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Deodorant vs Perfume: एक ही नहीं होते हैं परफ्यूम और डियोडरेंट, खरीदने से पहले फर्क जान लीजिए

  • Authored by: Rohit Ojha
  • Updated May 13, 2024, 11:31 AM IST

Deodorant vs Perfume: आमतौर पर परफ्यूम और डियोडरेंट का इस्तेमाल पार्टी, ऑफिस और समान्य दिनों में भी करते हैं। लेकिन बहुत कम लोगों को ही इस बारे में पता होता है कि परफ्यूम और डियोडरेंट दोनों अलग-अलग होते हैं। दोनों में से किसकी खुशबू देर तक बरकरार रहती है। आप भी जान लीजिए।

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Deodorant vs Perfume

Photo : iStock

Deodorant vs Perfume: गर्मी के मौसम में परफ्यूम और डियोडरेंट का इस्तेमाल बढ़ जाता है। लोग पसीने की बदबू से निजात पाने के लिए यूज करते हैं। आमतौर पर परफ्यूम और डियोडरेंट का इस्तेमाल पार्टी, ऑफिस और समान्य दिनों में भी करते हैं। लेकिन बहुत कम लोगों को ही इस बारे में पता होता है कि परफ्यूम और डियोडरेंट दोनों अलग-अलग होते हैं। ये दोनों ही अलग-अलग प्रोडक्ट हैं। इसलिए अब जब भी आप परफ्यूम और डियोडरेंट खरीदने जाएं, तो सबसे पहले दोनों के अंतर को समझकर ही खरीदारी करें।

परफ्यूम और डियोडरेंट में बड़ा अंतर

परफ्यूम और डियोडरेंट में बड़ा अंतर खुशबू का है। परफ्यूम में परफ्यूम एसेंस फीसदी तक होता है, जिसकी वजह से इसकी खुशबू अधिक देर तक बरकरार रहती है। वहीं, डियोडरेंट में परफ्यूम एसेंस की मात्रा 1-2 फीसदी के बीच होती है। अब चूंकि परफ्यूम में परफ्यूम एसेंस अधिक होता है, तो यह डियोडरेंट के मुकाबले हार्ड होता है। परफ्यूम की खुशबू करीब 12 घंटे तक बरकरार रहती है, लेकिन डियोडरेंट की फ्रेगनेन्स 4 घंटे तक ही बरकरार रहती है।

पसीने में कौन कारगर

डियोडरेंट पसीने में बेहद ही कारगर साबित होता है। क्योंकि इसमें एंटी-पर्सपरेंट नाम का पदार्थ होता है। यह शरीर के पसीने को सोखता है और स्किन को चिपचिपा होने से रोकता है। लेकिन परफ्यूम में सिर्फ खुशबू होती है। यह सिर्फ पसीने के बदबू को दूर कर सकता है।

कीमत में फर्क

डियोडरेंट और परफ्यूम की कीमतों में भी बड़ा अंतर देखने को मिलता है। डियोडरेंट कम दाम पर भी मार्केट में आसानी से मिल जाता है। लेकिन परफ्यूम महंगा होता है। बड़े ब्रॉन्ड के परफ्यूम की कीमत काफी अधिक होती है। परफ्यूम हमेशा बालों और कपड़ों पर ही लगना चाहिए, क्योंकि इसमें बड़ी मात्रा में कॉन्संट्रेट रहता है। इसकी वजह से डायरेक्ट स्किन पर स्प्रे करना नुकसान पहुंचा सकता है। डियोडरेंट में न्संट्रेशन की मात्रा कम होती है।

Rohit Ojha
Rohit Ojhaauthor

<p>रोहित ओझा Timesnowhindi.com में बतौर सीनियर कॉरस्पॉडेंट सितंबर 2023 से काम कर रहे हैं। यहां पर वो बिजेनस और यूटिलिटी की खबरों पर काम करते हैं। मीडिया इंडस्ट्री में पांच साल से अधिक का अनुभव। चुनावी खबरों से शुरू हुआ पत्रकारिता का सफर फिलहाल स्टॉक मार्केट, इकोनॉमी और पर्सनल फाइनेंस की खबरों के साथ जारी है। डेस्क और फील्ड दोनों में ही काम करने का तजुर्बा। टाइम्स नाऊ नवभारत से पहले अलग-अलग मीडिया संस्थानों में अलग-अलग बीट पर काम कर चुके हैं। अमर उजाला, टीवी9 हिंदी, इंडिया टीवी, आज तक जैसे मीडिया संस्थान में अलग-अलग बीट पर काम कर चुके हैं। स्टॉक मार्केट और इकोनॉमी के साथ-साथ देश की सियासी घटनाओं पर लिखने का अनुभव है। 2019 के आम चुनाव से लेकर तमाम विधानसभा की चुनावी खबरों पर काम किया है। 2019 का क्रिकेट वर्ल्ड कप और आईपीएल की खबरों पर भी काम किया है। किस्से-कहानियों में मन लगता है। शारदा यूनिवर्सिटी से मास-कम्युनिकेशन और जर्नलिज्म किया है। गृह जनपद- बक्सर। साहित्य, सियासत और सिनेमा पर लिखना-पढ़ना खूब पसंद है।</p>

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