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भारत के साथ दुश्मनी ठीक नहीं..., ट्रूडो के खिलाफ खड़ा हुआ यह कनाडाई नेता, बोल- मैं पीएम बना तो...

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Oct 25, 2023, 08:53 AM IST

India Canada Row: कनाडाई नेता पियरे ने कहा कि आठ साल सत्ता में रहने के बाद भी जस्टिन ट्रूडो भारत के साथ संबंधों की कीमत नहीं समझ पाए हैं। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। उन्होंने कहा, अगर वे प्रधानमंत्री बनेंगे तो सबसे पहले भारत और कनाडा के बीच अच्छे रिश्ते बहाल करेंगे।

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Canadian opposition leader Pierre Poilievre

Photo : Twitter

India Canada Row: खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद भारत और कनाडा के बीच रिश्ते खटास भरे हो गए हैं। एक आतंकी की मौत से खड़ा हुआ विवाद दोनों देशों के बीच राजनयिक रिश्तों तक पहुंच गया है। इस बीच कनाडा की कंजर्वेटिव पार्टी के प्रमुख और विपक्षी नेता पियरे पोइलिव्रे ने भारत के साथ खराब रिश्तों के लिए पीएम जस्टिन ट्रूडो को जिम्मेदार ठहराया है।

कनाडाई नेता पियरे ने कहा कि आठ साल सत्ता में रहने के बाद भी जस्टिन ट्रूडो भारत के साथ संबंधों की कीमत नहीं समझ पाए हैं। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। उन्होंने कहा, अगर वे प्रधानमंत्री बनेंगे तो सबसे पहले भारत और कनाडा के बीच अच्छे रिश्ते बहाल करेंगे।

भारत के साथ औपचारिक रिश्ते जरूरी

एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कहा, भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। इसलिए हमें भारत के साथ औपचारिक और पेशेवर रिश्ते बनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा, दोनों देशों के बीच असहमति होना ठीक है, लेकिन भारत के साथ औपचारिक रिश्ते आवश्यक हैं। उन्होंने भारत से कनाडा के 41 डिप्लोमैट्स को वापस बुलाने पर ट्रूडो पर गंभीर आरोप लगाए और उन्हें असक्षम और गैरपेशेवर करार दिया। उन्होंने कहा, आज के समय में कनाडा का भारत ही नहीं दुनिया की हर महाशक्ति के साथ विवाद है।

हिंदू मंदिरों की तोड़फोड़ पर क्या बोले पियरे

कनाडा में हिंदुओं और हिंदू मंदिरों में जारी तोड़फोड़ पर भी कनाडाई नेता ने खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, जो लोग हिंदू मंदिरों को नुकसान पहुंचा रहे हैं उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाना चाहिए। बता दें, निज्जर की हत्या के बाद भारत और कनाडा के बीच रिश्ते बिगड़ते जा रहे हैं। यह विवाद तब शुरू हुआ जब कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो ने निज्जर की हत्या में भारतीय साजिश का आरोप लगाया। इसके बाद मामला बढ़ता ही चला गया। भारत ने इन आरोपों का खंडन किया। अभी हाल ही में भारत ने कनाडा के 41 राजनयिकों को वापस भेज दिया।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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