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Bangladesh: पूर्व पीएम शेख हसीना की सजा-ए-मौत का लिखित फैसला सार्वजनिक, 457 पन्नों में दर्ज है पूरी अदालती कहानी

ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष जस्टिस एमडी गोलाम मोर्तुजा मजुमदार ने फैसले में कहा कि हसीना को उकसावे, हत्या के आदेश देने और हिंसा रोकने में विफल रहने के तीन मामलों में दोषी पाया गया। भारत में निर्वासन में रह रहीं शेख हसीना पहले ही इस फैसले को पक्षपातपूर्ण और राजनीति से प्रेरित बता चुकी हैं।

Bangladesh violence

शेख हसीना की फांसी का फैसला सार्वजनिक।

बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (आईसीटी) ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को दी गई मौत की सजा का विस्तृत लिखित आदेश जारी कर दिया है। अदालत का यह फैसला 457 पन्नों में फैला हुआ है, जिसमें मामले से जुड़े सभी तथ्यों, गवाहियों और कानूनी तर्कों को शामिल किया गया है।

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, ट्रिब्यूनल ने जुलाई-अगस्त 2024 में हुए ‘एंटी-डिस्क्रिमिनेशन स्टूडेंट मूवमेंट’ के दौरान हुई हिंसा को मानवता के खिलाफ अपराध करार दिया है। ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने उस दौर की घटनाओं को संगठित और सुनियोजित दमनात्मक कार्रवाई माना। तीन जजों की पीठ वाले ट्रिब्यूनल-1 ने 17 नवंबर 2025 को मौखिक रूप से फैसला सुनाया था, जबकि अब इसका पूरा दस्तावेज आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किया गया है।

इन आरोपों में दोषी ठहराईं गईं शेख हसीना और असदुज्जमां खान कमाल

अदालत ने शेख हसीना और असदुज्जमां खान कमाल को दो प्रमुख आरोपों में दोषी ठहराया। पहला आरोप तीन घटनाओं पर आधारित है। इसमें 14 जुलाई 2024 को गणभवन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रदर्शनकारियों को ‘रजाकार’ कहकर कथित रूप से भड़काने, ढाका विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति मक्सूद कमाल से बातचीत में छात्रों को फांसी देने का निर्देश देने, और रंगपुर में छात्र अबू सईद की पुलिस फायरिंग में हुई मौत को शामिल किया गया। इन मामलों में दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।

दूसरा आरोप भी तीन अलग-अलग घटनाओं से जुड़ा है। इनमें 18 जुलाई 2024 को पूर्व ढाका साउथ सिटी कॉर्पोरेशन मेयर फजले नूर तापोश और जसद अध्यक्ष हसनुल हक इनु के साथ फोन पर बातचीत में ड्रोन के जरिए प्रदर्शनकारियों की पहचान कर हेलिकॉप्टर से घातक हथियारों के इस्तेमाल का कथित आदेश देना और हिंसा रोकने में नाकामी, 5 अगस्त 2024 को चनखरपुल में पुलिस फायरिंग से छह प्रदर्शनकारियों की मौत, तथा सावर के आशुलिया इलाके में छह लोगों की हत्या कर शव जलाने की घटना शामिल है। इन आरोपों में अदालत ने दोनों को फांसी की सजा दी।

सभी संपत्तियों की भी जब्ती के आदेश

ट्रिब्यूनल ने यह भी आदेश दिया कि शेख हसीना और कमाल की सभी संपत्तियां जब्त कर जुलाई की हिंसा के पीड़ितों में बांटी जाएं। मामले में सरकारी गवाह बने पूर्व पुलिस महानिरीक्षक चौधरी अब्दुल्लाह अल-मामुन को दोनों आरोपों में पांच वर्ष की कैद की सजा सुनाई गई है।

वर्तमान में भारत में हैं शेख हसीना

ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष जस्टिस एमडी गोलाम मोर्तुजा मजुमदार ने फैसले में कहा कि हसीना को उकसावे, हत्या के आदेश देने और हिंसा रोकने में विफल रहने के तीन मामलों में दोषी पाया गया। भारत में निर्वासन में रह रहीं शेख हसीना पहले ही इस फैसले को पक्षपातपूर्ण और राजनीति से प्रेरित बता चुकी हैं। बांग्लादेश सरकार ने भारत से शेख हसीना और असदुज्जमां खान कमाल के प्रत्यर्पण की औपचारिक मांग की है। वहीं, एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच ने इस सजा की आलोचना करते हुए इसे मानवाधिकारों के खिलाफ बताया है और कहा है कि दोनों की अनुपस्थिति में हुआ ट्रायल निष्पक्ष नहीं था। संयुक्त राष्ट्र ने भी मृत्युदंड का विरोध करते हुए पीड़ितों को न्याय दिलाने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

शिव शुक्ला
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शिव शुक्ला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में कार्यरत एक अनुभवी न्यूज राइटर हैं। छह वर्षों के पेशेवर अनुभव के साथ वे डिजिटल पत्रकारिता में तेज, सटीक और प्रभ... और देखें

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