एक तरफ चीन से बेहतर रिश्ते की बात करता है, सांस्कृतिक संबंधों की दुहाई देता है। लेकिन दूसरी तरफ नापाक चाल भी चलता है। जिस तरह से लद्दाख, उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश में वो घुसपैठ की कोशिश करता है, वो इस बात की तरफ इशारा करता है कि नीयत उसकी ठीक नहीं। हाल ही में अरुणाचल में तवांग इलाके में घुसपैठ की कोशिश की थी। ये बात अलग है कि भारतीय फौज ने उस कोशिश को नाकाम कर दिया। अब अरुणाचल प्रदेश के मुद्दे पर अमेरिकी सीनेट ने असाधारण प्रस्ताव पेश किया है। जिसमें अरुणाचल प्रदेश को भारत का अभिन्न अंग माना गया है। खास बात यह है कि इस प्रस्ताव को पेश करने वाले सीनेटर्स का दोनों दलों से संबंध है।
सीनेटर्स ने पेश किया प्रस्ताव
तीन शक्तिशाली सीनेटरों ने संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएस) सीनेट में गुरुवार को एक प्रस्ताव पेश किया जिसमें अरुणाचल प्रदेश को भारत के अभिन्न अंग के रूप में भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीयत अखंडता के समर्थन का जिक्र है। वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) और उसके अन्य उकसावों पर यथास्थिति को बदलने के लिए सैन्य बल के उपयोग के लिए चीन की निंदा करता है, और इसके खिलाफ खुद का बचाव करने के लिए उठाए गए कदमों के लिए भारत सरकार की सराहना करता है।
अरुणाचल में विकास कार्यों की सराहना
यह प्रस्ताव जेफ मार्कले और बिल हैगर्टी द्वारा पेश किया गया और जॉन कॉर्निन ने इसका समर्थन किया। प्रस्ताव में भारत के रक्षा आधुनिकीकरण और विविधीकरण का भी समर्थन करने के साथ अरुणाचल में भारत के विकास प्रयासों की सराहना है। खासतौर से सीमा के बुनियादी ढांचे में सुधार शामिल है। प्रस्ताव में इस बात का भी जिक्र है कि इस क्षेत्र में अमेरिकी सहायता को और बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। अरूणाचल के लिए अपनी सहायता बढ़ाएं, मत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों (आईसीईटी) पर हाल की पहल सहित अमेरिका-भारत द्विपक्षीय साझेदारी के लिए समर्थन भी जताया।
