Omicron: 'यूरोप में आने वाला है एक और तूफान', WHO ने चेताया, कहा- रहना होगा तैयार

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Dec 22, 2021, 07:14 AM IST

दुनिया के विभिन्‍न देशों में कोरोना वायरस के ओमिक्रोन वैरिएंट को लेकर डब्‍ल्‍यूएचओ ने चेताया है और कहा कि यूरोप में यह एक और तूफान की वजह बन सकता है। WHO के शीर्ष अधिकारी ने इसे लेकर विभिन्‍न देशों की सरकारों से पूरी तरह तैयार रहने के लिए भी कहा है।

Omicron: 'यूरोप में आने वाला है एक और तूफान', WHO ने चेताया, कहा- रहना होगा तैयार
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वियना : कोरोना वायरस के वैरिएंट ओमिक्रोन को लेकर दुनियाभर में चिंता के बीच विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन (WHO) ने चेताया है कि यह यूरोप में एक और तूफान की वजह बन सकता है। वैश्विक स्‍वास्‍थ्‍य संस्‍था के शीर्ष अधिकारियों का कहना है कि ओमिक्रोन पहले ही कई देशों में हावी हो चुका है और अगले कुछ समय में यह यूरोप में महामारी के मामलों में 'बड़ी' बढ़ोतरी का कारण बन सकता है, जिसके लिए तैयार रहने की जरूरत है।

ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना में WHO के स्‍थानीय निदेशक डॉक्‍टर हैंस क्‍लूज ने मंगलवार को एक संवाददाता सम्‍मेलन में कहा, 'हम एक और तूफान को आते हुए देख सकते हैं। ओमीक्रोन पहले ही कई देशों में हावी हो चुका है और अगले कुछ ही सप्ताह में यह क्षेत्र के और अधिक देशों में हावी हो जाएगा, जिसके चलते पहले ही बुरे दौर से गुजर रही स्वास्थ्य व्यवस्थाएं और प्रभावित होंगी।'

'ओमिक्रोन को लेकर रहना होगा तैयार'

WHO के शीर्ष अधिकारी ने विभिन्‍न देशों की सरकारों से ओमिक्रोन के चलते पूरे महाद्वीप में कोरोना वायरस के मामलों में 'महत्वपूर्ण वृद्धि' के लिए तैयार रहने को कहा। डॉक्टर हैंस क्लूज के मुताबिक, कोविड का वैरिएंट ओमिक्रोन वैरिएंट WHO के यूरोपीय क्षेत्र के तकरीबन 38 सदस्य देशों में पाया जा चुका है। ब्रिटेन, डेनमार्क और पुर्तगाल में पहले ही इसके रिकॉर्ड मामले सामने आ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि बीते सप्ताह क्षेत्र में कोविड-19 के 26 लाख अतिरिक्त मामले सामने आए हैं, जबकि इस घातक संक्रामक रोग से 27 हजार लोगों की जान गई है। हालांकि इनमें कोविड के सभी वैरिएंट्स के मामले शामिल हैं। लेकिन चिंता की बात यह है कि ये संख्या पिछले साल इसी अवधि की तुलना में 40 प्रतिशत से अधिक है। उन्‍होंने चेताया कि कोविड के बढ़ते मामलों के परिणामस्‍वरूप और अधिक लोगों को अस्पतालों में भर्ती कराने की नौबत आ सकता है, जिससे पहले ही दबाव झेल रही स्‍वास्‍थ्‍य व्‍यवस्‍था पर और बोझ पड़ सकता है।

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