DHRUVA : संचार मंत्रालय के अंतर्गत डाक विभाग ने DHRUVA (डिजिटल हब फॉर रेफरेंस एंड यूनिक वर्चुअल एड्रेस) नीति दस्तावेज़ जारी किया है। यह एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय स्तर पर डिजिटल एड्रेस डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) तैयार करना है।
डाक विभाग ने DHRUVA नीति दस्तावेज जारी किया है, जिसका उद्देश्य पूरे देश में एक डाक (स्टैंडर्ड), डिजिटल पता प्रणाली बनाना है। इस नीति के तहत, हर पता एक डिजिटल और जियो-लोकेशन वाला (भू-स्थानिक) रूप लेगा, जिससे पते से जुड़ी जानकारी को सुरक्षित, सहमति के साथ और आसानी से साझा किया जा सकेगा।
इसका मतलब है कि अब पते को भी एक डिजिटल सेवा की तरह इस्तेमाल किया जा सकेगा, ठीक वैसे जैसे आधार या डिजिटल पेमेंट होते हैं। इससे सरकारी विभाग, निजी कंपनियां और आम लोग आपस में सुरक्षित और तेज़ तरीके से पता साझा कर सकेंगे।
इस नीति का मकसद है कि देशभर में गवर्नेंस, डिलीवरी सर्विसेज (जैसे ई-कॉमर्स या पोस्ट), और फाइनेंशियल सेवाएं और भी बेहतर, तेज़ और भरोसेमंद हो सकें।
DHRUVA का फोकस
- सभी राज्यों और मंत्रालयों में इस डिजिटल पते को अपनाना
- सरकार और प्राइवेट कंपनियों का साथ आकर मिलकर काम करना
- लोगों को बेहतर सेवाएं देना- जैसे सटीक डिलीवरी, तेज़ सरकारी सुविधाएं और डिजिटल पहचान
DHRUVA योजना पते की डिजिटल पहचान बनाएगी, जिससे आपका पता मोबाइल या ऐप में सेव हो सकेगा, उसे आसानी से शेयर किया जा सकेगा, और गलत पते या डिलीवरी में होने वाली समस्याएं कम होंगी।
विज्ञप्ति के मुताबिक, "इसके मूल में 'एक सेवा के रूप में पता' की अवधारणा है जो उपयोगकर्ताओं, सरकारी संस्थाओं और निजी क्षेत्र के संगठनों के बीच सुरक्षित और कुशल बातचीत का समर्थन करने के लिए पता डेटा प्रबंधन से जुड़ी सेवाओं का समूह है।" इस पहल का उद्देश्य पता सूचना प्रबंधन को एक मूलभूत सार्वजनिक बुनियादी ढांचे (डीपीआई) के रूप में चिह्नित करना है जो प्रभावी शासन, समावेशी सेवा वितरण और बेहतर उपयोगकर्ता अनुभव के लिए महत्वपूर्ण है।
ध्रुव का उद्देश्य एक सहयोगी पारिस्थितिकी को बढ़ावा देना है जिसमें सार्वजनिक और निजी हितधारक एक सुरक्षित एवं विश्वसनीय डिजिटल बुनियाद पर निर्मित उपयोगकर्ता-केंद्रित समाधान का मिलकर निर्माण करते हैं। विज्ञप्ति के मुताबिक, इसका उद्देश्य मंत्रालयों, राज्य सरकारों और अन्य हितधारकों द्वारा व्यापक आधार पर अपनाए जाने के माध्यम से शासन, ई-कॉमर्स, लॉजिस्टिक और वित्तीय समावेशन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में नवाचार को बढ़ावा देना है।
