ब्रिटेन और फ्रांस ने सीरिया के मध्य हिस्से में इस्लामिक स्टेट (IS) के एक संदिग्ध हथियार भंडारण केंद्र को निशाना बनाया। ये संयुक्त हवाई हमला उस भूमिगत ठिकाने पर किया गया,जहां आतंकियों द्वारा हथियार और विस्फोटक रखे जाने की आशंका थी। ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने हमले के बाद बयान जारी किया। उसने बताया कि शनिवार शाम को किए गए इस ऑपरेशन में गाइडेड बमों का इस्तेमाल किया गया। हमला सीरिया के होम्स प्रांत में ऐतिहासिक शहर पलमायरा के उत्तर में स्थित पहाड़ी इलाके में बने एक भूमिगत ढांचे के प्रवेश सुरंगों को निशाना बनाकर किया गया।
गौरतलब है कि ब्रिटेन और फ्रांस दोनों ही अमेरिका के नेतृत्व वाले उस अंतरराष्ट्रीय गठबंधन का हिस्सा हैं,जो पिछले एक दशक से अधिक समय से आईएस आतंकियों के खिलाफ अभियान चला रहा है।
टाइफून FGR4 लड़ाकू विमानों से बरसाए बम
ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस ऑपरेशन में टाइफून FGR4 लड़ाकू विमानों ने हिस्सा लिया,जिन्हें वॉयजर रिफ्यूलिंग टैंकर का समर्थन मिला। फ्रांस के लड़ाकू विमान भी इस हमले में शामिल थे। मंत्रालय ने कहा कि पावेवे-4 गाइडेड बमों से भूमिगत ठिकाने तक जाने वाली कई सुरंगों को निशाना बनाया गया और शुरुआती आकलन में लक्ष्य को सफलतापूर्वक नष्ट किए जाने के संकेत मिले हैं।
ब्रिटेन के रक्षा मंत्री जॉन हीली बोले- किसी भी आतंकी को पनपने नहीं देंगे
ब्रिटेन के रक्षा मंत्री जॉन हीली ने कहा कि उनका देश आईएस के किसी भी संभावित पुनरुत्थान को रोकने के लिए अपने सहयोगियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है। यह अभियान उन खतरनाक आतंकियों को खत्म करने के लिए है, जो हमारी जीवनशैली के लिए खतरा हैं। यह दिखाता है कि हमारी सशस्त्र सेनाएं देश की सुरक्षा के लिए हर समय तैयार हैं।
वहीं, फ्रांसीसी सेना ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी बयान में कहा कि यह हमला आईएस के फिर से संगठित होने से रोकने के उद्देश्य से किया गया है। फ्रांस ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई उसके और उसके साझेदार देशों की प्राथमिकता बनी हुई है।
अमेरिका ने भी बरसाए थे बम
पिछले महीने, अमेरिका के ट्रंप प्रशासन ने भी सीरिया में आईएस ठिकानों और हथियार अड्डों पर हमले किए थे। ये हमले पलमायरा के पास हुए एक घातक हमले के जवाब में किए गए थे, जिसमें दो अमेरिकी सैनिक और एक अमेरिकी नागरिक दुभाषिया मारे गए थे।
सीरिया सरकार ने नहीं जारी किया बयान
वहीं, इस हमले पर सीरिया सरकार की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। उल्लेखनीय है कि सीरिया ने पिछले साल के अंत में औपचारिक रूप से आईएस विरोधी गठबंधन में शामिल होने की घोषणा की थी। भले ही 2019 में सीरिया में आईएस को सैन्य रूप से पराजित कर दिया गया था, लेकिन उसके स्लीपर सेल अब भी सीरिया और इराक में घातक हमले कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों के अनुसार,आईएस के पास अब भी सीरिया और इराक में 5,000 से 7,000 लड़ाके मौजूद हैं।
