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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, गाड़ी की नंबर प्लेट छिपाना अपराध नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ट्रैफिक चालान से बचने के लिए वाहन की नंबर प्लेट छिपाना आपराधिक अपराध नहीं है। जानिए कोर्ट ने क्या कहा, पूरा मामला क्या था और इस फैसले का वाहन चालकों पर क्या असर पड़ेगा।

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सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि ट्रैफिक चालान से बचने के लिए वाहन की नंबर प्लेट छिपाना अपने आप में आपराधिक अपराध नहीं माना जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह मोटर वाहन नियमों का उल्लंघन जरूर हो सकता है, लेकिन केवल इसी आधार पर किसी व्यक्ति के खिलाफ धोखाधड़ी का आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया जा सकता।

धोखाधड़ी का केस किया रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने एक व्यक्ति के खिलाफ दर्ज धोखाधड़ी के मामले को रद्द करते हुए यह टिप्पणी की। उस व्यक्ति पर आरोप था कि उसने ट्रैफिक चालान से बचने के लिए अपनी गाड़ी की पिछली नंबर प्लेट को ढक दिया था। अदालत ने कहा कि ऐसे मामले में भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत आपराधिक मुकदमा चलाने का कोई आधार नहीं बनता।

मोटर व्हीकल एक्ट के तहत हो सकती है कार्रवाई

जस्टिस संजय करोल और ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति वाहन की नंबर प्लेट छिपाता है, तो उसके खिलाफ अधिकतम मोटर व्हीकल एक्ट, 1988 के तहत चालान या जुर्माना लगाया जा सकता है। हालांकि, इसे आपराधिक कृत्य या धोखाधड़ी की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।

क्या था पूरा मामला?

याचिकाकर्ता मोहम्मद अब्दुल अहद शाकेर 5 जून 2020 को अपनी एक्टिवा स्कूटर चला रहे थे। आरोप था कि उनकी गाड़ी की पिछली नंबर प्लेट पर काला मास्क लगा हुआ था, जिससे नंबर दिखाई नहीं दे रहा था। गश्त पर तैनात एक पुलिसकर्मी ने उन्हें रोक लिया और आरोप लगाया कि उन्होंने ट्रैफिक चालान से बचने के उद्देश्य से नंबर प्लेट छिपाकर पुलिस को धोखा देने की कोशिश की। इसके बाद उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420 और मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 80(ए) के तहत एफआईआर दर्ज की गई।

हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली, फिर पहुंचे सुप्रीम कोर्ट

एफआईआर को चुनौती देते हुए मोहम्मद अब्दुल अहद शाकेर ने सबसे पहले तेलंगाना हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हालांकि, हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की, जहां शीर्ष अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए उनके खिलाफ दर्ज धोखाधड़ी का केस रद्द कर दिया।

फैसले का क्या मतलब है?

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि वाहन की नंबर प्लेट छिपाना ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन है और इसके लिए मोटर व्हीकल एक्ट के तहत कार्रवाई की जा सकती है। लेकिन केवल इस आधार पर किसी व्यक्ति पर धोखाधड़ी या अन्य आपराधिक धाराएं लगाना उचित नहीं माना जाएगा। यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों में पुलिस कार्रवाई की सीमा भी स्पष्ट करता है।

Pradeep Pandey
प्रदीप पाण्डेयauthor

प्रदीप पाण्डेय टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट पर कंटेंट तैयार करते हैं। डिजिटल मीडिया में 10 वर्षों के अनुभव के साथ प्रदीप तकनीक की दुनिया को समझने और उसे आम पाठकों तक सरल व उपयोगी रूप में पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। प्रदीप अब तक 11,000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुके हैं। वह गैजेट रिव्यू, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टेक टिप्स और नवीनतम टेक इनोवेशन पर लगातार काम करते हैं। एआई टूल्स पर एक्सपेरिमेंट करना, नए ऐप्स टेस्ट करना और टेक से जुड़े प्रैक्टिकल सॉल्यूशंस खोजने में उनकी खास रुचि है।

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