Wildlife Tourism India: एडवेंचर और वाइल्डलाइफ के शौकीन हैं तो मध्य प्रदेश का कूनो नेशनल पार्क आपकी अगली ट्रैवल डेस्टिनेशन हो सकता है। हाल ही में कूनो से एक बहुत ही अच्छी खबर सामने आई है। नामीबिया से लाई गई चीता-आशा ने हाल ही में पांच शावकों को जन्म दिया है। इसके साथ ही भारत में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 35 हो गई है।
भविष्य में पर्यटन को बढ़ावा मिल सके और वाइल्डलाइफ लवर्स को नया अनुभव मिले इसके लिए ही अब कूनो नेशनल पार्क सिर्फ बाघों के लिए ही नहीं, बल्कि चीता संरक्षण के नए केंद्र के रूप में भी पहचाना जाने लगा है। हालांकि, अभी यहां चीते देखना आसान नहीं है क्योंकि सफारी रूट सीमित हैं। लेकिन इसका फायदा यह है कि पार्क में संरक्षण को सबसे ज्यादा अहमियत दी जा रही है।
आशा और उसके शावकों का जन्म यह दिखाता है कि भारत वन्यजीव संरक्षण की सही दिशा में आगे बढ़ रहा है और आने वाले समय में कुनो एक बड़ा वाइल्डलाइफ डेस्टिनेशन बन सकता है।
बता दें कि भारत में चीतों की वापसी की शुरुआत 17 सितंबर 2022 को हुई थी, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुनो नेशनल पार्क में आठ चीतों को छोड़ा था। आशा उसी पहले समूह की चीता है और यह दूसरी बार है जब वह मां बनी है। यह भारतीय वन्यजीव संरक्षण के लिए एक बड़ी कामयाबी मानी जा रही है।
सफारी का अनुभव: जीप सफारी के जरिए आप जंगल घूम सकते हैं। चीता दिखना अभी थोड़ा मुश्किल है, लेकिन आप सफारी के दौरान हिरण, नीलगाय, सियार, तेंदुआ और ढेरों पक्षी देख सकते हैं। मालूम हो कि सफारी सीमित रूट पर होती है, ताकि वन्यजीवों को नुकसान ना हो।
घूमने का सबसे अच्छा समय: अक्टूबर से मार्च यहां घूमने का सबसे बेस्ट टाइम है। भले ही गर्मी काफी हो लेकिन, गर्मियों में सफारी आसानी से मिलती है। मानसून (जुलाई–सितंबर) में पार्क बंद रहता है।
कैसे पहुंचें: अगर आप यहां जाने का प्लान कर रहे हैं तो जान लें कि इसके नजदीकी रेलवे स्टेशन: श्योपुर (लगभग 30 किमी) है। नजदीकी एयरपोर्ट: ग्वालियर (करीब 165 किमी) है। ग्वालियर या कोटा से टैक्सी/बस से यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है। परिवार के साथ या फिर सोलो ट्रिप पर जाने का आप प्लान कर सकते हैं। बच्चों के साथ एक्सप्लोर करने के लिए भी ये परफेक्ट ट्रैवल डेस्टिनेशन है।
