लंबे समय से देश के कई राज्यों में स्मार्ट प्री-पेड बिजली मीटर को लेकर हंगामा हो रहा है। लोगों का कहना है कि स्मार्ट मीटर सरकार जबरदस्ती थोप रही है। कई लोगों को यह भी दावा है कि स्मार्ट बिजली मीटर लगाने के बाद से उनका बिल अधिक आ रहा है। अब सरकार ने स्मार्ट बिजली मीटर के यूजर्स को बड़ी राहत दी है।
मनोहर लाल खट्टर ने स्मार्ट बिजली मीटर पर दिया बड़ा बयान
देशभर में स्मार्ट बिजली मीटर को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा स्पष्टिकरण दिया है। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने लोकसभा में कहा कि प्रीपेड स्मार्ट इलेक्ट्रिक मीटर सभी उपभोक्ताओं के लिए अनिवार्य नहीं हैं।
लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान पूरक सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने यह जानकारी दी, जिससे आम उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है। हाल के समय में यह आशंका जताई जा रही थी कि सरकार सभी घरों में प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाना अनिवार्य कर सकती है।
क्या कहा ऊर्जा मंत्री ने?
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने साफ तौर पर कहा कि उपभोक्ताओं को प्रीपेड स्मार्ट मीटर अपनाने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा। यह पूरी तरह से वैकल्पिक है और उपभोक्ता अपनी सुविधा के अनुसार इसका चयन कर सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि स्मार्ट मीटर अपनाने से उपभोक्ताओं, राज्यों और बिजली वितरण कंपनियों (DISCOMs) सभी को फायदा हो सकता है।
प्रीपेड स्मार्ट मीटर के फायदे
सरकार के अनुसार, प्रीपेड स्मार्ट मीटर बिजली उपभोग को अधिक पारदर्शी और नियंत्रित बनाते हैं। इसमें उपभोक्ता पहले से रिचार्ज करके बिजली का उपयोग कर सकते हैं, जिससे अनावश्यक खर्च पर नियंत्रण रहता है। इसके अलावा, इससे बिलिंग में गड़बड़ी की संभावना कम होती है और रियल-टाइम में बिजली खपत की जानकारी मिलती है। बिजली कंपनियों के लिए भी यह सिस्टम फायदेमंद है क्योंकि इससे बकाया बिल की समस्या कम होती है और राजस्व वसूली बेहतर होती है।
कई राज्यों में शुरू हो चुका है लागू
सरकार ने बताया कि देश के कई राज्यों में पहले से ही प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। इन क्षेत्रों में इस तकनीक के सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं। राज्य सरकारें अपने स्तर पर इस योजना को लागू कर रही हैं, लेकिन इसे अनिवार्य बनाने का कोई निर्णय केंद्र सरकार की ओर से नहीं लिया गया है।
उपभोक्ताओं के लिए क्या है विकल्प?
इस घोषणा के बाद अब यह साफ हो गया है कि उपभोक्ताओं के पास विकल्प रहेगा। वे चाहें तो पारंपरिक मीटर का उपयोग जारी रख सकते हैं या फिर स्मार्ट प्रीपेड मीटर अपना सकते हैं। यह फैसला उपभोक्ता की जरूरत, बजट और सुविधा पर निर्भर करेगा।
