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Zomato-Swiggy डिलीवरी बॉय के लिए सबसे बड़ी खबर, सरकार ने जारी किया सामाजिक सुरक्षा नियमों का मसौदा

हो सकता है कि अब तक कई प्लेटफॉर्म और कंपनियों ने गिग वर्कर्स की मांगों को नजरअंदाज किया हो, लेकिन सरकार ने उनकी बात सुनी है। श्रम मंत्रालय द्वारा लाया गया यह मसौदा इस बात का संकेत है कि गिग वर्कर्स की समस्याओं को अब गंभीरता से लिया जा रहा है और इसका स्वागत किया जाना चाहिए।

Gig workers draft social security rules

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डिलीवरी बॉय और राइडर्स के लंबे संघर्ष के बाद अब केंद्र सरकार ने गिग वर्कर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा नियमों का मसौदा जारी किया है। यह कदम उन लाखों लोगों के लिए राहत की खबर है जो प्लेटफॉर्म के जरिए काम करते हैं और अब तक सामाजिक सुरक्षा से वंचित थे। यह बदलाव आप सभी की आवाज़ और संघर्ष का परिणाम है।

सरकार ने गिग वर्कर्स की बात सुनी

हो सकता है कि अब तक कई प्लेटफॉर्म और कंपनियों ने गिग वर्कर्स की मांगों को नजरअंदाज किया हो, लेकिन सरकार ने उनकी बात सुनी है। श्रम मंत्रालय द्वारा लाया गया यह मसौदा इस बात का संकेत है कि गिग वर्कर्स की समस्याओं को अब गंभीरता से लिया जा रहा है और इसका स्वागत किया जाना चाहिए।

कानून की नजर में पहचान और मान्यता

इन नए नियमों के तहत गिग वर्कर्स को पहली बार कानून की नजर में स्पष्ट पहचान मिलेगी। आपको स्वतंत्र ठेकेदार, अंशकालिक कर्मचारी या गैर-पेशेवर कर्मचारी के रूप में नहीं, बल्कि एक श्रमिक के रूप में मान्यता दी जाएगी। इसका मतलब है कि अब आप सिस्टम के लिए अदृश्य नहीं रहेंगे।

सामाजिक सुरक्षा के लिए पात्रता की शर्तें

यदि कोई गिग वर्कर किसी एक प्लेटफॉर्म पर साल में कम से कम 90 दिन काम करता है या एक से अधिक प्लेटफॉर्म पर कुल 120 दिन काम करता है, तो वह सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लिए पात्र होगा। इससे बड़ी संख्या में गिग वर्कर्स को सुरक्षा के दायरे में लाया जा सकेगा।

सरकारी पोर्टल पर पंजीकरण और डिजिटल पहचान

सभी गिग वर्कर्स का पंजीकरण एक सरकारी पोर्टल पर किया जाएगा। इसके बाद प्रत्येक वर्कर को एक यूनिवर्सल अकाउंट नंबर और डिजिटल पहचान पत्र मिलेगा। यह पहचान इतनी मजबूत होगी कि कोई भी कंपनी आपको गुप्त एल्गोरिदम के ज़रिए अचानक सिस्टम से बाहर नहीं कर पाएगी।

कंपनियों की कानूनी जिम्मेदारी तय

अब प्लेटफॉर्म कंपनियों को सभी गिग वर्कर्स का पंजीकरण करना, उनका डेटा सरकार के साथ साझा करना और हर तीन महीने में इसे अपडेट करना कानूनी रूप से अनिवार्य होगा। अब यह कहकर ज़िम्मेदारी से नहीं बचा जा सकेगा कि “हम सिर्फ एक टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म हैं।”

सामाजिक सुरक्षा कोष का निर्माण

गिग वर्कर्स के लिए एक विशेष सामाजिक सुरक्षा कोष बनाया जाएगा। इसमें प्लेटफॉर्म कंपनियों और एग्रीगेटर्स को अपनी आय का एक निश्चित प्रतिशत जमा करना होगा। यह कोई दान या सीएसआर गतिविधि नहीं, बल्कि कानून द्वारा तय की गई ज़िम्मेदारी होगी, और इस धन का उपयोग सीधे गिग वर्कर्स की सुरक्षा पर किया जाएगा।

राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड की स्थापना

इन नियमों के तहत एक राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड का गठन भी किया जाएगा। यह बोर्ड गिग वर्कर्स के कल्याण से जुड़ी योजनाएँ बनाएगा, उनकी समस्याएँ सुनेगा और नीतियों को बेहतर बनाने के लिए विशेषज्ञ समिति की मदद लेगा।

गिग वर्कर्स को मिलने वाले प्रमुख लाभ

इन सभी प्रावधानों के लागू होने से गिग वर्कर्स को दुर्घटना बीमा, स्वास्थ्य बीमा, जीवन बीमा, न्यूनतम मजदूरी, मातृत्व और स्वास्थ्य लाभ, पेंशन और वृद्धावस्था लाभ, तथा कार्यस्थल सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण अधिकार और सुविधाएं मिलेंगी।

Pradeep Pandey
Pradeep Pandey author

प्रदीप पाण्डेय टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट पर कंटेंट तैयार करते हैं। डिजिटल मीडिया में 10 वर्षों के अनुभव के साथ प्रदीप तकनीक की दुनिय... और देखें

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