Emotional viral Story: बिहार के गोपालगंज जिले के रामनगर गांव की एक छोटी बच्ची इन दिनों लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रही है। उसकी कहानी सुनकर हर कोई भावुक हो जाता है। इस बच्ची के पिता नहीं हैं और घर की सारी जिम्मेदारी उसकी मां पर है। मां दिन भर मजदूरी करके किसी तरह परिवार का खर्च चलाती है। बच्ची के पैरों में समस्या है, जिसकी वजह से वह ठीक से चल नहीं पाती। उसे व्हीलचेयर की सख्त जरूरत थी, लेकिन आर्थिक हालत इतनी कमजोर है कि परिवार इसे खरीद नहीं सकता था। इसके बावजूद बच्ची ने पढ़ाई करने का अपना सपना नहीं छोड़ा है।
हाथ में किताबें लिए धीरे-धीरे पहुंचती है स्कूल
उसका स्कूल घर से लगभग दो किलोमीटर दूर है। रोज वह बड़ी मुश्किल से स्कूल पहुंचती है। कभी वह अपने पैरों को घसीटते हुए आगे बढ़ती है, तो कभी थोड़ी देर रुककर फिर चलने लगती है। हाथ में किताबें लिए वह धीरे-धीरे स्कूल तक पहुंचती है। रास्ता लंबा और थकाने वाला जरूर होता है, लेकिन पढ़ाई के प्रति उसका उत्साह कभी कम नहीं होता। गांव के लोग जब उसे इस तरह संघर्ष करते देखते हैं तो उनका दिल भर आता है। सभी कहते हैं कि इतनी छोटी उम्र में इतनी मजबूत इच्छाशक्ति बहुत कम देखने को मिलती है। बच्ची खुद भी समझती है कि पढ़ाई ही उसे एक बेहतर जिंदगी दे सकती है, इसलिए वह किसी भी हालत में स्कूल जाना नहीं छोड़ना चाहती।
इस बच्ची की कहानी सोशल मीडिया पर वायरल
परिवार ने कई बार सरकारी योजनाओं के तहत व्हीलचेयर के लिए आवेदन किया था। मां ने कई दफ्तरों के चक्कर भी लगाए, फॉर्म भरे और जरूरी कागजात भी जमा किए। जिसके बाद गोपालगंज के जिलाधिकारी ने हाल ही में इस लड़की (सोनी कुमारी) को ट्राई साइकिल दे दी है। अब उसकी स्कूल यात्रा आसान हो गई है। अब इस बच्ची की कहानी सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रही है। लोग वीडियो देखकर भावुक हो रहे हैं और उसकी मदद की अपील कर रहे हैं। अगर उसे एक व्हीलचेयर मिल जाए तो वह आसानी से स्कूल जा सकेगी और अपनी पढ़ाई बिना किसी परेशानी के जारी रख पाएगी। यह कहानी हमें याद दिलाती है कि हौसला और मेहनत हो तो मुश्किलें भी छोटी लगने लगती हैं।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया पोस्ट पर आधारित है। टाइम्स नाउ नवभारत किसी भी प्रकार के दावे की पुष्टि नहीं करता है।
