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Doge Meme Dog: डोगे मीम वाले कुत्ते काबोसु का निधन, ल्यूकेमिया और लीवर के बीमारी से था ग्रसित

सोशल मीडिया पर डोगे मीम वाले कुत्ते का निधन हो गया। काबोसु को ल्यूकेमिया और लीवर की बीमारी थी। उसने दुनियाभर में जो अपनी छाप छोड़ी है, वो अतुलनीय है।

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डोगे मीम वाले कुत्ते काबोसु का निधन (फोटो साभार - सोशल मीडिया)

Doge Meme Kabosu Died: दुनिया में कुछ ऐसी चीजें वायरल होती हैं, जो दशकों तक अपनी छाप और स्थान दोनों बरकरार रखती हैं। ऐसी चीजें सोशल मीडिया के माध्यम से आप आसानी से देख सकते हैं, जहां नई-नई चीजें वायरल होती रहती हैं। वायरल होने में सबसे अधिक मीम्स का नाम आता है, जो कई बार काफी पुराने होने के बाद नए होने का अहसास दिलाते रहते हैं। इन्हीं में से एक कुत्ता भी हैं, जिसका मीम्स काफी वायरल हुआ है।

देखा जाए तो ये एक दशक से लंबा समय तक चलने वाला मीम रहा है। इसने सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियां बटोरी। लेकिन बड़े दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि अब ये कुत्ता हमारे बीच नहीं रहा। डोगे मीम से वायरल हुए इस कुत्ते से आप सभी वाकिफ होंगे। इसका नाम काबोसु था, जिसने आज अंतिम सांस ली। कुत्ते काफी लंबे समय से एक बीमारी से ग्रसित था, जिसके कारण अब वह दुनिया में नहीं है। उसने दुनियाभर में दो अपनी छाप छोड़ी है, वो अतुलनीय है।

Dogecoin Dog Kabosu

डोगे मीम वाले कुत्ते काबोसु का निधन

ल्यूकेमिया नामक बीमारी से था पीड़ित

इसी के नाम पर क्रिप्टोकरेंसी डोगेक्वाइन का नाम भी रखा गया था। लेकिन काबोसु के निधन ने सभी को दुखी कर दिया है। कुत्ते के मालिक का कहना है कि उसे ल्यूकेमिया नामक बीमारी थी और उसके लीवर में भी समस्या थी, जिससे उसकी तबीयत काफी खराब चल रही थी। बीती रात उसने चावल खाया और पानी पिया था। काबोसु के मालिक की ओर से 26 मई को दोपहर 1 बजे से शाम 4 बजे तक नरीता शहर के कोत्सु नो मोरी में काबोसु के लिए विदाई समारोह का आयोजन किया गया है।

Kishan Gupta
किशन गुप्ताauthor

<p>देश की धार्मिक राजधानी काशी में जन्म लिया और घाटों पर खेल-कूदकर बड़ा हुआ। साल 2019 में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में मास्टर्स डिग्री ली। यही से पत्रकारिता की शुरुआत भी हुई। इसी साल जुलाई में हैदराबाद स्थित रामोजी रॉव के स्वामित्व वाले ईटीवी भारत से करियर की शुरुआत हुई। बतौर ट्रेनी यहां एक साल से अधिक का समय बिताया। यह पहली दफा था, जब घर से दूर निकला था। लेकिन चस्का था तो काम करने, एक अच्छा पत्रकार बनने का। यहां रहकर चंद्रयान - 2 को कवर करने का मौका मिला। इसके बाद राजस्थान में शिक्षक भर्ती को लेकर उम्मीदवारों की ओर से हुए हिंसक विरोध को भी करीब से देखा। इस दौरान पथराव का भी सामना करना पड़ा। लेकिन काम करने का एक जुनून था। यह पहली दफा था, जब मैंने किसी बड़ी न्यूज को कवर किया था। इसके बाद ये सिलसिला चलता गया। कुछ समय ऐसा भी आया, जब होम पेज भी काम करने को मिला। करीब एक साल से अधिक समय बिताने के बाद ईटीवी भारत से अलविदा लिया और अपने गृह जिले में पहुंचा, जहां के एक लोकल चैनल टूडेज इंडिया न्यूज में काम करने का मौका मिला। यहां करीब डेढ़ साल से अधिक का समय बिता, जहां रहकर बनारस के साथ-साथ पूर्वांचल को भी कवर करने का मौका मिला। राजनीति और क्राइम की खबरों में खासा रूचि होने के कारण अक्सर फोकस भी इसी पर रहता था। इस दौरान कोविड के दंश को भी देखा। कोरोना काल का यह वो भयानक मंजर था, जिसकी किसी को आशंका न थी। इस दौरान खबरों के माध्यम से देश के दुख-दर्द को करीब से महसूस करने का मौका मिला। फिर मई 2022 में वनइंडिया ज्वाइन कर ली, यहां से फीचर राइटिंग की शुरुआत करते हुए मैंने ट्रैवेल पर काम करना शुरू किया। ऑफिस बैंगलोर था, तो वहां जाने के लिए काफी सोचना भी पड़ा लेकिन दिमाग में था कि बड़ा कुछ करना है तो देश की आर्थिक राजधानी के लिए निकल पड़ा। यहां काफी कम समय ही बिता, करीब 9 महीने तक काम करने के बाद यहां से अलविदा लिया। फिर समय आया देश के प्रतिष्ठित संस्थान टाइम्स नेटवर्क से जुड़ने का। मार्च 2023 में मैं Timesnowhindi.com के वायरल टीम से जुड़ा। इस बीच तमाम ट्रेंडिंग, वायरल और अजब-गजब जैसी कई खबरें की। बीट अलग होने के कारण थोड़ा चैलेंजिंग था लेकिन उस चैलेंज को पूरा करते हुए और चुनौतियों का सामना करते हुए आज एक साल से ऊपर का समय हो गया है।</p>

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