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बांग्लादेश में आज चुनाव, 8 पार्टियां ले रहीं हिस्सा, जमात प्रमुख ने कहा-भारत के साथ चाहते हैं सकारात्मक संबंध

रहमान ने राष्ट्रीय एकता, समान नागरिकता और भारत सहित पड़ोसी देशों के साथ रचनात्मक संबंधों पर बल दिया। बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख ने कहा, 'हम अपने पड़ोसी देशों और दुनियाभर के मित्रों के साथ सकारात्मक और बेहतर संबंध स्थापित करना चाहते हैं। भारत हमारा निकटतम पड़ोसी है और यह हमारी प्राथमिकता बना रहेगा।

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बांग्लादेश में आम चुनाव।

Photo : ANI

Bangladesh Elections 2026: बांग्लादेश में आज चुनाव हो रहा है। इस चुनाव में बांग्लादेश की आठ पार्टियां हिस्सा ले रही हैं। चुनाव से पहले जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख शफीकुर रहमान ने कहा है कि अगर चुनाव में जीत हासिल कर उनकी पार्टी सत्ता में आती है तो वह भारत के साथ 'मजबूत, सम्मानजनक और पारस्परिक रूप से लाभकारी’ संबंध बनाने के लिए काम करेगी। रहमान ने आम चुनाव की पूर्व संध्या पर ढाका में संवाददाताओं के एक समूह के साथ बैठक के दौरान ये टिप्पणियां कीं।

भारत के साथ अच्छे संबंध चाहते हैं-शफीकुर

रहमान ने राष्ट्रीय एकता, समान नागरिकता और भारत सहित पड़ोसी देशों के साथ रचनात्मक संबंधों पर बल दिया। बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख ने कहा, 'हम अपने पड़ोसी देशों और दुनियाभर के मित्रों के साथ सकारात्मक और बेहतर संबंध स्थापित करना चाहते हैं। भारत हमारा निकटतम पड़ोसी है और यह हमारी प्राथमिकता बना रहेगा। हमारा लक्ष्य संघर्ष उत्पन्न करना नहीं, बल्कि विकास और शांति के लिए साझेदारी का निर्माण करना है। इसके लिए आपसी सम्मान और विश्वास अत्यंत आवश्यक हैं।’

2024 के हिंसक आंदोलन के बाद पहली बार आम चुनाव

बांग्लादेश में 2024 के उस हिंसक आंदोलन के बाद पहली बार आम चुनाव होंगे, जिसके कारण तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को पद से हटना पड़ा था। देश में 11 राजनीतिक दलों के गठबंधन का नेतृत्व कर रही जमात-ए-इस्लामी, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के नेतृत्व वाले गठबंधन की मुख्य प्रतिद्वंद्वी के रूप में उभरी है। अल्पसंख्यकों को लेकर जताई जा रही आशंकाओं को दूर करते हुए बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख ने किसी भी प्रकार के भेदभाव को खारिज कर दिया।

उनका धर्म कोई भी हो, सभी बांग्लादेशी नागरिक हैं-रहमान

उन्होंने अल्पसंख्यकों के मुद्दे पर कहा, 'उनका धर्म कोई भी हो, वे सभी बांग्लादेशी नागरिक हैं। मेरे देश में कोई भी दूसरे दर्जे का नागरिक नहीं है। मैं किसी को भी अल्पसंख्यक नहीं मानता। हम सभी बांग्लादेशी हैं, और हर कोई प्रथम श्रेणी का नागरिक है। हम अल्पसंख्यक या बहुसंख्यक होने के आधार पर विभाजन का समर्थन नहीं करते।’ उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि प्रगति वास्तविक समावेशन पर निर्भर करती है।

'समावेश के बिना हम प्रगति नहीं कर सकते'

शफीकुर रहमान ने कहा, 'समावेश के बिना हम एक देश के रूप में प्रगति नहीं कर सकते। लेकिन, समावेश का अर्थ लोगों को विभाजित करना नहीं है। इसका अर्थ यह स्वीकार करना है कि हम सभी सबसे पहले बांग्लादेशी हैं।’बांग्लादेश में हिंदू सबसे बड़ा धार्मिक अल्पसंख्यक समूह हैं, जो कुल जनसंख्या का लगभग आठ प्रतिशत हैं।

Alok Rao
आलोक कुमार रावauthor

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

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