पाकिस्तान स्थित मानवाधिकार संगठन बलूच नेशनल मूवमेंट के मानवाधिकार विभाग 'पांक' ने सोमवार को एक गहन रिपोर्ट जारी की है, जिसमें 2025 की शुरुआत से अब तक बलूचिस्तान में सुरक्षा बलों और कथित रूप से राज्य समर्थित डेथ स्क्वॉड्स द्वारा 785 लोगों को जबरन गायब किए जाने और 121 की हत्या किए जाने का खुलासा किया गया है। यह आंकड़ा एक गंभीर मानवाधिकार संकट की ओर इशारा करता है, जो क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए बड़ी चुनौती है।
हर दिन चार लोग जबरन लापता
रिपोर्ट के अनुसार, बलूचिस्तान में औसतन हर दिन चार लोग जबरन लापता होते हैं और एक व्यक्ति की हत्या की जाती है। पीड़ितों में छात्र, पत्रकार और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी शामिल हैं, जिनमें से कई को देश के बड़े शहरों जैसे कराची और इस्लामाबाद से भी अगवा किया गया है। यह स्पष्ट करता है कि उत्पीड़न का दायरा केवल बलूचिस्तान तक सीमित नहीं है, बल्कि पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में भी इसका प्रभाव महसूस किया जा रहा है।
दिल जान बलूच की हत्या
विशेष रूप से 2 अगस्त को दिल जान बलूच की हत्या का मामला सामने आया, जिन्हें 22 जुलाई को बलूचिस्तान के केच जिले से जबरन गायब किया गया था। इसके अतिरिक्त, दिसंबर 2024 से लापता इनायत खैर मोहम्मद की भी मृत्यु की पुष्टि ह्यूमन राइट्स काउंसिल ऑफ बलूचिस्तान (एचआरसीबी) ने की है।
किस पर है आरोप
एचआरसीबी ने बताया कि ये डेथ स्क्वॉड्स पूरी तरह दंडमुक्त हैं और कथित तौर पर राज्य के हितों के लिए काम कर रहे हैं। यह एक चिंताजनक स्थिति है, क्योंकि यह दंडहीनता और गैरकानूनी गतिविधियों को बढ़ावा देती है, जिससे बलूचिस्तान में मानवाधिकारों का संरक्षण और न्याय की संभावना कमजोर होती है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि ये जबरन गायबियां और हत्याएं राज्य की नीति की आलोचना करने वाली आवाजों को दबाने के लिए एक योजनाबद्ध रणनीति का हिस्सा हैं। यह न केवल न्याय व्यवस्था और निगरानी तंत्र को दरकिनार करता है, बल्कि पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संधियों, विशेष रूप से जीवन के अधिकार, मनमानी गिरफ्तारी से सुरक्षा और गैर-न्यायिक हत्या पर रोक के प्रावधानों का भी उल्लंघन करता है। मानवाधिकार संगठन इस गंभीर समस्या पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल ध्यान देने और बलूचिस्तान में स्वतंत्र और प्रभावी न्यायिक तंत्र स्थापित कर जवाबदेही सुनिश्चित करने की अपील कर रहे हैं। केवल इसी माध्यम से बलूचिस्तान में व्याप्त आतंक और मानवाधिकार उल्लंघनों को रोकना संभव हो सकेगा।
