इस कैनाल पर चीन के नियंत्रण को अमेरिका स्वीकार नहीं करेगा।
पनामा नहर और चीन पर ट्रंप का बयान:
ट्रंप ने कहा कि जब अमेरिका ने पनामा नहर पनामा को सौंपी, तो पनामा ने जहाजों के लिए शुल्क चार गुना बढ़ा दिया, फिर भी कोई जहाज नहीं खोया और भारी मुनाफा कमाया। उन्होंने इसे 'बेवकूफी भरा फैसलाट बताया। उन्होंने वेनेज़ुएला में अमेरिका के कामकाज की सराहना की और ईरान के मामले में भी वैसी ही सफलता का दावा किया। साथ ही उन्होंने कहा कि चीन पनामा नहर पर कब्ज़ा करने की योजना बना रहा है, जिसे अमेरिका नहीं होने देगा।
थियोडोर रूज़वेल्ट को श्रद्धांजलि:
ट्रंप ने अमेरिका के 26वें राष्ट्रपति थियोडोर रूजवेल्ट को 'बहुत खास व्यक्ति' बताते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि रूजवेल्ट देश की भावना और जज्बे का प्रतीक थे, और वे उन गिने-चुने लोगों में से हैं जिनकी वे लंबे समय से प्रशंसा करते आए हैं। ट्रंप ने कहा कि वे नॉर्थ डकोटा वापस आए हैं क्योंकि उन्होंने इस राज्य में राष्ट्रपति पद के इतिहास में सबसे ज्यादा वोटों से जीत हासिल की। ट्रंप ने रूजवेल्ट के जीवन को दृढ़ता और हार न मानने की मिसाल के तौर पर पेश किया, कहते हुए कि अमेरिकी कभी हार नहीं मानते।
1999 में इस नहर को अमेरिका ने पनामा को सौंपा
अमेरिका ने पनामा नहर 1999 में पनामा को सौंपी, जो 1977 की टॉरिजोस-कार्टर संधि का नतीजा था। यह संधि राष्ट्रपति जिमी कार्टर और पनामा के नेता उमर टॉरिजोस के बीच हुई थी। अमेरिका ने 1903 में पनामा से नहर क्षेत्र पर नियंत्रण हासिल किया था, जिसे लेकर पनामा में लंबे समय से असंतोष था। इसे औपनिवेशिक हस्तक्षेप माना जाता था। 1964 में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद तनाव और बढ़ गया। संधि के तहत तय हुआ कि नहर का नियंत्रण धीरे-धीरे पनामा को सौंपा जाएगा, और 31 दिसंबर 1999 को पूर्ण हस्तांतरण पूरा हुआ। इसका मकसद पनामा की संप्रभुता का सम्मान करना और क्षेत्रीय संबंध सुधारना था।
