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अमेरिका के आगे ईरान की एयर पावर कितनी मजबूत? जंग हुई तो आसमान में कौन बनेगा पहलवान, जानें

America vs Iran Power: संयुक्त राज्य अमेरिका टॉप-टियर पावर इंडेक्स के साथ दुनिया की सबसे शक्तिशाली सैन्य स्थिति रखता है। इसके विपरीत, ईरान एक मजबूत क्षेत्रीय शक्ति है, जो वर्तमान में 2025 के सैन्य शक्ति इंडेक्स में विश्व स्तर पर 16वें स्थान पर है। अमेरिका के पास अपनी मिलिट्री की सभी ब्रांच में कुल मिलाकर 13,000 से ज्यादा एयरक्राफ्ट हैं।

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अमेरिका के आगे ईरान की एयर पावर कितनी मजबूत?

America vs Iran Air Power Comparison: अमेरिका के पास 13,000 से ज्यादा एयरक्राफ्ट और स्टील्थ जेट के साथ हवाई ताकत (Air Power) में जबरदस्त बढ़त है। वहीं, ईरान मुकाबला करने के लिए ड्रोन और S-300 मिसाइलों का एक क्षेत्रीय 'एयर शील्ड' बनाकर खतरों को रोकने की कोशिश करता है।

ग्लोबल एयर पावर रैंकिंग

संयुक्त राज्य अमेरिका टॉप-टियर पावर इंडेक्स के साथ दुनिया की सबसे शक्तिशाली सैन्य स्थिति रखता है। इसके विपरीत, ईरान एक मजबूत क्षेत्रीय शक्ति है, जो वर्तमान में 2025 के सैन्य शक्ति इंडेक्स में विश्व स्तर पर 16वें स्थान पर है। अमेरिका के पास अपनी मिलिट्री की सभी ब्रांच में कुल मिलाकर 13,000 से ज्यादा एयरक्राफ्ट हैं। ईरान का कुल एयर फ्लीट काफी छोटा है, जिसका अनुमान 2025 की शुरुआत में लगभग 551 से 561 एयरक्राफ्ट का था।

एडवांस्ड स्टील्थ vs पुराने जेट

अमेरिकी हवाई ताकत F-35 लाइटनिंग II और F-22 रैप्टर जैसे पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट्स से तय होती है। ईरान की वायु सेना मुख्य रूप से पुराने तीसरी पीढ़ी के विमानों का संचालन करती है, जिसमें F-4 फैंटम और MiG-29 शामिल हैं।

हमले और जवाबी हमले की क्षमताएं

अमेरिका के पास हाई-इंटेंसिटी लड़ाई के लिए लगभग 1,800 खास फाइटर और इंटरसेप्टर एयरक्राफ्ट हैं। ईरान के पास लगभग 188 हंटिंग या इंटरसेप्टर एयरक्राफ्ट हैं, जिनमें से कई पुराने मॉडल हैं जिन्हें घरेलू अपग्रेड के जरिए मेंटेन किया जाता है।

भारी बॉम्बर की भूमिका

अमेरिका B-2 स्पिरिट और B-52 स्ट्रैटोफोर्ट्रेस जैसे बड़े बॉम्बर के साथ एक अनोखा रणनीतिक फायदा बनाए रखता है। ईरान के पास ऐसा कोई लॉन्ग-रेंज स्ट्रेटेजिक बॉम्बर फ्लीट नहीं है, बल्कि वह छोटे रेंज के क्षेत्रीय ऑपरेशन पर ध्यान केंद्रित करता है।

ईरान का असममित ड्रोन खतरा

अपने पुराने पड़ चुके विमानों की कमी को पूरा करने के लिए, ईरान ने एक महत्वाकांक्षी ड्रोन कार्यक्रम में भारी निवेश किया है। अमेरिकी कमांडरों ने कहा है कि ईरान के UAV, जैसे कि शाहेद-136, पारंपरिक हवाई श्रेष्ठता के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करते हैं।

ईरान अपने एयरस्पेस की सुरक्षा के लिए अपने 'एयर शील्ड' पर निर्भर है, जिसमें रूस में बना S-300PMU-2 मिसाइल सिस्टम शामिल है। यह सिस्टम एक साथ कई एयरक्राफ्ट को ट्रैक कर सकता है और हवाई घुसपैठ के खिलाफ एक मुख्य रुकावट का काम करता है।

नई अमेरिकी टेक्नोलॉजी, जैसे कि F-15E स्ट्राइक ईगल्स पर EPAWSS सिस्टम, एक 'इलेक्ट्रॉनिक घोस्ट' की तरह काम करती है। यह अमेरिकी जेट्स को सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान S-300 जैसे रडार सिस्टम को अंधा करने में मदद करती है।

रक्षा बजट और निवेश

2025 के लिए अमेरिकी मिलिट्री बजट बहुत बड़ा है, जो लगभग $895 बिलियन है। ईरान का रक्षा खर्च काफी कम है, जिसका अनुमान लगभग $15.45 बिलियन है, जिससे उसके बेड़े को आधुनिक बनाने की क्षमता सीमित हो जाती है।

अमेरिका को 750 से ज्यादा विदेशी बेस और एडवांस्ड हवाई रिफ्यूलिंग टैंकरों के ग्लोबल नेटवर्क से फायदा होता है। ईरान किसी भी टकराव की कीमत बढ़ाने के लिए अपनी सीमाओं के अंदर रक्षात्मक गहराई और एरिया-डिनायल रणनीति पर ध्यान देता है।

Nitin Arora
नितिन अरोड़ाauthor

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदेश की बड़ी घटनाओं और समसामयिक मुद्दों को गहराई से समझकर उन्हें सटीक और सरल भाषा में प्रस्तुत करने में माहिर हैं। उन्होंने अपने करियर में लगातार करंट अफेयर्स, पॉलिटिकल डेवलपमेंट्स, डिप्लोमैटिक घटनाएं और डिफेंस सेक्टर से जुड़े विषयों पर प्रभावशाली कॉन्टेंट तैयार किया है और अबतक 6 हजार से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। विभिन्न टॉपिक्स पर एक्सप्लेनेर, डेटा-आधारित रिपोर्ट्स और विश्लेषणात्मक कॉपी लिखने में उनकी मजबूत पकड़ है।

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