'इसकी चुकानी पड़ेगी कीमत', ताइवान को हथियार बेचने के ट्रंप के फैसले से खफा 'ड्रैगन'; 20 कंपनियों पर लगाया बैन
- Edited by: अनुराग गुप्ता
- Updated Dec 27, 2025, 08:49 AM IST
ताइवान को बड़े पैमाने पर हथियारों की ब्रिकी करने के अमेरिकी फैसले के जवाब में चीन ने कड़ा रुख अपनाते हुए कई अमेरिकी रक्षा कंपनियों और उनके वरिष्ठ अधिकारियों पर प्रतिबंध लगा दिया। चीन के विदेश मंत्रालय ने इसकी जानकारी दी और कहा कि यह तत्काल प्रभाव से लागू होगा।
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (फाइल फोटो साभार: AP)
ताइवान को बड़े पैमाने पर हथियारों की ब्रिकी करने के अमेरिकी फैसले के जवाब में चीन ने कड़ा रुख अपनाते हुए कई अमेरिकी रक्षा कंपनियों और उनके वरिष्ठ अधिकारियों पर प्रतिबंध लगा दिया। चीन के विदेश मंत्रालय ने इसकी जानकारी दी और कहा कि यह तत्काल प्रभाव से लागू होगा।
20 अमेरिकी कंपनियों पर लगा प्रतिबंध
चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह 20 अमेरिकी रक्षा-संबंधी कंपनियों और 10 वरिष्ठ अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाएगा, जो हाल के वर्षों में ताइवान को हथियार सप्लाई करने में शामिल रहे हैं। यह कार्रवाई चीन के विदेशी प्रतिबंध विरोधी कानून के तहत की गई है और तत्काल प्रभावी होगी।
कौन-कौन कंपनियों पर लगा प्रतिबंध
बकौल चीनी विदेश मंत्रालय, प्रतिबंधित कंपनियों में नॉर्थरॉप ग्रुम्मन सिस्टम्स कॉरपोरेशन, L3Harris मैरीटाइम सर्विसेज, बोइंग (सेंट लुइस), गिब्स एंड कॉक्स, एडवांस्ड एकॉस्टिक कॉन्सेप्ट्स, VSE कॉरपोरेशन, सिएरा टेक्निकल सर्विसेज, रेड कैट होल्डिंग्स, टील ड्रोन, रीकॉनक्राफ्ट, हाई पॉइंट एयरोटेक्नोलॉजीज़, एपिरस, डेड्रोन होल्डिंग्स, एरिया-I, ब्लू फोर्स टेक्नोलॉजीज़, डाइव टेक्नोलॉजीज़, वैंटोर, इंटेलिजेंट एपिटैक्सी टेक्नोलॉजी, रोंबस पावर और लाजरस एंटरप्राइजेज शामिल हैं।
इन प्रतिबंधों के तहत, चीन में स्थित इन कंपनियों की सभी चल और अचल संपत्तियों को फ्रीज कर दिया जाएगा। साथ ही चीनी संगठनों और व्यक्तियों को इन कंपनियों के साथ किसी भी प्रकार के व्यापार, सहयोग या अन्य लेन-देन से रोक दिया गया है।
इन अधिकारियों पर भी लगा प्रतिबंध
इसके अलावा, 10 वरिष्ठ अधिकारियों पर भी कार्रवाई की गई है, जिनमें एंडुरिल इंडस्ट्रीज़ के संस्थापक पामर लकी और L3Harris, VSE कॉर्पोरेशन और अन्य कंपनियों के शीर्ष अधिकारी शामिल हैं। इन अधिकारियों की चीन में मौजूद संपत्तियों पर रोक लगाई जाएगी और चीन से जुड़े उनके व्यावसायिक गतिविधियों पर भी प्रतिबंध रहेगा।