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अब नहीं चलेगी मकान मालिकों की मनमानी! 2 महीने से ज्यादा की सिक्योरिटी लेना पड़ेगा महंगा

किराएदारों के लिए बड़ी राहत यह है कि अब मकान मालिक मनमर्जी से किराया नहीं बढ़ा पाएंगे। नए नियम साफ कहते हैं कि किराया बढ़ोतरी केवल उसी शर्त के अनुसार होगी, जो रेंट एग्रीमेंट में पहले से लिखी गई है। साथ ही, किसी भी बदलाव के लिए मकान मालिक को कम से कम 3 महीने पहले लिखित नोटिस देना जरूरी होगा। इससे किराएदारों पर अचानक बढ़े किराए का बोझ नहीं पड़ेगा।

House Rent

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देश में लाखों लोग किराये पर रहते हैं और अक्सर उन्हें मकान मालिकों की मनमर्जी झेलनी पड़ती है। कई जगह घर किराये पर लेते समय 4–6 महीने की सिक्योरिटी मनी मांग ली जाती है, तो कहीं बिना किसी लिखित समझौते के किराया बढ़ा दिया जाता है। इसी परेशानी को खत्म करने के लिए सरकार अब Model Tenancy Act को देशभर में लागू करने पर ज़ोर दे रही है। नए रेंट रूल्स 2025 में कई ऐसे प्रावधान शामिल किए गए हैं, जिनसे किराएदारों को बड़ी राहत मिलेगी और रेंट सिस्टम पहले से कहीं ज्यादा साफ, सुरक्षित और पारदर्शी बन जाएगा।

सबसे बड़ी राहत

सबसे बड़ा बदलाव सिक्योरिटी डिपॉजिट को लेकर किया गया है। अब मकान मालिक अपनी मर्जी से 4–6 महीने का सिक्योरिटी डिपॉजिट नहीं मांग पाएंगे। नियम के अनुसार, रेसिडेंशियल यानी रहने वाले घरों के लिए अधिकतम 2 महीने का सिक्योरिटी डिपॉजिट ही लिया जा सकेगा। जबकि दुकानों और ऑफिस जैसी कमर्शियल प्रॉपर्टीज के लिए यह सीमा 6 महीने रखी गई है। इससे किराएदारों पर घर लेते समय पड़ने वाला भारी आर्थिक बोझ काफी कम हो जाएगा।

इसके साथ ही नए नियमों में यह भी साफ है कि अब बिना लिखित रेंट एग्रीमेंट के घर किराये पर नहीं दिया जा सकेगा। मतलब, किराए से जुड़ी सारी बातें किराया कितना होगा, कब बढ़ेगा, मकान की मरम्मत की जिम्मेदारी किसकी होगी, एग्रीमेंट कितने समय के लिए है सब कुछ दस्तावेज़ में साफ-साफ लिखा होगा। इतना ही नहीं, एग्रीमेंट बनते ही दोनों पक्षों को इसे 60 दिनों के अंदर रेंट अथॉरिटी में जमा करना अनिवार्य होगा।

डिजिटल प्लेटफॉर्म की सुविधा

सरकार ने रेंट एग्रीमेंट को और आसान बनाने के लिए एक डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म की भी व्यवस्था की है। राज्यों को ऐसे प्लेटफॉर्म तैयार करने होंगे जहां रेंट एग्रीमेंट ऑनलाइन दर्ज किया जा सके। इससे एग्रीमेंट का रिकॉर्ड आधिकारिक रूप से मान्य रहेगा और किसी विवाद की स्थिति में यह सबसे बड़ा सबूत साबित होगा। किराएदार और मकान मालिक, दोनों के लिए यह प्रक्रिया पहले से कहीं आसान और सुरक्षित होगी।

किराया बढ़ाने के नियम भी पहले से कड़े हो गए हैं। मकान मालिक अब मनमाने तरीके से किराया नहीं बढ़ा सकेंगे। किराया वही बढ़ेगा, जो लिखित समझौते में पहले से तय हो। इसके अलावा किराया बढ़ाने से कम से कम 3 महीने पहले किराएदार को लिखित नोटिस देना जरूरी होगा। इससे किराएदारों को तैयारी का समय मिलेगा और अचानक बोझ नहीं पड़ेगा।

मकान खाली कराने को लेकर नियम

नए नियमों में बेदखली यानी मकान ख़ाली करवाने को लेकर भी स्पष्ट शर्तें हैं। मकान मालिक अब बिना वजह किराएदार को घर से बाहर नहीं निकाल सकते। बेदखली तभी होगी जब रेंट अथॉरिटी का आदेश होगा और उसके पीछे कोई वैध कारण होगा जैसे किराया न देना, अवैध गतिविधि, या बिना अनुमति सबलेट करना। इससे किराएदारों में सुरक्षा की भावना बढ़ेगी।

यदि लीज खत्म होने के बाद भी किराएदार मकान खाली नहीं करता, तो उसे भारी जुर्माना देना पड़ेगा। नए नियम के अनुसार, पहले दो महीने तक दोगुना किराया और उसके बाद चार गुना किराया देना होगा। इससे मकान मालिकों को भी सुरक्षा मिलती है कि किराएदार अनावश्यक देरी न करें।

सरकार की तैयारी

सरकार एक समान रेंट एग्रीमेंट टेम्पलेट भी लाने की तैयारी में है, ताकि कोई भी पक्ष मनमर्जी की शर्तें न जोड़ सके। यह टेम्पलेट पूरे देश में एक जैसा होगा, जिससे धोखाधड़ी की संभावनाएं बहुत कम हो जाएंगी और किराए पर घर लेना बेहद आसान हो जाएगा। विवादों के निपटारे के लिए भी नया सिस्टम बनाया गया है, जिसमें रेंट अथॉरिटी, रेंट कोर्ट और रेंट ट्रिब्यूनल के तीन स्तर शामिल होंगे। इसका उद्देश्य है कि किराए से जुड़े विवाद 60 दिनों के अंदर निपट जाएं और लोगों को वर्षों तक कोर्ट-कचहरी का चक्कर न काटना पड़े।

हालांकि यह कानून मॉडल स्वरूप में है, इसलिए इसे लागू करना राज्यों की ज़िम्मेदारी है। कई राज्य जैसे उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु इसे आंशिक रूप से लागू कर चुके हैं। दिल्ली भी पुराने 1958 के कानून की जगह नया कानून लाने की तैयारी में है।

रिचा त्रिपाठी
रिचा त्रिपाठी author

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिच... और देखें

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