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इस वजह से रूस-यूक्रेन युद्ध में आ सकता है नया मोड़, अमेरिका-NATO ने की बड़ी भूल !

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Apr 8, 2023, 08:18 AM IST

Pentagon Secret Plan: अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने सीक्रेट प्लान लीक होने के पीछे रूस की साजिश का आरोप लगाया है। कहा गया है कि रूस इन दस्तावेजों का इस्तेमाल दुष्प्रचार के लिए कर रहा है। यह दस्तावेज ऐसे समय पर लीक हुए हैं, जब यूक्रेन बड़े ऑपरेशन की तैयार कर रहा है।

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अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन

Photo : AP

US Nato Secret Document: यूक्रेन के खिलाफ जंग लड़ रहे रूस को हराने के लिए अमेरिका और नाटो ने एक विस्तृत योजना तैयार की थी। इसमें यूक्रेनी सेना को हथियारों व सैन्य मदद के साथ ही साथ यूक्रेनी सैनिकों का ट्रेनिंग प्रोग्राम भी शामिल था। ये सभी बातें सोशल मीडिया पर लीक हुए अमेरिकी खुफिया दस्तावेजों में सामने आई हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सोशल मीडिया पर रूस और यूक्रेन जंग को लेकर अमेरिका का सीक्रेट प्लान सोशल मीडिया पर लीक हो गया है।

इन दस्तावेजों के सामने आने के बाद अमेरिकी रक्षा मुख्यालय पेंटागन में हड़कंप की खबर है। वहीं दूसरी तरफ व्हाइट हाउस ने भी इस मामले में जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने इन दस्तावेजों के लीक होने के पीछे रूस की साजिश करार दिया है। कहा गया है कि रूस इन दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ कर अमेरिका के खिलाफ दुष्प्रचार कर रहा है।

पांच सप्ताह पुराने हैं दस्तावेज

अमेरिका और नाटो की ओर से रूस के खिलाफ तैयार किया गया यह सीक्रेट प्लान ज्यादा पुराना नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिकि, दस्तावेज करीब पांच सप्ताह पुराने हैं और इसमें सबसे ताजे दस्तावेज एक मार्च के हैं। इन दस्तावेजों में यूक्रेनी सेना को भेजी जाने वाली मदद और उसके व्यय का भी जिक्र किया गया है।

12 यूक्रेनी लड़ाकू ब्रिगेड के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम

दस्तावेज में सामने आया है कि नाटो और अमेरिकी सेना मिलकर 12 यूक्रेनी लड़ाकू ब्रिगेड को ट्रेनिंग देने वाली थीं। इसमें नौ ब्रिगेड की ट्रेनिंग चल रही थी, जिसे 30 अप्रैल तक पूरा हो जाना था। इन दस्तावेजों में रूस को प्रदान किए गए हथियारों का भी जिक्र किया गया है और कहा गया है कि हिमार्स रॉकेट ने रूस को काफी अधिक नुकसान पहुंचाया है।

रूस को हराने के लिए क्या- क्या जरूरत

दस्तावेज में कहा गया है कि यूक्रेन के खिलाफ जंग लड़ रहे रूस को खदेड़ने के लिए 250 टैंकों और 350 से अधिक मैकेनाइज्ड व्हीकल्स की जरूरत पड़ेगी। इसके अलावा सीक्रेट दस्तावेज में अगले महीने या उसके बाद रूसी हमले के खतरे का भी जिक्र किया गया है।

जंग में आ सकता है नया मोड़

बता दें, ये दस्तावेज ऐसे समय में लीक हुए हैं, जब यूक्रेनी सेना पूर्वी और दक्षिणी भाग में अपने क्षेत्रों को रूस से मुक्त कराने के लिए बड़े सैन्य अभियान की तैयारी कर रही है। ऐसे में इन दस्तावेजों के सामने आने से तैयारियां सार्वजनिक हो गई हैं, जिसका फायदा सीधे तौर पर रूस को पहुंचेगा।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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