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RO vs UV Water Purifier: कौन सा वॉटर प्यूरीफायर है आपके घर के लिए बेहतर? खरीदने से पहले समझें

RO और UV वॉटर प्यूरीफायर को लेकर अक्सर बहस होती है कि इनमें से बेहतर कौन है और दोनों में कौन-सा किसके लिए परफेक्ट है। आइए आज इसे समझने की कोशिश करते हैं।

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किस इलाके के लिए कौन-सा प्यूरीफायर सही?Photo-AI

आज के समय में साफ और सुरक्षित पीने का पानी हर परिवार की प्राथमिक जरूरत बन गया है। इसी वजह से अधिकांश लोग घर में वॉटर प्यूरीफायर लगवाते हैं, हालांकि बाजार में RO (Reverse Osmosis) और UV (Ultraviolet) वॉटर प्यूरीफायर सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं, लेकिन अक्सर लोगों के मन में सवाल रहता है कि दोनों में क्या अंतर है और उनके घर के लिए कौन-सा विकल्प बेहतर रहेगा। आइए आसान भाषा में समझते हैं।

RO वॉटर प्यूरीफायर कैसे काम करता है?

RO यानी रिवर्स ऑस्मोसिस तकनीक में पानी को एक बेहद महीन मेम्ब्रेन से गुजारा जाता है। यह मेम्ब्रेन पानी में मौजूद घुले हुए नमक, भारी धातुओं, आर्सेनिक, फ्लोराइड, लेड और अन्य अशुद्धियों को अलग कर देती है। इसके बाद पानी पीने के लिए अधिक सुरक्षित हो जाता है। अगर आपके इलाके के पानी में TDS ज्यादा है या पानी खारा है, तो RO प्यूरीफायर सबसे उपयुक्त माना जाता है।

UV वॉटर प्यूरीफायर कैसे करता है पानी साफ?

UV यानी अल्ट्रावायलेट तकनीक में पानी को पराबैंगनी (Ultraviolet) किरणों से गुजारा जाता है। ये किरणें पानी में मौजूद बैक्टीरिया, वायरस और अन्य सूक्ष्म जीवों को निष्क्रिय कर देती हैं, हालांकि UV तकनीक पानी में घुले हुए नमक, केमिकल या भारी धातुओं को नहीं हटाती। इसलिए यह केवल उन क्षेत्रों के लिए बेहतर मानी जाती है, जहां पानी पहले से साफ हो और TDS कम हो।

RO और UV में सबसे बड़ा अंतर क्या है?

दोनों तकनीकों का उद्देश्य पानी को सुरक्षित बनाना है, लेकिन उनका तरीका अलग है। RO पानी में मौजूद घुले हुए ठोस पदार्थ (TDS) और रासायनिक अशुद्धियों को हटाता है, जबकि UV केवल बैक्टीरिया और वायरस को खत्म करता है। यही कारण है कि RO प्यूरीफायर उन क्षेत्रों में अधिक उपयोगी है, जहां भूजल या बोरवेल का पानी इस्तेमाल होता है। वहीं नगर निगम के साफ पानी वाले इलाकों में UV प्यूरीफायर भी पर्याप्त हो सकता है।

किस इलाके के लिए कौन-सा प्यूरीफायर सही?

अगर आपके घर में बोरवेल, ट्यूबवेल या खारे पानी की सप्लाई होती है और TDS अधिक है, तो RO प्यूरीफायर बेहतर विकल्प रहेगा। वहीं यदि आपके घर में नगर निगम का साफ पानी आता है और उसका TDS कम है, तो UV प्यूरीफायर पर्याप्त हो सकता है।

क्या RO में पानी की बर्बादी होती है?

RO प्यूरीफायर का एक नुकसान यह है कि इसमें पानी फिल्टर करते समय कुछ मात्रा में पानी वेस्ट होता है, हालांकि आजकल कई कंपनियां कम वेस्टेज वाले RO सिस्टम भी पेश कर रही हैं। दूसरी ओर, UV प्यूरीफायर में पानी लगभग बर्बाद नहीं होता, क्योंकि इसमें फिल्ट्रेशन की बजाय UV किरणों से कीटाणु नष्ट किए जाते हैं।

मेंटेनेंस और खर्च में कितना अंतर?

RO प्यूरीफायर में फिल्टर और मेम्ब्रेन को समय-समय पर बदलना पड़ता है, इसलिए इसका रखरखाव खर्च अपेक्षाकृत अधिक होता है। UV प्यूरीफायर में आमतौर पर केवल UV लैम्प और कुछ फिल्टर बदलने होते हैं, इसलिए इसकी मेंटेनेंस लागत कम हो सकती है।

RO+UV कॉम्बिनेशन क्यों हो रहा है लोकप्रिय?

आजकल बाजार में RO+UV+UF जैसी मल्टी-स्टेज प्यूरीफिकेशन तकनीक वाले वॉटर प्यूरीफायर तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। इनमें RO पानी से TDS और अशुद्धियां हटाता है, जबकि UV बैक्टीरिया और वायरस को निष्क्रिय करता है। ऐसे सिस्टम अलग-अलग तरह के पानी के लिए अधिक प्रभावी माने जाते हैं।

खरीदने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

वॉटर प्यूरीफायर खरीदने से पहले अपने इलाके के पानी का TDS लेवल, पानी का स्रोत (बोरवेल या नगर निगम), परिवार के सदस्यों की संख्या, बिजली की उपलब्धता और मेंटेनेंस लागत जरूर जांच लें। कई एक्सपर्ट पहले पानी की गुणवत्ता की जांच कराने की भी सलाह देते हैं।

Pradeep Pandey
प्रदीप पाण्डेयauthor

प्रदीप पाण्डेय टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट पर कंटेंट तैयार करते हैं। डिजिटल मीडिया में 10 वर्षों के अनुभव के साथ प्रदीप तकनीक की दुनिया को समझने और उसे आम पाठकों तक सरल व उपयोगी रूप में पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। प्रदीप अब तक 11,000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुके हैं। वह गैजेट रिव्यू, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टेक टिप्स और नवीनतम टेक इनोवेशन पर लगातार काम करते हैं। एआई टूल्स पर एक्सपेरिमेंट करना, नए ऐप्स टेस्ट करना और टेक से जुड़े प्रैक्टिकल सॉल्यूशंस खोजने में उनकी खास रुचि है।

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