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अंतरिक्ष से सुनीता विलियम्स ने की प्रेस कॉफ्रेंस, मीडिया से बोलीं- 'यह मेरी पसंदीदा जगह'

Astronauts Sunita Williams: अंतरिक्ष में फंसी सुनीता विलियम्स बौर बुच विल्मोर ने अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन से प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मीडिया से बातचीत की है।

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अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर।

Astronauts Sunita Williams: अंतरिक्ष में फंसी सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर ने अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन से प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मीडिया से बातचीत की है। इस दौरान उन्होंने कई सवालों के जवाब दिए। सुनीता विलियम्स ने कहा, मुझे स्पेस में रहना बहुत पसंद है और यह मेरी पसंदीदा जगहों में से एक है। इस दौरान दोनों अंतरिक्ष यात्रियों ने कहा, हमारे बिना बोइंग के स्टारलाइन को वापस धरती पर जाते देखना, हमारे लिए काफी दुखद था।

बुच विल्मोर ने कहा, हम इसे हमारे बिना जाते हुए नहीं देखना चाहते थे, लेकिन यही होना था। इसको हमारे बिना ही जाना था। सुनीता विलियम्स ने कहा, अब हमें अगले मौके की तरफ देखना चाहिए।

यह मेरी खुशी की जगह

सुनीता विलियम्स ने कहा, यह मेरी खुशी की जगह है। मुझे अंतरिक्ष में रहना पसंद है। मैं अपनी मां के साथ कीमती समय बिताने का अवसर खाने के कारण कुछ समय के लिए परेशान हो गई थी। हालांकि, हम टेस्टर हैं और यही हमारा काम है। उन्होंने कहा, एक ही मिशन पर दो अलग-अलग अंतरिक्ष यान उड़ाने को लेकर हम उत्साहित हैं। हम स्टारलाइन को पूरा करना चाहते थे और इसे वापस अपने देश में उतारना चाहते थे, लेकिन अअब अगले अवसर की तलाश करनी होगी।

मौजूदा क्रू का हिस्सा बनने के लिए उत्सुक

सुनीता विलियम्स ने कहा, हम यहां आने और यहां मौजूद क्रू का हिस्सा बनने के लिए उत्सुक हैं। हम अभियान 71 का हिस्सा रहे हैं। वे बहुत अच्छे लोग हैं और हमने बस इसमें शामिल होने और जो कुछ भी कर सकते हैं, करने की कोशिश की है। हम निक और एलेक्स के अभियान 72 के हिस्से के रूप में वहां पहुंचने का इंतज़ार कर रहे हैं।

अगले साल तक हो पाएगी वापसी

बता दें, सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर बोइंग के स्टारलाइनर से अंतरिक्ष की यात्रा पर गए थे। हालांकि, स्टारलाइनर में तकनीकी खराबी आने के कारण दोनों इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में ही फंस गए। बीते दिनों, बोइंग के स्टारलाइनर को बिना क्रू के धरती पर लैंड कराया गया। अब नासा ने सुनीता विलियम्स और विल्मोर की वापसी की योजना तैयार की है। दोनों क्रू9 मिशन का हिस्सा होंगे और 2025 में फरवरी के महीने में धरती पर वापस आएंगे।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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