चुनाव में मिली शिकस्त को स्वीकार नहीं कर सके यहां के प्रधानमंत्री, संसद में जड़ दिया ताला

एक प्रधानमंत्री को जब आम चुनाव में हार मिली तो वह इसे बर्दाश्त नहीं कर पाए और उन्होंने संसद पर ताला लगवा दिया जिस वजह से नए पीएम को तंबू में शपथ लेनी पड़ी।

Ousted Samoa Prime Minister refuses to cede power, despite election loss
चुनाव में मिली हार,तो यहां के PM ने संसद पर ही लगा दिया ताला  |  तस्वीर साभार: AP

नई दिल्ली: सत्ता का सुख हर नेता भोगना चाहता है। कई नेताओं को सत्ता हासिल होती है तो इसका नशा भी चढ़ जाता है और फिर वो सही गलत की पहचान करने में भी चूक जाते हैं। कुछ ऐसा ही एक मामला आया है प्रशांत महासागर स्थित समोआ (Samoa)देश में। जहां आम चुनाव में देश के प्रधानमंत्री को जब हार मिली तो वह इसे बर्दाश्त नहीं कर सके और नई प्रधानमंत्री के लिए उन्होंने संसद को ही लॉक कर दिया यानि संसद पर ताला जड़ दिया।

कोर्ट पहुंच गया था मामला
समोआ के प्रधानमंत्री तुइलेपा सैलेले मालिएलेगाओई ने अप्रैल में हुए चुनाव नतीजों को रद्द कर मई में नए चुनाव कराने का ऐलान कर दिया था लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव ने इस पर रोक लगा दी थी। चुनाव के बाद  तुइलेपा ने कहा कि वह देश के सर्वोच्च न्यायालय के एक आदेश के बावजूद पद पर बने रहेंगे। समोआ के सुप्रीम कोर्ट ने पिछले हफ्ते अप्रैल के चुनाव परिणामों को रद्द करने की मांग वाली तुइमालीलीफ़ानो वैलेटोआ सुआलौवी II की याचिका को रद्द कर दिया था। 

विपक्षी नेता की पार्टी को मिली थी जीत
चुनाव के दौरान विपक्षी पार्टी को जीत मिली थी और चुनाव के बाद चुनाव के बाद विपक्षी नेता फियामे नाओमी माताफा समोआ की पहली महिला प्रधान मंत्री बनने के लिए तैयार थीं। फियमा ने वादा किया था कि यदि वो सत्ता में आती हैं तो वह 100 मिलियन डॉलर के चीनी समर्थित बंदरगाह विकास को रद्द करेंगी। इसे छोटे प्रशांत द्वीप के देश में चीन ने पहले से ही काफी निवेश किया है और समोआ चीन के कर्ज तले दबा हुआ है।

संसद में ताला लगने की वजह से खुले में हुई शपथ
अपनी हार के बाद जब निवर्तमान पीएम तुइलेपा ने संसद पर ताला लगा दिया तो देश की पहली महिला पीएम नाओमी माताफा को संसद के बाहर तंबू लगाकर शपथ लेनी पड़ी। इससे पहले तुइलेपा ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को भी मानने से इंकार करते हुए कहा था कि वह अपनी भूमिका में बने हुए हैं और एक देश के प्रमुख होने के नाते उनके पास ही केवल संसद सत्र बुलाने का अधिकार है।

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