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भारत के साथ विवाद के बीच कनाडा ने विदेशी छात्रों को दिया बड़ा झटका, बंद की ये खास सर्विस

India Canada Standoff: स्टूडेंट डायरेक्ट स्ट्रीम SDS के तहत चार सप्ताह में प्रोसेसिंग होती थी और 95 फीसदी आवेदन स्वीकार होते थे। इस सुविधा का लाभ भारत सहित 14 देशों के छात्रों को मिलता था। अब कनाडा ने इस सर्विस को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया है।

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जस्टिन ट्रूडो

Photo : BCCL

India Canada Standoff: भारत सरकार के साथ राजनयिक विवाद के बीच कनाडा ने विदेशी छात्रों को बड़ा झटका दिया है। कनाडा की जस्टिन ट्रूडो सरकार ने अपनी लोकप्रिय स्टूडेंट डायरेक्ट स्ट्रीम (SDS) कार्यक्रम को निलंबित कर दिया है। इससे भारत सहित 14 देशों के छात्रों के लिए फास्ट-ट्रैक स्टडी परमिट प्रक्रिया समाप्त हो गई है। इमिग्रेशन रिफ्यूजीज एंड सिटीजनशिप कनाडा की ओर से जारी सूचना के अनुसार, यह निर्णय 8 नवंबर से लागू हो गया है और एसडीएस प्रोग्राम को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया गया है।

बता दें, स्टूडेंट डायरेक्ट स्ट्रीम SDS के तहत चार सप्ताह में प्रोसेसिंग होती थी और 95 फीसदी आवेदन स्वीकार होते थे। अब IRCC ने कहा है कि इस प्रोग्राम को बंद करने का उद्देश्य छात्रों के बीच भेद्दता को कम करना और सभी छात्रों के लिए आवेदन प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाना है। अब छात्रों के आवेदन नियमित स्ट्रीम के तहत प्रोसेस किए जाएंगे।

कनाडा में खालिस्तान समर्थकों की मौजूदगी की बात ट्रूडो ने मानी

इस बीच कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने देश में खालिस्तान समर्थकों की मौजूदगी की बात को स्वीकार किया है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ये खालिस्तानी समर्थक कनाडा में सिख समुदाय का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं। ट्रूडो ने यह टिप्पणी ओटावा के 'पार्लियामेंट हिल' में दिवाली समारोह के दैरान की। उन्होंने कहा, कनाडा में खालिस्तान के कई समर्थक हैं, लेकिन वे पूरे सिख समुदाय का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं। इसी तरह कनाडा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार के समर्थक भी हैं, लेकिन वे सभी हिंदू कनाडाई लोगों का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं।

निज्जर हत्याकांड से तनावपूर्ण हुए थे भारत-कनाडा संबंध

बता दें, पिछले वर्ष सितबंर में ट्रूडो द्वारा हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारतीय एजेंटों की संभावित संलिप्तता के आरोप लगाए जाने के बाद दोनों देशों के बीच संबंध तनावपूर्ण हो गए थे। भरात ने ट्रूडो के आरोपों को बेतुका बताकर खारिज कर दिया था। भारत का कहना है कि दोनों देशों के बीच मुख्य मुद्दा यह है कि कनाडा अपनी धरती से गतिविधियों का संचालन कर रहे खालिस्तान समर्थक तत्वों को बिना किसी रोक-टोक के जगह दे रहा है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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