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महिला शिक्षा और गर्भनिरोधक गोलियों के बाद तालिबान का नया फरमान, क्या अब औरतों के खाने पर भी लगाएगा प्रतिबंध?

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Apr 11, 2023, 07:37 AM IST

Afghanistan News: तालिबान के हेरात प्रांत में महिलाओंं पर खुले लॉन वाले रेस्टोरेंट और पार्कों में जाने पर रोक लगा दी गई है। सरकार की ओर से कहा गया है कि इन जगहों पर महिलाएं हिजाब नहीं पहनती हैं। इसको लेकर कई शिकायतें आ रही थीं।

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तालिबान सरकार ने महिलाओंं के खुले लॉन वाले रेस्टोरेंट में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। (फाइल फोटो)

Photo : AP

Taliban bans women from restaurants: अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में आने के बाद से महिला अधिकारों पर कई पाबंदियां लगाई गई हैं। उन्हें पढ़ने-लिखने यहां तक कि बाहर निकलने से भी रोका जा रहा है। अब सामने आया है कि तालिबान सरकार ने महिलाओं के खास तरह के रेस्टोरेंट जाने पर भी रोक लगा दी है।

तालिबान सरकार के नए फरमान के मुताबिक, महिलाएं परिवार के साथ या अकेले खुले लॉन वाले रेस्टोरेंट या पार्कों में नहीं जा सकती हैं। यह प्रतिबंध केवल हेरात प्रांत में लागू किया गया है। तालिबान सरकार के अधिकारी का कहना है कि इस्लामिक गुरुओं और लोगों की शिकायत के बाद महिलाओं पर इस तरह का प्रतिबंध लागू किया गया है।

नए फरमान में क्या कहा गया

तालिबान की ओर से जारी नए फरमान में कहा गया है कि हेरात प्रांत के खुले लॉन वाले रेस्टोरेंट या फिर पार्कों में महिलाएं नहीं जा सकती हैं। तालिबान सरकार का कहना है कि महिलाओं के ऐसी जगहों में प्रवेश को लेकर कई शिकायतें आ रही थीं। इनमें कहा गया था कि ऐसे स्थानों पर महिलाएं और पुरुष एक साथ होते हैं और अमूमन महिलाएं हिजाब नहीं पहनती हैं। इसलिए यह प्रतिबंध लागू किया जा रहा है।

इससे पहले भी लगे हैं कई प्रतिबंध

अफगानिस्तान में सत्ता में आने के बाद से तालिबान सरकार धीरे-धीरे महिलाओं पर कई तरह के प्रतिबंध लागू कर रही है। यहां पूरी तरह से इस्लामिक शिक्षाओं को लागू किया जा रहा है। तालिबान ने यहां पर महिलाओं द्वारा गर्भनिरोधक गोलियों के इस्तेमाल पर भी रोक लगा दी गई है। तालिबान सरकार का मानना है कि इस तरह की गोलियों का प्रयोग मुस्लिम आबादी को रोकने के लिए किया जा रहा है। ऐसे में अधिकारी घर-घर जाकर इन गोलियों का इस्तेमाल न करने की सलाह दे रहे हैं, यहां तक कि दुकानदारों को भी इस तरह की गोलियों को बेचने से रोका जा रहा है। इसके अलावा विश्वविद्यालय में पढ़ने वाली छात्राओं को परीक्षा देने पर भी रोक लगा दी गई है। यहां तक कि महिलाओं के मीडिया सेक्टर में काम करने पर भी यहां प्रतिबंध लागू है।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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